नफरत का माहौल बनाने में जुटी झूठी ख़बरें

अगर व्हाट्सएप में वायरल होती ख़बरों को सही माना जाए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में कुछ चौंकाने वाले बयान दिए थे| एबीपी न्यूज़ के ब्रेकिंग न्यूज़ में राहुल गांधी का यह विवादित बयान सुर्ख़ियों में छाया रहा| मीडिया ने राहुल गाँधी का बयान कुछ इस तरह पेश किया-

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False news about creating an atmosphere of hatred
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अगर व्हाट्सएप में वायरल होती ख़बरों को सही माना जाए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में कुछ चौंकाने वाले बयान दिए थे| एबीपी न्यूज़ के ब्रेकिंग न्यूज़ में राहुल गांधी का यह विवादित बयान सुर्ख़ियों में छाया रहा| मीडिया ने राहुल गाँधी का बयान कुछ इस तरह पेश किया-

मेरे पूर्वज मुसलमान थे| मैं एक मुसलमान हूँ|

कांग्रेस मुसलमानों के लिए एक पार्टी है और आगे भी रहेगी|

कश्मीर पाकिस्तान को दिया जाना चाहिए|

जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था|

आज के मुख्य धारा के ज्यादातर टीवी चैनल और अखबारों में राजनितिक पार्टियों के समर्थक के रूप में ख़बरों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाता है| उदहारण के लिए एबीपी न्यूज़ ने एक खबर को अपने चैनल में कांग्रेस समर्थक के रूप पेश किया था| वहीँ, ब्रेकिंग न्यूज़ की सुर्ख़ियों में भाजपा के खिलाफ कुछ इस तरह सुर्खियाँ बनाई- ‘मोदी ने पर्दाफाश किया: मोदी के स्विस बैंक खाते में उजागर किए गए 70 हजार करोड़ रुपए|’ भाजपा में हड़कंप: एक लाख करोड़ रुपये के घोटाले में बीजेपी ने पकड़ा, CBI ने किया खुलासा|’

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इन गलत ख़बरों को अलग वैरिएंट में पेश करते हुए दो हज़ार से अधिक राजनीति केन्द्रों और सार्वजनिक व्हाट्सएप समूहों में शेयर किया गया था जिन्हें 2018 के विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र इस्तेमाल किया गया था| इसके साथ ही टीवी न्यूज़ चैनल ने दूसरा कांग्रेस-विरोधी भ्रामक सामग्री पेश किया था जिसमे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की धार्मिकता के बारे में भ्रम पैदा करने (उन्हें गैर-हिंदू के रूप में दिखाना) कोशिश की गई थी| साथ ही कांग्रेस को हिंदू-विरोधी पार्टी के रूप में चित्रित किया गया था|

वहीँ, भाजपा को भी टीवी चैनलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को भ्रष्ट दिखाने के लिए लक्षित किया गया| पत्रकारों की अपनी निजी राय हो सकती है लेकिन रिपोर्टिंग करते वक्त उन्हें इससे दूर रहना होता है- क्योंकि रिपोर्टिंग उनकी देशभक्ति का आईना नहीं है, बल्कि अपने पाठकों के साथ पेशेवर करार का हिस्सा है|

समाचार चैनलों में आस्था को भुनाते कार्यक्रमों को देखें तो लगता है कि टीवी समाचार और विज्ञापन प्रसारण की सरकारी और कंपनी गाइडलाइन्स कहीं धूल फांक रही हैं| टीवी चैनलों की अपनी गाइडलाइनें कहां हैं? अगर नहीं हैं तो क्यों नहीं हैं और क्या इस बारे में उन्हे लाइसेंस देते हुए सरकार जवाबतलब करती है? इस तरह के बहुत से सवाल हैं|

हर रात, राष्ट्र, देशप्रेम और पाकिस्तान पर गला फाड़कर की जाने वाली बहसें और गढ़े गए ‘देशद्रोहियों’ के खिलाफ नफरत को उकसाने का काम टीआरपी को नजर में रखकर किया जाता है| एक कठिन माहौल में जहां चैनलों के लिए पैसा कमाना मुश्किल है हर हथकंडे का जायज ठहराया जा सकता है|

दर्शक जो चाहते हैं, चैनल उन्हें वाही दिखाता है ताकि उनके दर्शक उनसे जुड़ रहें- कारोबारी लिहाज से यह तार्किक था लेकिन अब यह चिंता का विषय बन गया है| ‘देश के काल्पनिक दुश्मनों’ के खिलाफ आक्रामक अभियान, इस सरकार और संघ परिवार के एजेंडे के साथ बहुत नजदीक से जुड़ा हुआ है| ऐसा लगता है कि इस देश के टेलीविजन चैनल- उनमें से कुछ तो जरूर- सरकार के पक्ष में एक खास माहौल और नैरेटिव गढ़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं| वे सिर्फ नरेंद्र मोदी सरकार और उनके शासन के प्रवक्ता या समर्थक भर नहीं हैं- वे मीडिया की वो ताकतवर शाखा हैं, जिनका काम सिर्फ विचारों का प्रसार करना नहीं, बल्कि अन्य दूसरी आवाजों को दबाना भी है|

राष्ट्रवादी उन्माद का निर्माण सिर्फ एक सनकी कारोबारी हथकंडा न होकर, एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें न सिर्फ टेलीविजन चैनल, बल्कि सोशल मीडिया, ट्रोल्स की फौज और फर्जी समाचारों की फैक्ट्री शामिल हैं| इसी बीच देशभक्तिपूर्ण गानों के वीडियो साझा किए गए.

