अमेरिका-चीन ट्रेड वार: भारतीय शेयर बाजारों का हो रहा बुरा हाल, सेंसेक्स 37,590 के नीचे

ट्रंप ने साफ़ कह दिया है कि चीन से होने वाले व्‍यापार पर अरबों डॉलर का नुकसान अमेरिका को झेलना पड़ रहा है| इतना ही नहीं द्विपक्षीय व्यापार में यह नुकसान 600 से 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा|

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अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार से तानव बढ़ते जा रहे है| अमेरिका ने यह साफ़ कर दिया है कि यदि चीन ट्रेड वार को खत्‍म करने का कोई जरिया नहीं तलाशता है तो इस शुक्रवार से चीनी उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा| ट्रंप के इस ट्वीट का असर चीन ही नहीं एशिया और यूरोप के शेयर बाजारों तक दिख रहा है|

अमेरिकी और चीन के बीच ट्रेड वार के चलते बीते दस माह से चीन हाईटेक उपकरणों पर 25 फीसदी और 200 अरब डॉलर के अन्य उत्पादों पर 10 फीसदी आयात शुल्क चुका रहा है| अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह चेतावनी दी है कि यदि ट्रेड वार खत्‍म नहीं होता है तो शुल्क को दोगुना कर दिया जाएगा| साथ ही 325 अरब डॉलर के अन्य चीनी उत्पादों पर टैरिफ लगाया जा सकता है|

ट्रंप ने यह भी कहा है कि चीन से होने वाले व्‍यापार पर अरबों डॉलर का नुकसान अमेरिका को झेलना पड़ रहा है| इतना ही नहीं द्विपक्षीय व्यापार में यह नुकसान 600 से 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अब ऐसा नहीं होगा|

ट्रेड वार से अमेरिका को नुकसान

अमेरिका के नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च की रिपोर्ट में अमेरिका की कमज़ोर हो चुकी अर्थव्यवस्था को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी कि 2018 में ट्रेड वार की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लगभग 54 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है| जून-नवंबर 2017 की अवधि में भारत से चीन को 637.40 करोड़ डॉलर का निर्यात हुआ था लेकिन अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध छिड़ने के बाद जून-नवंबर 2018 में चीन को होने वाला निर्यात बढ़कर 846.40 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया|

भारतीय बाजारों को नुकसान

अमेरिका और चीन के बीच छिड़ी ट्रेड वार को लेकर ना सिर्फ ग्लोबल मार्केट को नुकसान झेलना पढ़ रहा है बल्कि भारतीय बाजारों में भी इसका असर देखा जा सकता है| भारत की बात करें तो यहाँ प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स के शुरुआती कारोबार में 37 हजार 590 के स्‍तर पर आ गया जबकि निफ्टी भी लगभग इसी समय 60.35 अंकों की कमजोरी के साथ 11,295 के स्‍तर पर कारोबार कर रहा था|

ट्रेड वार के चलते भारत के शेयर बाजारों बुरे दौर से गुज़र रहे है| शुरुआती कारोबार में रिलायंस के शेयर 2 फीसदी से अधिक टूट गए जबकि एनटीपीसी, एचसीएल, पावरग्रिड, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, कोल इंडिया और आईटीसी के शेयर भी लाल निशान पर कारोबार करते देखे गए| वहीं, बढ़त वाले शेयरों की बात करें तो यस बैंक में करीब 3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई| इसी तरह बजाज फाइनेंस, इन्‍फोसिस, टीसीएस, हीरोमोटोकॉर्प, एसबीआईएन और एक्‍सिस बैंक के शेयर भी 1 से 2 फीसदी तक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे|

इससे पहले बुधवार को टाटा कम्युनिकेशंस का घाटा 31 मार्च को समाप्त चौथी तिमाही में बढ़कर 198.8 करोड़ रुपए हो गया| एक साल पहले की इसी अवधि में यह 120.9 करोड़ रुपए था| टाटा कम्युनिकेशंस ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में उसकी परिचालन से आय 4,243.5 करोड़ रुपए रही| यह इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 5 फीसदी अधिक है|

पूरे वित्त वर्ष (2018-19) के लिए उसका घाटा कम होकर 82.37 करोड़ रुपए रहा| इसकी तुलना में 2017-18 में यह 328.6 करोड़ रुपए था| इस बीच, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी का शुद्ध लाभ 31 मार्च 2019 को समाप्त चौथी तिमाही में 22.4 फीसदी गिरकर 746.04 करोड़ रुपये रह गया| वहीं, जेके पेपर लिमिटेड का एकल शुद्ध लाभ 31 मार्च 2019 को समाप्त चौथी तिमाही में 52.48 फीसदी बढ़कर 112.23 करोड़ रुपए हो गया|

इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान के तेल के व्यापार को लेकर प्रतिबंध लगा चूका है जिसका असर दुनिया भर के देशो में देखा गया था| ध्‍यान रखना होगा कि अमेरिका ने भारत से ‘जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज’ (जीएसपी) कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस ले लिया है जिसका खामियाजा भारत को नुकसान झेलना पड़ा है| अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है और अमेरिका इन देशों से एक तय राशि के आयात पर कोई शुल्क नहीं लेता| जीएसपी कार्यक्रम के तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर (लगभग 40 हजार करोड़ रुपए) के निर्यात पर छूट मिलती थी| भारत जीएसपी का सबसे बड़ा लाभार्थी देश था लेकिन अब भारत जीएसपी में शामिल नहीं है|

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America-China Trade war
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ट्रंप ने साफ़ कह दिया है कि चीन से होने वाले व्‍यापार पर अरबों डॉलर का नुकसान अमेरिका को झेलना पड़ रहा है| इतना ही नहीं द्विपक्षीय व्यापार में यह नुकसान 600 से 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा|
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The Policy Times