बैंक NPA: बढ़ते एनपीए से भारतीय बैंकों की हालत खस्ता

आज भारतीय बैंकों का एनपीए 1,30,000 लाख करोड़ तक पहुँच गया है| आज के दौर में खस्ता बैंकिंग प्रणाली एक गंभीर विषय बन गया है|

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Bank NPA: The condition of Indian banks from growing NPAs is crispy

‘बैंक’ भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं| बैंकों की बढ़ रही गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) बड़ा संकट पैदा कर सकती है| चार साल पहले रघुराम राजन रिज़र्व बैंक के गवर्नर थे| देश भर में बैंक की हालत ख़राब थी| याद हो जब अमेरिका सब-प्राइम संकट से जूझ रहा था तब विश्व के बैंकिंग सिस्टम में भी इसका प्रभाव पड़ा था| उस समय भारत के बैंक ना केवल मजबूती से खड़े थे बल्कि, लाभ भी बढ़ रहा था| आज सब-प्राइम संकट भारत में भी प्रवेश कर चूका है| देश भर के बैंक आज वित्तीय संकट से गुज़र रहें है क्यूंकि कुछ कंपनियां अपने ऋणो का भुगतान नहीं कर पा रही है|

आज भारतीय बैंकों का एनपीए 1,30,000 लाख करोड़ तक पहुँच गया है| आज के दौर में खस्ता बैंकिंग प्रणाली एक गंभीर विषय बन गया है| आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे पंजाब नेशनल बैंक के साथ-साथ बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स सभी लोन डिफॉल्टर्स के चलते परेशानी में पड़ सकतें हैं| बैंकिंग सेक्टर में लोन न चुकाने वालों की संख्या इतनी बढ़ चुकी है कि बैंकों के एनपीए 1,30,000 लाखों करोड़ रुपए की सीमा में आ चुके हैं|

आरबीआई ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं जिसमें बैंकों के ‘नॉन परफॉर्मिंग एसेट’ की चिंताजनक तस्वीर दिखती है:

पब्लिक सेक्टर बैंक के एनपीए

  • सभी सरकारी बैंकों के ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट 7,90,649 करोड़ रुपये (30 सितंबर 2017 तक)
  • पब्लिक सेक्टर बैंक (पीएसयू) के ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट 6,89,806 करोड़ रुपये (30 सितंबर 2017 तक)
  • कुल एनपीए में से पीएसयू बैंकों का ग्रॉस एनपीए 87.25 फीसदी रहा है. (30 सितंबर 2017 तक)
  • निजी बैंकों का ग्रॉस एनपीए 1,00,843 करोड़ रुपये है (30 सितंबर 2017 तक)
  • पीएनबी का ग्रॉस एनपीए 57630 करोड़ रुपये (30 सितंबर 2017 तक)

भारत में बढ़ता घोटाला भी एनपीए बढ़ने का एक बड़ा कारण हैं| देश का दूसरा बड़ा सरकारी बैंक ‘पंजाब नेशनल बैंक’, जिसे जनवरी-मार्च के बीच 29,100 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था, यह भारतीय बैंक के इतिहास में रिकॉर्ड है| इसकी बड़ी वजह हीरा और ज्वैलरी कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी का घोटाला था|

अब तक बैंकों में करीब 10 लाख करोड़ रुपए के एनपीए हो चुकें हैं और हर तिमाही में लाख-सवा लाख करोड़ रुपए के नए एनपीए बैंकों के खाते में जुड़ रहें हैं|

बैंकों के मुताबिक, नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी एनपीए बढ़ने का कारण केवल लोन नहीं है| आरबीआई के लोन रीस्ट्रक्चरिंग के नए नियमों ने भी एनपीए बढ़ा दिए हैं| विशेषज्ञों का कहना हैं कि बैंकों की हालत में अभी भी सुधार नहीं हुए हैं|

घाटे और एनपीए के मामलें में देश का सबसे बड़ा बैंक ‘स्टेट बैंक’ भी पीछे नहीं है| इसे भी जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में करीब 8000 करोड़ का घाटा हुआ था| साथ ही 24,200 करोड़ के नए एनपीए खाते में जुड़ गए|

इनसॉल्वेंसी कानून से ज्यादा फायदा नहीं

सरकार ने जिस इनसॉल्वेंसी कानून को बैंकों के लिए संजीवनी बताया था, वो भी रफ्तार पकड़ने की बजाए कोर्ट कचहरी के कानूनी दाव-पेंच  में फंस गया है| इसमें भूषण स्टील को ही एकमात्र सफलता मिली है, लेकिन 2 लाख करोड़ रुपए के डूबे हुए लोन में इनसॉल्वेंसी के जरिए सिर्फ 30 हजार करोड़ रुपए ही हाथ आए हैं|

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मेहुल चोकसी और नीरव मोदी की करतूतों का खामियाजा एक्सपोर्टरों को भुगतना पड़ रहा है और उन्हें मिलने वाले नए लोन में 33 परसेंट कमी आ गई है|

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आज भारतीय बैंकों का एनपीए 1,30,000 लाख करोड़ तक पहुँच गया है| आज के दौर में खस्ता बैंकिंग प्रणाली एक गंभीर विषय बन गया है|
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