व्हाट्सऐप सैन्य साहस की कहानियों और नारों से गूंज उठा| राजस्थान में एक राजनीतिक रैली में नरेंद्र मोदी ने यह ऐलान किया, ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं झुकने दूंगा|’ फिल्म उद्योग का एक तबका भी इसमें शामिल होने के लिए तैयार है| यहां चुनाव से ठीक पहले, देशभक्ति वाली फिल्मों की संख्या में आए उछाल की ओर ध्यान दिया जा सकता है|

पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से सेना- यहां तक कि खुद मोदी- का गौरवगान करनेवाली फिल्में आई हैं उसे महज संयोग नहीं कहा जा सकता है. -‘हाऊ इज द जोश’ जैसे मुहावरे बड़ी सफाई से दैनिक बोलचाल की भाषा में शामिल हो गए हैं और इसका इस्तेमाल मंत्रियों द्वारा किया गया है जिन्होंने खुलकर उड़ी और मणिकर्णिका जैसी फिल्मों की तारीफ की है|

भारतीय मीडिया में अब पत्रकारों का पेशेवर रवैया काफी अरसा पहले बंद कर दिया गया है और राष्ट्रीय प्रयासों का हिस्सा बनने में वह गर्व का अनुभव करता है| वह अपना राष्ट्रवाद हथेली पर लेकर चलना चाहते हैं| भाजपा समर्थक व्हाट्सएप ग्रुपों में दस सबसे साझा भ्रामक छवियों में से सात मीडिया क्लिपिंग थी| सबसे साझा छवि एक अंग्रेजी टीवी समाचार चैनल टाइम्स नाउ के प्राइमटाइम खंड की एक कड़ी थी, जिसमें दावा किया गया था कि तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी का घोषणापत्र मुस्लिम-केंद्रित था। घोषणा पत्र में सात “मुस्लिम केवल” योजनाओं को शामिल किया गया था, छवि का दावा किया गया था, जिसमें मुस्लिम छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और मस्जिदों को मुफ्त बिजली शामिल थी।

सिवाय इसके कि जानकारी भ्रामक थी। ऑल्ट न्यूज़, एक वाम-झुकाव वाले तथ्य-जाँच समाचार वेबसाइट, ने बाद में डिबक किया कि कैसे समाचार चैनल ने झूठी कहानी बनाने के लिए घोषणापत्र के कुछ हिस्सों को चुनकर कहानी को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।

वे सत्ताधारी दल के मकसदों और एजेंडा के साथ कदमताल मिलाने में खुश है| ऐसे में उनसे बदलाव की उम्मीद करना, भोलापन होगा लेकिन इस बार उन्होंने सारी हदें पार कर दी हैं| इस बार दांव बहुत ऊंचा है और चीजों के काफी आगे बढ़ जाने और हाथ से निकल जाने का खतरा वास्तविक है|

व्हाट्सऐप सामग्री के लिए एक ब्लैक बॉक्स है: व्हाट्सऐप क्षेत्र में व्यापक रूप से गलत सूचनाओं को ट्रैक करना लगभग असंभव है क्योंकि सामग्री एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड है और कोई भी- और बड़े पैमाने पर निजी वार्तालापों का उपयोग नहीं कर सकता है| WhatsApp ने कहा है कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कुछ लोग गलत खबरें फैलाने के लिए कर रहे हैं| सिर्फ फेक न्यूज ही नहीं बल्कि कुछ ऐसे लिंक्स भी यूजर्स को भेजे जाते हैं जिनके जरिए दूसरों की निजी जानकारी चुराई जा सकती है| व्हाट्सऐप ने कहा है कि इस तरह से बल्क मैसेज या ऑटोमैटिक मैसेज करना कंपनी के नियम व शर्तों के खिलाफ है| कंपनी ऐसे मामलों को रोकना चाहती है| व्हाट्सऐप ने दावा किया है कि मशीन लर्निंग सिस्टम के जरिए हर महीने 20 लाख से ज्यादा अकाउंट्स को बैन किया गया है|

‘फेक समाचार’ जैसा कि आमतौर पर एक खबर के विभिन्न शेड्स के तौर पर समझा जा सकता है| इस घटना के लिए एक संभावित व्याख्या यह है कि व्हाट्सएप मुख्य धारा मीडिया का लाभ उठाते हुए व्हाट्सएप सामग्री की घटती विश्वसनीयता की भरपाई करता है| डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन द्वारा 14 भारतीय राज्यों में पिछले साल किए गए एक सीमित लघु-स्तरीय सर्वेक्षण में पता चला है कि ग्रामीण भारतीय व्हाट्सएप पर विश्वासपूर्वक संदेश नहीं देते बल्कि प्राप्त होने वाले संदेश सामग्री में विश्वास की कमी का संकेत देता हैं|

