18 महीनों से चल रही है गोरखपुर ऑक्सीजन कांड की विभागीय जांच, निलंबित डॉक्टर ने बच्चों की मौत की सीबीआई जांच की मांग की

दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण 60 से अधिक बच्चों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा निलंबित किये जाने की घटना की पिछले 18 महीनों से विभागीय जांच अभी तक चल रही है|

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Highlights

  • दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण 60 से अधिक बच्चों की मौत हो गयी थी|
  • 18 महीनों से चल रही है गोरखपुर ऑक्सीजन कांड की विभागीय जांच, निलंबित डॉक्टर ने बच्चों की मौत की सीबीआई जांच की मांग की है|
  • “इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोग खुले घूम रहे हैं” डॉक्टर कफील
  • डॉ कफ़ील ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि जीडीपी का कम से कम तीन फीसदी स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च किया जाए|
  • उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मौजूदा रिक्तियां लगभग 1.5 लाख होने की उम्मीद है और इसे जल्द से जल्द भरने की जरूरत है|  

दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण 60 से अधिक बच्चों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा निलंबित किये जाने की घटना की पिछले 18 महीनों से विभागीय जांच अभी तक चल रही है| जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मार्च 2018 में आदेश दिया था कि इसे तीन महीने के भीतर पूरा किया जाए|

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट के आरोप में निलंबित किए गए डॉ. कफील खान ने मंगलवार को इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है|

सभी के लिए स्वास्थ्यअभियान के सिलसिले में डॉ कफ़ील बिहार आए उसके बाद वह बेगूसराय में सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार के पक्ष में प्रचार करने के बाद मंगलवार को पटना गए| उन्होंने यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं बीआरडी में बच्चों की मौत की सीबीआई जांच कराए जाने के साथ इस मामले को उत्तर प्रदेश के बाहर स्थानांतरित किए जाने की भी मांग करता हूं| आगे उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोग खुले घूम रहे हैं|  

डॉ कफ़ील ने दावा किया, ‘हाईकोर्ट ने भी कहा कि मैं किसी भी चिकित्सा लापरवाही या भ्रष्टाचार का दोषी नहीं था और ही मैं किसी भी तरह से निविदा प्रक्रिया में शामिल था|  एक आरटीआई जांच ने यह भी स्थापित किया है कि सिलेंडर की कमी 54 घंटों तक जारी रही थी और मैंने अपने बच्चों को बचाने के लिए खुद ही सिलेंडर की व्यवस्था की थी|’

उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा किमुझे उस त्रासदी के लिए बलि का बकरा बनाया गया जो कि आपूर्तिकर्ता को बकाया भुगतान करने के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति में कमी के कारण हुई थी| मैं मानता हूं कि असली दोषी वे अधिकारी हैं जो बकाया भुगतान के लिए आपूर्तिकर्ताओं से पत्र की मांग कर रहे |’

डॉ कफ़ील ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि जीडीपी का कम से कम तीन फीसदी स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च किया जाए| उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मौजूदा रिक्तियां लगभग 1.5 लाख होने की उम्मीद है और इसे जल्द से जल्द भरने की जरूरत है|

बता दें कि साल 2017 के अगस्त महीने में गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते 60 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी| हालांकि प्रशासन ने लगातार इस बात को मानने से इंकार किया कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति की वजह से हुई|

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि सात अगस्त 2017 से 60 बच्चों की मौत विभिन्न बीमारियों से हुई, इनमें से किसी भी बच्चे की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई|

मालूम हो कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 10 अगस्त की रात लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो गई थी जो 13 अगस्त की सुबह बहाल हो पायी| इस दौरान 10, 11 और 12 अगस्त को क्रमशः 23, 11 12 बच्चों की की मौत हुई| हालांकि प्रदेश की योगी सरकार ने शुरू से ही ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत होने से इनकार किया|

सरकार का कहना था कि लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई जरूर बाधित हुई थी लेकिन जम्बो ऑक्सीजन सिलेण्डर की पर्याप्त व्यवस्था थी जिसके कारण किसी मरीज की मौत नहीं हुई| सरकार द्वारा गठित जांच समितियों ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में सरकार की ही बात तस्दीक की है|

इस मामले में डीएम द्वारा गठित जांच समिति और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की छानबीन के आधार पर ऑक्सीजन कांड के लिए पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, नोडल अधिकारी एनएचएम 100 बेड इंसेफेलाइटिस वॉर्ड डॉ. कफ़ील ख़ान, एचओडी एनस्थीसिया विभाग एवं ऑक्सीजन प्रभारी डॉ. सतीश कुमार, चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल, सहायक लेखा अनुभाग उदय प्रताप शर्मा, लेखा लिपिक लेखा अनुभाग संजय कुमार त्रिपाठी, सहायक लेखाकार सुधीर कुमार पांडेय, ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनीष भंडारी और पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को दोषी ठहराया गया था|

साल 2017 में 23 अगस्त को मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट आई जिसमें ऑक्सीजन संकट का ज़िक्र तक नहीं था| मुख्य सचिव की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई की भी घोषणा कर दी थी| कार्रवाई की ज़द में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्राचार्य उनकी पत्नी, दो चिकित्सक, एक चीफ फार्मासिस्ट और प्राचार्य कार्यालय के तीन बाबू और लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड आए|  

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Gorakhpur Oxygen scandal is under investigation for 18 months, suspended doctor demanded CBI inquiry into the death of children
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दो साल पहले गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी के कारण 60 से अधिक बच्चों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा निलंबित किये जाने की घटना की पिछले 18 महीनों से विभागीय जांच अभी तक चल रही है|
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THE POLICY TIMES