कठुआ बलात्कार मामला: कॉल और बैंक खातों के रिकार्ड से सामने आई सच्चाई

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली यह घटना देश और देशवासियों का असली चेहरा भी सामने लेकर आई| देश के इतिहास में पहले यह कभी नहीं देखा गया था कि कोई संगठन या राजनतिक पार्टियां भी केवल मज़हब के नाम से बलात्कारियों को बचाने के लिए रैली निकाली हो और इनमे से ज्यादातर वही लोग शामिल थे जो देशभक्ति के बड़े-बड़े पाठ आज जनता को पढ़ा रही है।

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साल ख़त्म होने को है लेकिन असीफा को अब तक इन्साफ नहीं मिला| यह कोई मामूली या सामान्य घटना नहीं थी जिसे वक़्त  के साथ भुला जा सके| यह घटना उस गिरी हुई सोच का अंजाम है जो अपने धर्म और समुदाय के दबदबे को बरक़रार रखने के लिए 8 साल की मासूम बच्ची को टारगेट किया गया|

हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कठुआ में हुए बलात्कार और हत्या की जांच पूरी कर ली है| क्राइम ब्रांच की टीम ने इस घटना से जुड़ी अहम सबूत पठानकोट अदालत में एक पूरक चार्जशीट दायर की, जिसमें आरोपियों के कॉल रिकार्ड्स और बैंक अकाउंट डिटेल्स से सबंधित महत्वपूर्ण तथ्य हाथ लगे जिससे साफ़ पता चलता है कि आरोपियों ने कितनी चालाकी से सबूतों को मिटने की कोशिश की| सुप्रीम कोर्ट ने मई में इस मामले का ट्रायल जम्मू-कश्मीर से पठानकोट ट्रांसफर किया था। नेशनल हेरल्ड को पूरक चार्जशीट की प्रति प्राप्त हुई है जिसमें पीड़ित पर नशीली दवाईयों के प्रभाव को लेकर मेडिकल राय भी शामिल है।

चार्जशीट के मुताबिक मुख्य साजिशकर्ता सांजी राम के साथ स्पेशल पुलिस आफिसर दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा , दोस्त परवेश कुमार उर्फ मन्नू , राम का किशोर भतीजा और उसका बेटा विशाल जंगोत्रा उर्फ शम्मा कथित तौर पर शामिल हुए| जांच अधिकारी (आईओ) हेड कांस्टेबल तिलक राज और सब इंस्पेक्टर आनंद दत्त भी शामिल हैं जिन्होंने राम से कथित तौर पर 4 लाख रूपए लिए और अहम सबूत नष्ट किए| जांच से यह पता चलता है कि राम ने मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को 4 लाख रूपये 3 किस्तों में दिए और आरोपी पुलिस अधिकारियों ने मृतका के कपड़े फारेंसिक लैब में भेजने से पहले उसे धोकर अहम सबूत नष्ट किए और मौके पर झूठे साक्ष्य बनाए|

बैंक खाता और कॉल रिकार्ड्स का खुलासा

कठुआ रेप मामले में क्राइम ब्रांच ने हेड कांस्टेबल तिलक राज और सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को भी गिरफ्तार किया था जिन्होंने कथित तौर पर सांजी राम से 4 लाख रुपए लिए थे और कई महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को पूरक चार्जशीट दायर करने के लिए 8 हफ्तों का वक्त दिया था।

