WHO Report: आलसी देशों की लिस्ट में शामिल भारत… 34% लोग फिजीकली इनएक्टिव!

रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल है जहाँ लोग सबसे ज्यादा आलसी और आरामतलब है| शारीरिक सक्रियता जानने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 168 देशों के लगभग 19 लाख लोगों पर शोध किया था। इस शोध के मुताबिक भारत का स्थान 52वां है।

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List of lazy countries INDIA at top, 34% peoples are physically inactive
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जहाँ एक ओर भारत सेहत और फिटनेस को लेकर हर साल आगे बढ़ रहा है वहीँ, हाल ही में पेश हुई विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की रिपोर्ट चौंकाने वाली है|

रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल है जहाँ लोग सबसे ज्यादा आलसी और आरामतलब है|

शारीरिक सक्रियता जानने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 168 देशों के लगभग 19 लाख लोगों पर शोध किया था। इनमें भारत के करीब 77 हज़ार लोग शामिल थे। इस शोध के मुताबिक भारत का स्थान 52वां है। डब्ल्यूएचओ के इस शोध को लैनसेट ने जारी किया है|

आज के दौर में ज़्यादातर लोगों की ज़िन्दगी दफ्तर, मोबाइल, सोशल मीडिया और घर के कुछ छोटे कामों में सिमट कर रह गई है| इस बीच लोगों को खुद पर ध्यान देने का वक़्त नहीं है जिसके कारण जीवनशैली निष्क्रिय हो रही है|

निष्क्रिय जीवनशैली की लिस्ट में सबसे अधिक विकसित देशों के नाम शामिल है जहाँ लोगों के पास सुविधाओं और फैसिलिटी की कमी नहीं है लेकिन उन्ही फैसिलिटी के कारण लोग निष्क्रिय और आलसी हो रहें है|

रिपोर्ट के अनुसार युगांडा दुनिया का सबसे ऊर्जावान देश है, जहाँ 94.5 % लोग एक्टिव है वहीँ, कुवैत सबसे सुस्त देश है, जहाँ 67 % लोग फिजिकली इनएक्टिव है। इसके बाद अमेरिका (53.4%), सऊदी अरब (53%) और इराक (52%) का नंबर आता है जहाँ ज्यातर लोग फिजिकली इनएक्टिव है|

भारत के सबसे अलसी शहरों की लिस्ट

यह सच है कि ज़्यादातर भारतीय अपने जीवनशैली के अंदाज़ में बदलाव के लिए आसानी से तैयार नहीं होते| इस दिशा में देश की

सरकार ने भी लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ें कई दिशा नर्देश भी जारी करते है ताकि लोगों के भीतर स्वस्थ जीवनशैली की चाह पैदा हो सकें|

जहाँ एक ओर हम यह मानतें है कि बडें शहर और मेट्रो सिटीज़ में ज्यादा फिट और फुर्तीले लोग होतें है वहीँ आलसी शहरों की लिस्ट में इनके नाम सबसे ऊपर है|

भारत में मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक और तमिलनाडु का नाम आलसी शहरों के लिस्ट में शामिल है।

इन शहरों में ज्यादातर लोग देर रात से सोते है वहीँ, सुबह 7 बजे से पहले नहीं उठते।

यह शहर हैं सबसे ‘फिट’

रिपोर्ट में कहा गया है कि NCR के शहर स्वास्थ और फिटनेस को लेकर ज्यादा सक्रीय है| गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद यानि NCR के इलाके, फिटनेस या सेहत को लेकर देश के सबसे अधिक जागरूक शहरों में आते हैं।

यह भी बताया गया है कि इन शहरों के लोग रोज़ 340 कैलोरी जलाते हैं और महीने में कम से कम दस दिन सुबह की सैर, वर्कआउट जैसे फिजिकल वर्क करते हैं।

