15 जुलाई को लॉन्च होगा चंद्रयान-2, चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश होगा: इसरो

अपनी पृथ्वी के चंद्रमा की ओर भारत का दूसरा मिशन 'चंद्रयान 2' श्रीहरिकोटा से 15 जुलाई को लगभग आधी रात को रवाना होगा।

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) ने जानकारी दी है कि वह चंद्रयान 2 को 15 जुलाई को लॉन्च करेगा। इससे पहले इसरो ने चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के लिए नई तिथि निर्धारित की थी। चंद्रयान-2 में भेजा जा रहा रोवर छह सितंबर को चंद्रयान की सतह पर उतरेगा। आपको बता दें कि अब तक इसका प्रक्षेपण चार बार टल चुका है। इसे श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो ने बताया था कि चंद्रयान-2 के मुख्य तीन हिस्से हैं जिनमें आर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं। आर्बिटर और लैंडर दोनों जीएसएलवी से जुड़े रहेंगे। जबकि रोवर लैंडर के भीतर ही फिट किया गया है।

लॉन्च होने के बाद जब आर्बिटर चांद की कक्षा में पहुंचेगा तो लैंडर उससे अलग होकर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पूर्व निर्धारित स्थान पर उतरेगा। इसके बाद रोवर इसमें से निकल कर चांद की सतह पर जाकर नमूने एकत्र करेगा और उसका विश्लेषण कर आंकड़े इसरो को भेजेगा। बता दें कि पूर्व में चार बार इसका प्रक्षेपण टल चुका है। पिछली तिथि 25-30 अप्रैल के बीच रखी गई थी।

चंद्रयान 2 मिशन की क्या है खासियत

चंद्रयान 2 15 जुलाई, 2019 को लगभग आधी रात को प्रक्षेपित किया जाएगा। चंद्रयान 2 तैयार है, और इसे ‘बाहुबली’ अथवा जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (जीएसएलवी एम के III) के ज़रिये लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान 2 में एक ऑरबिटर, ‘विक्रम’ नामक एक लैंडर तथा ‘प्रज्ञान’ नामक एक रोवर शामिल हैं। चंद्रयान 2 का वज़न 3.8 टन है, जो आठ वयस्क हाथियों के वज़न के लगभग बराबर है। चंद्रयान 2 चंद्रमा के ऐसे हिस्से पर पहुंचेगा, जहां आज तक किसी अभियान में नहीं जाया गया। यह भविष्य के मिशनों के लिए सॉफ्ट लैंडिंग का उदाहरण बनेगा। भारत चंद्रमा के धुर दक्षिणी हिस्से पर पहुंचने जा रहा है, जहां पहुंचने की कोशिश आज तक कभी किसी देश ने नहीं की। चंद्रयान 2 कुल 13 भारतीय वैज्ञानिक उपकरणों को ले जाएगा।

लेज़र रेंजिंग के लिए नासा के उपकरण को निःशुल्क ले जाया जाएगा। चंद्रयान 2 पूरी तरह स्वदेशी अभियान है। भुगतान करने के बाद भारत नासा के डीप स्पेस नेटवर्क का इस्तेमाल करेगा। चंद्रयान 2 काफी उत्साहवर्द्धक मिशन है। चंद्रयान 2  इसरो का अब तक का सबसे जटिल अभियान है। लैंडर के अलग होने तथा चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के बीच वाले 15 मिनट सबसे ज़्यादा घबराहट रहेगी। चंद्रयान 2 को कामयाब बनाने के लिए  इसरो कड़ी मेहनत कर रहा है।  इसरो में पुरुष और महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। चंद्रयान 2 में मज़बूती को सुनिश्चित करने और इसकी कामयाबी के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए देरी की गई।

6 या 7 सितंबर को चांद की सतह पर लैंडिंग की उम्मीद

चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया गया था, लेकिन यह चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरा था। चंद्रयान-2 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। इसका उद्देश्य चांद की सतह पर पानी और खनिज का डाटा एकत्र करना है। सिवान ने कहा कि अभी तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर किसी ने अंतरिक्ष यान उतारने की कोशिश नहीं की है। यह चंद्रमा की विषुवत रेखा के पास है। 6 या 7 सितंबर को अंतरिक्ष यान के चांद की सतह पर लैंडिंग की उम्मीद है। इस मिशन में इसरो ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) भेजेगी। यह चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं।

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Chandrayaan-2 launches on 15th July, 60 days journey, last 15 minutes will stop breathing
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अपनी पृथ्वी के चंद्रमा की ओर भारत का दूसरा मिशन 'चंद्रयान 2' श्रीहरिकोटा से 15 जुलाई को लगभग आधी रात को रवाना होगा।
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The Policy Times