केंद्र सरकार पर एयर इंडिया के 1 हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा बकाया

कैग रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2016 तक सरकार पर एयर इंडिया का 513.27 करोड़ रुपए बकाया था| इससे पहले अक्टूबर माह में एक आरटीआई के जवाब में ज्ञात हुआ था कि एयर इंडिया का सरकार पर कुल 1146.68 करोड़ रुपया बकाया है जो कि अतिविशिष्ट लोगों (वीवीआईपी) के लिए चार्टर उड़ानों का था|

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लंबे समय से आर्थिक संकटों से जूझ रही सरकारी एयरलाइंस ‘एयर इंडिया’ का सरकार पर कुल 1,000.62 करोड़ रुपया बकाया पाया गया है| बीते गुरुवार को केंद्रीय नगर विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने सदन में उपरोक्त जानकारी दी| लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सिन्हा ने साफ़ तौर पर कहा कि यह राशि विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय पर बकाया है| उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि बकाया राशि के बारे में एयर इंडिया एवं नगर विमानन मंत्रालय द्वारा भारत सरकार को समय-समय पर नियमित रूप से याद दिलाया जाता रहा है इसके बावजूद भी राशि बकाया है| आमतौर पर इस तरह के बकाये का भुगतान समय पर हो जाता है|

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि वीवीआईपी उड़ानों के लिए सरकार द्वारा बकाया चुकाया नहीं गया है| आश्चर्यजनक यह है कि सिन्हा द्वारा बताई गई राशि दो साल पहले के बकाये के मुक़ाबले दोगुनी है| मार्च 2017 में पेश की गई कैग (CAG) की एक रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2016 तक सरकार पर एयर इंडिया का 513.27 करोड़ रुपए बकाया था| इससे पहले अक्टूबर माह में एक आरटीआई के जवाब में ज्ञात हुआ था कि एयर इंडिया का सरकार पर कुल 1146.68 करोड़ रुपया बकाया है जो कि अतिविशिष्ट  लोगों (वीवीआईपी) के लिए चार्टर उड़ानों का था|

सेवानिवृत्त कमांडर लोकेश बत्रा ने आरटीआई के द्वारा जानकारी प्राप्त की और जाना कि लगभग 543.18 करोड़ रुपए कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय पर वकाया था| आरटीआई आवेदन पर एयर इंडिया की तरफ से 26 सितंबर को दिए जवाब में बताया गया था कि वीवीआईपी उड़ानों संबंधी बकाया 1146.68 करोड़ रुपए है जिसमें कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय पर 543.18 करोड़ रुपये, विदेश मंत्रालय पर 392.33 करोड़ रुपए और रक्षा मंत्रालय पर 211.17 करोड़ रुपए का बकाया है|

एयर इंडिया ने बताया था कि उसका सबसे पुराना बकाया बिल करीब 10 साल पुराना है जो राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति की यात्राओं और बचाव अभियान की उड़ानों से संबंधित है| आपको बता दें कि 31 जनवरी 2018 तक कंपनी का कुल बकाया 325 करोड़ रुपए था जबकि यह जानकारी मार्च 2018 को मांगी गई थी| गौर करने की बात यह है कि ताज़ा जानकारी के अनुसार सरकारी विमान कंपनी करीब 50 हजार करोड़ रुपए के कर्ज तले दबी है| सरकार इसे बेचने के कई असफल प्रयास भी कर चुकी है| जून के शुरुआती हफ़्ते में आई ख़बर के अनुसार सरकार को एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के लिए कोई बोली नहीं मिली थी| सरकार ने राष्ट्रीय विमान कंपनी में 76% इक्विटी शेयर पूंजी की बिक्री का प्रस्ताव रखा था| आरंभिक सूचना ज्ञापन के अनुसार बताया गया था कि इसके अलावा एयर इंडिया के प्रबंधन का नियंत्रण भी निजी कंपनी को दिया जाएगा| उस समय यह भी बताया गया था कि मार्च, 2017 के अंत तक एयरलाइन पर कुल 48,000 करोड़ रुपए का क़र्ज़ था| बोली न मिलने के बाद नगर विमानन मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया था कि विनिवेश के लिए शुरुआती बोलियां नहीं मिलने के बाद हिस्सेदारी बिक्री की णनीति पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है|

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 Air India owes more than Rs.1000 crores
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Air India owes more than Rs.1000 crores
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कैग रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2016 तक सरकार पर एयर इंडिया का 513.27 करोड़ रुपए बकाया था| इससे पहले अक्टूबर माह में एक आरटीआई के जवाब में ज्ञात हुआ था कि एयर इंडिया का सरकार पर कुल 1146.68 करोड़ रुपया बकाया है जो कि अतिविशिष्ट लोगों (वीवीआईपी) के लिए चार्टर उड़ानों का था|
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The Policy Times
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