दुनिया के सबसे बड़े हेल्थ स्कीम के बावजूद 76% भारतीयों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं

बीते शुक्रवार को केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने पेश किए गए अंतरिम बजट 2019-20 में आयकर में रियायत की घोषणा से हेल्थ सेक्टर को काफी उम्मीदें थीं| हालांकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई पेशेवर इससे संतुष्ट दिखे और इससे स्वास्थ्य विभाग में तेजी आने की उम्मीद जताई गई|

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Despite the world's largest healthcare scheme 76% of Indians do not have health insurance
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बीते शुक्रवार को केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने पेश किए गए अंतरिम बजट 2019-20 में आयकर में रियायत की घोषणा से हेल्थ सेक्टर को काफी उम्मीदें थीं| हालांकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई पेशेवर इससे संतुष्ट दिखे और इससे स्वास्थ्य विभाग में तेजी आने की उम्मीद जताई गई| पियूष गोयल ने अपनी बजट स्पीच में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना- ‘आयुष्मान भारत’ का हवाला देते हुआ कहा “यह योजना सभी को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण को पूरा करने में कारगर साबित हो रही है| साथ ही यह भी कहा गया कि इस योजना के तहत पहले से 10 लाख गरीब एवं वंचित लोग नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित हो चुके हैं. जरूरी दवाओं, कार्डियक स्टेंट एवं नी इम्प्लांट की कीमतों में कमी के चलते बड़ी संख्या में गरीब एवं मध्यमवर्गीय लोगों को फायदा हुआ है| उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं तथा स्वस्थ भारत के विकास को जारी रखने के लिए जरूरी द्रष्टिकोण है, जो अगले पांच सालों में हमें पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने में योगदान दे सकता है| मैं सभी के लिए व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की दिशा में सरकार के सकारात्मक द्रष्टिकोण का स्वागत करता हूं|”

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जैसा कि वित्तमंत्री पीयूष गोयल द्वारा बजट स्पीच में कहा गया स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है आइये देखते हैं इस रीढ़ का हाल क्या है.  भारत हेल्थकेयर रेवेन्यू और रोजगार दोनों के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा सेक्टर बन गया है। एक अनुमान के मुताबिक भारत का हेल्थकेयर इंडस्ट्री 2020 तक 280 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी|

शायद जिस रीढ़ की बात की गई है भारत की वही रीढ़ ही खराब है जिसका बुनियादी ढांचा चरमरा गया है| जैसा कि हम जानते हैं कि भारत में प्रत्येक 2,046 व्यक्तियों के लिए सिर्फ एक सरकारी अस्पताल का बिस्तर है, प्रत्येक 10,189 लोगों के लिए एक सरकारी डॉक्टर, और एक राज्य संचालित अस्पताल प्रत्येक 90,343 नागरिकों के लिए। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) के अनुसार, भारत का प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च दुनिया के सबसे निचले स्तरों में से एक है।

बीमा में सरकार का योगदान लगभग 32% है, जैसा कि ब्रिटेन में 83.5% का विरोध किया। आपको बता दें कि 76% भारतीयों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं है|

नए आंकड़ों के अनुसार, भारत स्वास्थ्य देखभाल पर जीडीपी का केवल 1.2 % खर्च करता है, जबकि चीन 5.6 गुना अधिक खर्च करता है और अमेरिका 125% अधिक। भारतीयों द्वारा किए गए स्वास्थ्य व्यय का लगभग 62% व्यक्तिगत बचत का उपयोग करते हैं, जिसे “आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च” कहा जाता है, इसकी तुलना अमेरिका में 13.4%, ब्रिटेन में 10% और चीन में 54% है। ज्यादातर भारतीय स्वास्थ्य-सेवााएँ और उनके पेशेवर शहरी क्षेत्रों के आसपास ही केंद्रित हैं, लगभग 75% डिस्पेंसरी, 60% अस्पताल और 80% डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं |

वर्तमान में भी, भारत अपने जीडीपी का केवल 1.2% स्वास्थ्य सेवा पर खर्च करता है। यह निराशाजनक आंकड़ा भारत को अन्य निम्न आय वाले देशों जैसे मालदीव (9.4%), भूटान (2.5%), श्रीलंका (1.6%) से भी नीचे रखता है।

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सरकार का प्रति व्यक्ति स्वस्थ्य खर्च 1,112 रुपये है जो प्रति दिन 3 रुपये आता है। अगर हम पिछले दस साल के आंकड़ों की बात करें तो भारत कुल जीडीपी का लगभग 1% से 1.8% तक ही खर्च करता है| चाहे NDA सरकार हो या UPA दोनों ने ही देश को अच्छी स्वस्थ्य सेवाएं देने के नाम पर अच्छे से ठगा है|

मौजूदा सरकार के अंतरिम बजट में स्वास्थ्य को कुल बजट का 2.2% जो लगभग 63,538 करोड़ रुपये है| यह उल्लेखनीय है कि आयुष्मान भारत जैसी बीमा योजनाओं के साथ, सरकार निजी बीमाकर्ताओं के मुनाफे को सब्सिडी देने के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग करने के बजाय गुणवत्ता, सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए आगे बढ़ेगी| देखने लायक ये होगा कि आने वाली सराकरें स्वस्थ्य जैसे अहम् मुद्दे, जो किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी माना जाता है को किस तरीके से चलाएंगी| क्या आयुष्मान भारत जैसी योजना जो की एक स्कैम मानी जाए रही फिर से लोगों को स्वास्थ्य के नाम पर बेवक़ूफ़ बनाएगी|

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बीते शुक्रवार को केंद्रीय वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने पेश किए गए अंतरिम बजट 2019-20 में आयकर में रियायत की घोषणा से हेल्थ सेक्टर को काफी उम्मीदें थीं| हालांकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई पेशेवर इससे संतुष्ट दिखे और इससे स्वास्थ्य विभाग में तेजी आने की उम्मीद जताई गई|
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THE POLICY TIMES