पहले फिल्ममेकर्स, फिर लेखक, और अब वैज्ञानिकों ने बीजेपी के खिलाफ खोला मोर्चा

पूरे देश में चुनावी माहौल के चलते चुनावी सरगर्मियां दिन-व-दिन ज़ोर पकड़ती जा रही हैं| देश में पहले चरण का चुनाव 11 अप्रैल से शुरू होना है| आने वाले चुनाव में लगभग 90 करोड़ मतदाताओं को अपने मत का इस्तेमाल करना है| देश में राइट टू वोट के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए तरह के जागरूकता अभियान चालाये जाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाता चुनावक में अपने मत का प्रयोग करे| ये वही मत है जो किसी को भी हरा या जीता सकता है तभी कहा भी जाता है कि अपने मत का प्रयोग बड़े सोच समझ कर कीजिये|

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First filmmakers, then writers, and now the scientists open against the BJP Front

पूरे देश में चुनावी माहौल के चलते चुनावी सरगर्मियां दिन-व-दिन ज़ोर पकड़ती जा रही हैं| देश में पहले चरण का चुनाव 11 अप्रैल से शुरू होना है| आने वाले चुनाव में लगभग 90 करोड़ मतदाताओं को अपने मत का इस्तेमाल करना है| देश में राइट टू वोट के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए तरह के जागरूकता अभियान चालाये जाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाता चुनावक में अपने मत का प्रयोग करे| ये वही मत है जो किसी को भी हरा या जीता सकता है तभी कहा भी जाता है कि अपने मत का प्रयोग बड़े सोच समझ कर कीजिये|

इसी बात ध्यान में रखते हुए अब से लगभग एक सफ्ताह पहले देश के लगभग 100 से अधिक फिल्मकारों ने देश में फ़ैल रही नफरत की राजनीति के खिलाफ मतदान करने की अपील की थी, या यूं कह लीजिये जनता को बीजेपी के खिलाफ वोट आग्रह किया था| इन फिल्म निर्माताओं ने लोगों से अपील की है कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट न दें| उनका मानना है कि भाजपा के शासन में धुव्रीकरण और नफरत की राजनीति में बढ़ोतरी हुई है|

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उनका आरोप है कि मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) और गोरक्षा के नाम पर देश को सांप्रदायिकता के आधार पर बांटा जा रहा है| बयान में कहा गया है कि भाजपा देशभक्ति को तुरुप के इक्के की तरह इस्तेमाल कर रही है| कोई भी व्यक्ति या संस्था सरकार के प्रति थोड़ी सी भी असहमति जताता है तो उसे राष्ट्र विरोधी या देशद्रोही करार दिया जाता है| उन्होंने ये भी आरोप लगाया है कि भाजपा देशभक्ति को अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है| साथ ही सशस्त्र बलों को अपनी रणनीति में शामिल करके राष्ट्र को युद्ध में उलझाने की कोशिश कर रहा है|

इन निर्माताओं में आनंद पटवर्धन, एसएस शशिधरन, सुदेवन, दीपा धनराज, गुरविंदर सिंह, पुष्पेंद्र सिंह, कबीर सिंह चौधरी, अंजलि मोंटेइरो, प्रवीण मोरछले देवाशीष मखीजा और उत्सव के निर्देशक और संपादक बीना पॉप जैसे नामी फिल्मकार भी शामिल थे| यह बयान शुक्रवार को आर्टिस्ट यूनाइट इंडिया डॉट कॉम वेबसाइट पर डाला गया|

इसके बाद देश के लगभग 200 से अधिक लेखकों ने भी देश में नफरत की राजनीति के खिलाफ मतदान करने की अपील की थी| भारतीय लेखकों के संगठन इंडियन राइटर्स फोरम की ओर से जारी अपील में लेखकों ने लोगों से विविधता और समान भारत के लिए वोट करने की अपील की है| इन लेखकों में गिरिश कर्नाड, अरुंधती रॉय, अमिताव घोष, बाम, नयनतारा सहगल, टीएम कृष्णा, विवेक शानभाग, जीत थायिल, के सच्चिदानंदन और रोमिला थापर शामिल थी|

उन्होंने आरोप लगाया, ‘लेखक, कलाकार, फिल्मकार, संगीतकार और अन्य सांस्कृतिक कलाकारों को धमकाया जाता है, उन पर हमला किया जाता है और उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है| जो भी सत्ता से सवाल करता है, या तो उसे प्रताड़ित किया जाता है या झूठे और मनगढ़त आरोपों में गिरफ्तार कर लिया जाता है|

उन्होंने कहा, ‘लोगों को बांटने की राजनीति के खिलाफ वोट करें, असमानता के खिलाफ वोट करें, हिंसा, उत्पीड़न और सेंसरशिप के खिलाफ वोट करें| यही एक रास्ता है, जिसके तहत हम उस भारत के लिए वोट कर सकते हैं, जो हमारे संविधान द्वारा किए गए वादे को पूरा कर सकता है|

अब देश के 150 से अधिक वैज्ञानिकों ने मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) से जुड़े लोगों को वोट न देने की अपील की है|  इसके साथ ही असमानता, भेदभाव और डर के माहौल के खिलाफ वोट देने का निवेदन किया है|

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इन बैज्ञानिकों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), इंडियन स्टैटिकल इंस्टीट्यूट (आईएसआई), अशोका यूनिवर्सिटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के वैज्ञानिक शामिल हैं| उनके द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘हमें ऐसे लोगों को खारिज करना चाहिए जो लोगों को मारने के लिए उकसाते हैं या उन पर हमला करते हैं. जो लोग धर्म, जाति, लिंग, भाषा या क्षेत्र विशेष के कारण भेदभाव करते हैं|’

साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि मौजूदा हालात में वैज्ञानिक, कार्यकर्ता और तर्कवादी लोग घबराए हुए हैं| असहमति रखने वाले लोगों को प्रताड़ित करना, जेल में बंद करना, हत्या कर देना जैसी घटनाएं हो रही हैं|

मतदाताओं से अपील किया है कि ऐसे माहौल को खत्म करने के लिए सोच-समझकर अपने मताधिकार इस्तेमाल करें. साथ ही मतदाताओं से वैज्ञानिक स्वभाव के प्रति अपने संवैधानिक कर्तव्य को याद रखने का भी जिक्र किया गया है|

अब आने वाले दिनों में इन 90 करोड़ मतदाताओं को देश का भबिष्य तय करना है|

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The Policy Times