सीबीआई बनाम सीबीआई: सीवीसी ने सौंपी जांच की रिपोर्ट, अब शुक्रवार को सुनवाई

सीबीआई में रिश्वतखोरी को लेकर लगे आरोपों से संबंधित मामलों में आज सुप्रीम कोर्ट में दो रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई हैं| जिसमें पहली रिपोर्ट सीबीआई चीफ आलोक वर्मा पर की गई जांच को सीवीसी ने सौंपी है और दूसरी रिपोर्ट सीबीआई के कार्यकारी चीफ एम नागेश्वर राव द्वारा अफसरों के ट्रांसफर और लिए गए फैसलों की है जिसे सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने सौंपी है|

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सीबीआई में रिश्वतखोरी को लेकर लगे आरोपों से संबंधित मामलों में आज सुप्रीम कोर्ट में दो रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई हैं| जिसमें पहली रिपोर्ट सीबीआई चीफ आलोक वर्मा पर की गई जांच को सीवीसी ने सौंपी है और दूसरी रिपोर्ट सीबीआई के कार्यकारी चीफ एम नागेश्वर राव द्वारा अफसरों के ट्रांसफर और लिए गए फैसलों की है जिसे सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने सौंपी है|

हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस दौरान सीवीसी से नाराज दिखा और कहा कि अगर रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पा रहे थे तो कम से कम सूचना तो देनी चाहिए थी|

फिलहाल मामले की सुनवाई 16 नवंबर के लिए तय कर दी गई है| इसके साथ ही अदालत ने कहा फिर साफ कहा है कि आदेश में निहित है कि इस दौरान सीबीआई में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाए और अगर आदेश का उल्लंघन किया गया तो हम देखेंगे|

आपको बता दें कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है| 26 अक्टूबर को पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को दो हफ्ते में आलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच पूरी कर सील कवर में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था| साथ ही सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस एके पटनायक को जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा था|

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए थे कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव कोई भी नीतिगत फैसले नहीं लेंगे| कोर्ट ने 23 अक्तूबर से 26 अक्तूबर तक जांच अफसरों के ट्रांसफर समेत तमाम फैसलों की सील कवर में सूची मांगी थी| साथ ही केंद्र, CVC राकेश अस्थाना समेत सभी को नोटिस जारी किया था|

सूत्रों के मुताबिक इस दौरान जांच में सीवीसी को आलोक वर्मा के खिलाफ पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है कि उन्होंने सना से दो करोड़ रुपये घूस ली थी| ये शिकायत राकेश अस्थाना ने अगस्त में सीवीसी से की थी| वर्मा ने सरकार के छुट्टी भेजे जाने के फैसले को चुनौती देने के साथ ही सीवीसी की सिफारिश, कार्मिक विभाग के आदेश और एम नागेश्वर राव को अतंरिम डायरेक्टर बनाने के फैसलों को रद्द करने की मांग की है|

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आपको बता दे की (सीवीसी) ने सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा पर लगाए आरोपों को नकार दिया है। केवी चौधरी की अगुआई वाली सीवीसी की 3 सदस्यीय कमेटी ने अस्थाना के सभी आरोपों को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी।

रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई प्रमुख वर्मा और जांच एजेंसी में नंबर दो राकेश अस्थाना को 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया गया था। अस्थाना ने वर्मा पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे। मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से रिश्वत स्वीकार करने के अस्थाना ने वर्मा पर आरोप लगाया है। अस्थाना भी वर्मा द्वारा भ्रष्ट प्रथाओं में शामिल होने का आरोप है।

वर्मा और अस्थाना के बीच विवाद पिछले महीने बढ़ गया, जिससे अस्थाना और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें उप पुलिस अधीक्षक देवेंद्र कुमार भी शामिल थे, जो कथित रिश्वत मामले में सीबीआई की हिरासत में हैं।

छुट्टी पर भेजे जाने के बाद वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जज एके पटनायक को सीवीसी जांच के लिए सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है। इस मामले की सुनवाई दो जजों की बेंच करेगी |

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सीबीआई में रिश्वतखोरी को लेकर लगे आरोपों से संबंधित मामलों में आज सुप्रीम कोर्ट में दो रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई हैं| जिसमें पहली रिपोर्ट सीबीआई चीफ आलोक वर्मा पर की गई जांच को सीवीसी ने सौंपी है और दूसरी रिपोर्ट सीबीआई के कार्यकारी चीफ एम नागेश्वर राव द्वारा अफसरों के ट्रांसफर और लिए गए फैसलों की है जिसे सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने सौंपी है|
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