भारत में बेरोज़गारी, राजनितिक भ्रष्टाचार और आतंकवाद बनी बड़ी समस्या: सर्वे

एक वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत में लोग ‘बेरोजगारी’ और ‘राजनीतिक भ्रष्टाचार’ की तुलना में ‘आतंकवाद’ को लेकर अधिक चिंतित हैं| इस साल फरवरी में कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमले के बाद, सर्वेक्षण में लगभग 45 फीसदी लोगों ने कहा कि वे देश में आतंकवाद से सबसे ज्यादा डरते हैं|

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HIGHLIGHTS

  • भारत में 45 फीसदी लोग आतंकवाद को सबसे बड़ा मुद्दा मानते है|
  • जबकि 42% भारतीयों के लिए ‘राजनीतिक भ्रष्टाचार’ बड़ी समस्या है|
  • वहीं 44 प्रतिशत लोग बेरोजगारी को लेकर चिंतित है|
  • भारत में 73 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उनका देश सही दिशा की ओर बढ़ रहा है|
  • वैश्विक स्तर पर 28 देशों में किये गए सर्वे में 22 देश के लोग अपने राष्ट्र के भविष्य को लेकर आशावादी नहीं हैं |

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विश्व के हर देश में उनके ज़मीनी मुद्दे अलग-अलग होते है परंतु दुनिया की हर राजनीतिक व्यवस्था का एक ही लक्ष्य होता है कि जनता में खुशहाली बढे और बदहाली कम हो|

इन्ही ज़मीनी मुद्दों को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें भारतियों ने तीन मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की है|

एक वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत में लोग ‘बेरोजगारी’ और ‘राजनीतिक भ्रष्टाचार’ की तुलना में ‘आतंकवाद’ को लेकर अधिक चिंतित हैं| इस साल फरवरी में कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमले के बाद, सर्वेक्षण में लगभग 45 फीसदी लोगों ने कहा कि वे देश में आतंकवाद से सबसे ज्यादा डरते हैं| इप्सोस’ के सर्वे ‘व्हाट वरीज़ द वर्ल्ड’ के अनुसार, लगभग आधे उत्तरदाताओं ने कहा कि देश में ‘आतंकवाद’ एक चुनौती के रूप में बनता जा रहा है|

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सर्वे में 44 प्रतिशत भारतियों ने कहा कि वे बेरोजगारी से भी चिंतित हैं वहीँ, 42 प्रतिशत ने राजनीतिक भ्रष्टाचार का उल्लेख किया| जबकि अपराध और हिंसा पर 33 प्रतिशत एवं गरीबी और सामाजिक असमानता पर 29 प्रतिशत भारतीयों ने चिंता व्यक्त की|

पुलवामा आतंकी हमले ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है| आतंकवाद भारतीयों को सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है| इसी तरह, नौकरियों की कमी भी भारतीयों के लिए चिंता बनी हुई| वहीँ, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए और अधिक ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है|

सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारतीय इन बड़े मुद्दों को लेकर चिंताग्रस्त हैं जिसे सरकार को गम्भीरता से देखना चाहिए|

सर्वे से यह पता चलता है कि वैश्विक आबादी का 34 प्रतिशत ‘राजनीतिक भ्रष्टाचार’ और ‘सामाजिक असमानता’ को बड़ी समस्या बताता है| इसके बाद बेरोजगारी (33%), अपराध और हिंसा (31%) और हेल्थकेयर (24%) है| वहीं अगर भारत की बात करें तो महत्वपूर्ण मुद्दों में हेल्थकेयर (स्वास्थ) को मुद्दा नहीं मानते हैं |

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हालाँकि भारत में 73 प्रतिशत लोगों का मानना है की उनका देश सही दिशा की ओर बढ़ रहा है, वहीं अगर वैश्विक औसत को लें तो करीब 54 % लोग मानते हैं कि उनका देश गलत दिशा की ओर बढ़ रहा है|

28 देशों में किये गए सर्वे में 22 देश के लोग अपने राष्ट्र के भविष्य को लेकर आशावादी नहीं हैं |

वहीँ, अगर चीन जैसे विशाल देश की बात करें तो इस वैश्विक सर्वे में यह बात सामने आई कि चीन के 94 प्रतिशत लोग अपने राष्ट्रीय दिशा को लेकर अधिक आत्मविश्वासी है और हर 10 में से 9 चीनी नागरिक यह विश्वास करते है कि उनका राष्ट्र सही दिशा की ओर बढ़ रहा है|

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IPSOS World Survey
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एक वैश्विक सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत में लोग ‘बेरोजगारी’ और ‘राजनीतिक भ्रष्टाचार’ की तुलना में ‘आतंकवाद’ को लेकर अधिक चिंतित हैं| इस साल फरवरी में कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमले के बाद, सर्वेक्षण में लगभग 45 फीसदी लोगों ने कहा कि वे देश में आतंकवाद से सबसे ज्यादा डरते हैं|