  • क्राइम ब्रांच की जांच के बाद सामने आया यह सच :
  1. दिसंबर 2017 से जनवरी 2018 के दौरान सांजी राम ने अपने बैंक खाते से अलग-अलग तारीखों पर कई बार 40 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक निकाले। जांच में यह पाया गया कि इस दौरान सांजी राम ने न तो कोई निर्माण कराया, न ही कोई मूल्यवान संपत्ति खरीदी और उनके परिवार में कोई समारोह भी नहीं हुआ।
  2. आनंद दत्ता के बैंक खाते की जांच में पता चला कि पहले के महीनों की तुलना में जनवरी-फरवरी 2018 में उनके खाते से निकासी लगातार घटती गई। तिलक राज के बैंक खाते की जांच में भी यही बात सामने आई।
  3. ग्रामीण रक्षा समिति के सदस्यों ने बताया कि उनकी पहली गवाही आरोपी सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता ने कराई थी और उन्हें क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी के सामने गलत वक्तव्य देने के लिए कहा गया था।
  4. कॉल रिकार्ड की जांच से सामने आया कि अपराध के आसपास की तारीखों में आरोपियों दीपक खजुरिया, सांजी राम, तिलक राज, आनंद दत्ता, सुरिंदर और विशाल जंगोत्रा के बीच कॉल्स के आदान-प्रदान में काफी बढ़ोतरी हुई।
  5. फोरेंसिक रिपोर्ट से यह पता चला कि आकांक्षा कॉलेज, मीरापुर में बीएससी (कृषि) की पढ़ाई कर रहा विशाल जंगोत्रा 12 और 15 जनवरी को हुई परीक्षा में शामिल नहीं था और उसने छेड़छाड़ के जरिये उपस्थिति पत्र में अपना नाम दर्ज करवाया। कानून से बचने के लिए उसने ऐसा किया।
  6. कॉल विवरणों के विश्लेषण से यह भी पता चला कि विशाल उत्तर प्रदेश में रहते हुए अपने परिवार वालों के निरंतर संपर्क में था। और आश्चर्यजनक रूप से 12 से 17 जनवरी के बीच विशाल और उसके अभिभावकों के बीच फोन पर कोई बात नहीं हुई, जो अपने आप असामान्य है और यह बताता है कि अपराध के आसपास की तारीखों के दौरान वह रसाना में था।

विशाल के मोबाइल फोन से मिले डाटा और संदेशों के अनुसार, वह काफी परेशान था और अपने अपराधबोध के परिणामस्वरूप इस बात को लेकर चिंतित था कि पुलिस उसे गिरफ्तार न कर ले।

इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली यह घटना देश और देशवासियों का असली चेहरा भी सामने लेकर आई| देश के इतिहास में पहले यह कभी नहीं देखा गया था कि कोई संगठन या राजनतिक पार्टियां भी केवल मज़हब के नाम से बलात्कारियों को बचाने के लिए रैली निकाली हो और इनमे से ज्यादातर वही लोग शामिल थे जो देशभक्ति के बड़े-बड़े पाठ आज जनता को पढ़ा रही है और इससे भी अजीब बात कि कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (जम्मू) भी इस आंदोलन में शरीक था| साल गुजरने को है पर असीफा को इन्साफ नहीं मिला लेकिन क्राइम ब्रांच द्वारा हाथ लगे यह महत्वपूर्ण तथ्य शायद असीफा को इन्साफ दिलाने के लिए काफी हो | कठुआ में हुए इस मामले के बाद विशेषरूप से, लोकसभा ने हाल ही में आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2018 पारित किया गया है जिसमें 12 साल से कम उम्र के बच्चे के बलात्कार के मामलों में बलात्कारियों को मृत्युदंड का प्रावधान है|

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कठुआ बलात्कार मामला: कॉल और बैंक खातों के रिकार्ड से सामने आई सच्चाई
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इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली यह घटना देश और देशवासियों का असली चेहरा भी सामने लेकर आई| देश के इतिहास में पहले यह कभी नहीं देखा गया था कि कोई संगठन या राजनतिक पार्टियां भी केवल मज़हब के नाम से बलात्कारियों को बचाने के लिए रैली निकाली हो और इनमे से ज्यादातर वही लोग शामिल थे जो देशभक्ति के बड़े-बड़े पाठ आज जनता को पढ़ा रही है।
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The Policy Times
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