शिक्षा को दरकिनार कर भारत बनाएगा 10 ट्रिलियन की अर्थव्यबस्था

मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले अपने अंतरिम बजट पेश कर दो बड़े चुनावी दांव चल दिए हैं| पहला दांव किसानों पर और दूसरा शहरी मध्यम वर्गीय लोगों पर| एक तरफ जहां छोटे किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव कर शहरी मध्यम वर्ग को को राहत दी है|

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India will create 10 trillion financial improvements, leaving education outside
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मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले अपने अंतरिम बजट पेश कर दो बड़े चुनावी दांव चल दिए हैं| पहला दांव किसानों पर और दूसरा शहरी मध्यम वर्गीय लोगों पर| एक तरफ जहां छोटे किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया वहीं दूसरी ओर मोदी सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव कर शहरी मध्यम वर्ग को को राहत दी है|

शायद सरकार को ऐसा लगता है कि देश में किसानों के अंदर सरकार के खिलाफ पनप रहे गुस्से को ठंडा किया जा सकेगा, क्योंकि अभी कुछ दिन पहले ही आलू किसानों ने फसल की सही लागत न मिलने पर पीएमओ को मंडी में मिले बिल भेजे थे|  इससे पहले खेती से जुड़े मुद्दों पर सरकार के खिलाफ कई आंदोलम भी चलाये जा चुके हैं| दूसरी ओर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सरकार बनाने के बाद कर्ज माफी ऐलान किया और  विधानसभा चुनाव से पहले भी राहुल गांधी ने किसानों की कर्जमाफी का ऐलान किया था| अब वह लोकसभा चुनाव के प्रचार में भी ऐसा ही ऐलान कर रहे हैं|  इससे पहले माना जा रहा था कि मोदी सरकार भी किसानों के कर्जमाफी का ऐलान कर सकती है, लेकिन अब सीधे आर्थिक मदद देने का ऐलान कर मोदी सरकार ने बड़ा दांव खेला है|

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2014 के लोकसभा चुनाव में मध्यम वर्ग का अच्छा ख़ासा वोट बीजेपी की खाते में गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद से इस आर्थिक वर्ग खासकर शहरी मध्यम वर्ग के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया|  अब मोदी सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव कर दिया है|  नए एलान के मुताबिक़ 5 लाख रुपये की सालाना आय वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा, लेकिन इससे ज्यादा सालाना आय वालों के लिए टैक्स के पुराने नियम ही जारी रहेंगे| इसके साथ ही बैंक ब्याज और डिपोजिट पर मिलने वाले ब्याज पर भी 40000 हजार तक कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा| वहीं स्टैंडर्ड डिडक्शन में भी 40 हजार से 50 हजार तक की छूट दे दी है| दूसरी ओर से 6.5 लाख रुपये के सालाना निवेश पर भी कोई टैक्स नहीं मिलेगा|

चुनावी साल में पेश हुए इस बजट में गौर करने की बात ये है कि बजट-2019 के भाषण के अंत तक यह निष्कर्ष नहीं निकल सका कि शिक्षा अब राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण बिल्डिंग ब्लॉक है या नहीं जिसे कभी माना जाता था। आमतौर पर स्वास्थ्य और शिक्षा को एक साथ रखा जाता है और किसी भी देश में तरजीह दी जाती है। हालाँकि बजट स्पीच में स्वास्थ्य के विषय को काफी पहले ही छू लिया गया था, लेकिन लोग प्रतीक्षा कर रहे थे कि शिक्षा पर प्रकाश डाला जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।

शिक्षा को आज शायद डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया और उत्कृष्टता संस्थानों के रूप में देखा जा रहा है जो कि वे नहीं हैं। हमारे स्कूलों और विश्वविद्यालयों को उचित महत्व दिए बिना, देश अगले आठ वर्षों में 10 मिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा।10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लिए भारत को मजबूत अनुसंधान आधार के साथ एक ज्ञानी अर्थव्यवस्था बनना होगा। देश को जर्मनी की तरह पारंपरिक योजनाओं से परे देखने की जरूरत है| देश को प्रधानमंत्री रिसर्च फैलोशिप प्रोग्राम और फ्राउनहोफर सोसाइटी जैसी स्थायी प्रणालियों को लागू करने की ज़रुरत है| यह मॉडल सैद्धांतिक के बजाय प्रैक्टिकल मुद्दों पर केंद्रित है। इस योजना के तहत, 30 प्रतिशत तक का धन राज्य सरकारों द्वारा प्रदान किया जाता है वकाया उद्योग और सरकारी प्रोजेक्टों  से अर्जित किया जाता है। इस सशक्त मॉडल की कामियाबी के कारण, न केवल जर्मनी में बल्कि अमेरिका सहित दुनिया भर में केंद्र खोले गए हैं। यह 2.3 बिलियन के बजट के साथ दुनिया में लागू शोध के छेत्र में सबसे बड़ा संगठन बन गया है।

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स्किलिंग और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना देश और इसके युवाओं के समक्ष उभरती स्थिति को ध्यान में रखते हुए समय की आवश्यकता है। आश्चर्यजनक रूप से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी बजट भाषण में डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और मुद्रा योजना को छोड़कर शायद ही कुछ और सोचा गया था। देश को एक उम्मीद थी कि राष्ट्रीय स्तर के कौशल विश्वविद्यालय की घोषणा दूरस्थ शिक्षा में इग्नू की तर्ज पर की जाएगी जो पूरे देश में एकसमान मानकों को सुनिश्चित कर सके।

कौशल और शिक्षा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं | ज़रुरत है शिक्षा को मुख्यधारा में लाने की और इसे कक्षा IX से कॉलेज और फिर कॉलेज से विश्वविद्यालय स्तर तक ले जाने की|

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