दिल्ली को पीछे छोड़ हरियाणा बना ‘रेप कैपिटल’

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार (एनसीआरबी) वर्ष 2016 में महिलाओं और बच्चियों से सबंधित अपराध के मामलों में जहां देश की राजधानी दिल्ली का स्थान शीर्ष पर है, वहीं सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में हरियाणा का स्थान पहला है|

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हरियाणा के पानीपत से प्रारंभ हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान को लगभग 3 साल बीत चुके है, लेकिन इसी हरियाणा में बेटियाँ सबसे अधिक असुरक्षित है|

‘राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार’ (एनसीआरबी) के अनुसार वर्ष 2016 में महिलाओं और बच्चियों से सबंधित अपराध के मामलों में जहां देश की राजधानी दिल्ली का स्थान शीर्ष पर है, वहीं सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में हरियाणा का स्थान पहला है|

देश भर के अपराधों पर नजर रखने वाली ‘राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो’ के आंकडे बताते हैं कि बलात्कार की सबसे अधिक घटनाएं मध्यप्रदेश के बाद हरियाणा में होते हैं। जबकि दिल्ली में बलात्कार के मामलों में मामूली कमी देखी गई, लेकिन फिर भी यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता कि दिल्ली की हालत लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से सुधरी है| आकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में दिल्ली में 2 हज़ार 64 यौन शोषण की घटनाएं सामने आई, जबकि 2017 में 2 हजार 49 लड़कियां इसका शिकार बनीं। रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि 96 फीसदी घटनाओं को अंजाम देने वाले गुनाहगार रेप पीड़िता के जानकार या करीबी होते हैं।

हाल ही में हरियाणा पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं के साथ अपराधों के कुल 9,523 मामलें दर्ज हुए है| इसमें से यदि दुष्कर्म और उत्पीड़न को हटा दिया जाए तो 2,432 मामलें महिलाओं और लड़कियों के अपहरण के दर्ज हुए है| साथ ही 3,010 मामलें दहेज प्रथा से जुड़े है|

‘एनसीआरबी’ की रिपोर्ट बताती है कि साल 2016 के दौरान हरियाणा में सामूहिक दुष्कर्म के 191 मामलें दर्ज किए गए है, जो देश के सबसे बड़े राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से कहीं ज्यादा है|

इन सब के बीच यदि नेता- मंत्रियों के अफ़सोसजनक बयान सामने आते है तब उनके विकृत सोच का पता चलता है| पिछले दिनों हरियाणा के एडीजी आर.सी मिश्रा का बेहद शर्मनाक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस तरह की घटनाएं अनंतकाल से होती चली आ रही हैं।

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मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहां 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से यौन शोषण के अपराध में आरोपी को मौत की सज़ा दी जाएगी| पिछले साल दिसंबर में मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट में एक प्रस्ताव पास किया गया था। जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार करने के दोषी को मौत की सज़ा देने का प्रावधान बनाया गया| वहीँ, सामूहिक बलात्कार से जुड़े अपराध में सज़ा और जुर्माना दोनों शामिल किया गया।

इस विधेयक के अंतर्गत 12 उम्र की बच्ची से रेप या गैंगरेप के दोषी को फांसी की सज़ा के प्रावधान के साथ और भी कई कानून जोड़े गए| मसलन, शादी का प्रलोभन देकर संबंध बनाने के मामलों में तीन साल की सज़ा का प्रावधान किया गया है। महिला को निर्वस्त्र करने के मकसद से छेड़छाड़ करने पर एक लाख रूपए के अर्थ दंड को शामिल किया गया है। इतना ही नहीं ऐसे मामलों में लोक अभियोजक का पक्ष सुने बगैर जमानत का लाभ भी नहीं दिया जा सकेगा।

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The Policy Times
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