हमने देखा है कि इससे पहले 2018 के कर्नाटक चुनावों से पहले, बीबीसी को दिए गए फर्जी ओपिनियन पोल भाजपा और कांग्रेस दोनों समूहों में प्रसारित किए गए थे जिनमें से प्रत्येक ने अपनी तरफ से जीत दिखाने के लिए संदिग्ध सर्वेक्षण संख्याओं को प्रचारित किया था|

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण झूटी और फेक ख़बरें हमारे सूचना का प्रमुख विषय था| इसका उद्देश्य यह स्थापित करना है कि कांग्रेस पार्टी केवल मुसलमानों की परवाह करती है| तेलंगाना घोषणा पत्र एक ऐसा उदाहरण था फिर बड़ी बात यह है कि संदेशों के साथ, जो लोगों को बिंदुओं को जोड़ने और पुनर्विचार करने के लिए कहते हैं कि क्या राहुल गांधी वास्तव में अपने पूर्वजों की धार्मिकता पर सवाल उठाकर हिंदू हैं|

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फेक न्यूज़ की ख़बरों में भारत के पहले प्रधानमंत्री और गांधी के परदादा जवाहरलाल नेहरू को भी बख्शा नहीं गया| एक अखबार की कतरन में नेहरू को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा था, ‘शिक्षा से मैं एक अंग्रेज हूं, संस्कृति के आधार पर एक मुस्लिम और एक हिंदू केवल जन्म के दुर्घटना से| नेहरू ने ऐसा कभी नहीं कहा लेकिन गलत ख़बरों की जाल में नेहरु जी के खिलाफ गलत प्रचार किया गया| इसी लिस्ट में अगला लक्ष्य पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के दादा के पति फिरोज गांधी हैं| ये संदेश लंबे समय से चली आ रही झूठी अफवाह को दोहराते हैं कि फिरोज गांधी एक मुस्लिम थे, इस तथ्य के विपरीत कि वे एक पारसी परिवार से थे|

फिर, राजीव और सोनिया गांधी, उनके माता-पिता की शादी के बारे में सवाल उठाए जाते हैं: “माँ और पिता ने अपनी शादी को दिल्ली के चर्च में एक ईसाई जोड़े के रूप में पंजीकृत करवाया| बेटा खुद को जनेऊ धारी हिंदू बताता है| क्या वाकई इससे बड़ा कोई मजाक हो सकता है? एक और कहता है: “एक पारसी पुरुष और ईसाई महिला का एक बेटा हिंदू कैसे हो सकता है? क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है? “

ये अफवाहें लंबे समय तक राजनीतिक प्रवचन का हिस्सा रही हैं और लगातार भारतीय नागरिकों को परोसा जाता रहा| इसे राजनीतिक संदर्भ में डालें और संकेत स्पष्ट है: कांग्रेस को एक हिंदू विरोधी पार्टी के रूप में चित्रित करने की रणनीति, एक विषय भाजपा ने हिंदू मतदाताओं को जुटाने और उनके पक्ष में वोट को मजबूत करने के लिए उत्थान किया है| वास्तव में, हमारे द्वारा निगरानी किए गए समूहों में साझा की गई विभिन्न छवियां कांग्रेस को हराने के लिए हिंदुओं के लिए एक स्पष्ट आह्वान करती हैं|

भाजपा विरोधी फर्जी खबरें नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को भ्रष्ट दिखाने का प्रयास करती हैं| क्लिपिंग ने ‘समाचार एक्सप्रेस’ नामक एक संगठन के साथ टैग किया – यह स्पष्ट नहीं है कि यह संगठन कौन चलाता है और अगर उस नाम के साथ कोई वास्तविक संगठन है – तो यह कहते हुए एक शीर्षक चलाया: ‘राफेल घोटाला: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेंकोइस हॉलैंड ने कहा- पीएम नरेंद्र मोदी एक चोर है जबकि हॉलैंड ने यह कभी नहीं कहा|

इस तरह मीडिया द्वारा नफरत को बढ़ावा देने का उनका रिकॉर्ड बेहद शर्मनाक है| लंबे समय में देश के धर्मनिरपेक्ष तानेबाने पर इसका गंभीर असर पड़ेगा| जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा तब नफरत का माहौल बनाने में मीडिया की भूमिका का जिक्र खासतौर पर होगा|

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अगर व्हाट्सएप में वायरल होती ख़बरों को सही माना जाए तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में कुछ चौंकाने वाले बयान दिए थे| एबीपी न्यूज़ के ब्रेकिंग न्यूज़ में राहुल गांधी का यह विवादित बयान सुर्ख़ियों में छाया रहा| मीडिया ने राहुल गाँधी का बयान कुछ इस तरह पेश किया-
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The Policy Times