अध्ययन के मुताबिक गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद के 45 प्रतिशत लोग रोज़ाना दौड़ लगाते हैं। ये लोग प्रतिदिन औसतन 4,700 कदम दौड़ते हैं। बाकी शहरों का औसत 4,300 कदम से कम है।

34% लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव

रिपोर्ट के मुताबिक देश के 34% लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव (शारीरिक रूप से बेहद कम सक्रिय) हैं। इससे पहले 2001 में ऐसा अध्ययन किया गया था। तब भारत के 32% लोग इनसफिशिएन्ट फिजिकली एक्टिव थे।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2016 में भारत में आलसी लोगों की संख्या 2% बढ़ गई है|

इस समय भारत में ज्यदातर लोग कंप्यूटर पर काम करते घंटो बिता देते है| ये लोग 8-10 घंटे एक ही जगह बैठे रहते है और शारीरिक व्यव्याम को समय नहीं देते| इस बारे में चंडीगढ़ के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रजनीश कपूर का कहना है, ‘निष्क्रिय जीवनशैली का सबसे घातक असर ह्रदय की सेहत पर होता है| अगर व्यक्ति सप्ताह में कुछ घंटे भी एक्सरसाइज़ को दें तो वह दिल की सेहत के लिए बहुत कुछ कर सकता है|’

आलसी हो रही युवा पीढ़ी

जहाँ युवा अपने उज्जवल भविष्य के सपने लिए बड़े शहरों में आते है वहीँ, ज्यादातर अपने कार्य को लेकर सुस्त हो गए है| भारत में 89 प्रतिशत लोग ग्रेजुएट है लेकिन उन्हें किसी भी कंपनी से कार्य अनुभव प्राप्त नहीं है| ये लोग होटलों, दुकानों, और छोटी कंपनियों में खुद के खर्चे निकालने के मकसद से कार्य करतें है, न की उत्साह से|

भारत में ज्यादतर लोग अपने लक्ष्यों को लेकर कंफ्यूज है| कुछ लोग ऐसे पाए गए जो  कॉलेज परिसर से प्लेसमेंट तो प्राप्त कर लेते है लेकिन बाद में उन्हें ऐसा लगता है कि यह वह नहीं है जो वें चाहते है| बाद में वे नौकरी छोड़ देंते है| शायद यह भी वजह है कि जापान जैसा छोटा सा देश तेजी से बढ़ रहा है जबकि भारत आराम से बढ़ रहा|

आलस के कारण पड़ रहे बीमार  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में एक तिहाई लोग आलस के कारण बीमार पड़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक भारत की 125 करोड़ आबादी में 42 करोड़ लोग आलस की चपेट में आकर बीमार हो रहें हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत की 34 फीसदी जनसंख्या पर पर्याप्त शारीरिक श्रम नहीं करने की वजह से कई बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है|

ऐसे बनें एक्टिव

वर्कआउट ब्रेक

वर्कआउट ब्रेक का ध्यान रखें| ऑफिस की डेस्क में घंटो बैठे रहने की बजाए उठकर टहलना लाभकारी है| हर 45 मिनट के बाद डेस्क से उठना ज़रूरी है|

कार छोड़े, पैदल चलें

जितना संभव हो सकें कार और बाईक से हर जगह जाने की आदत बदलें| ज्यादतर पैदल चलें और सार्वजनिक यातायात का उपयोग करें| नज़दीक की जगह पैदल ही जाएँ|

घर के सफाई खुद करें

जो लोग घर की सफाई और छोटे-मोटे काम खुद करतें है वे लोग अपनी सक्रियता बढाते है| इसके कई फाएदे भी है| सारे काम नौकरों या सहायक के ज़रिए करवाने की आदत छोड़े|

खेल से जुड़ें

टेलीविज़न पर स्पोर्ट्स चैनल और खेल देखनें की बजाए खुद मैदान में उतरें और उन्हें खेलने की कोशिश करें|

फिटनेस ट्रेकर की लें मदद

ऐसे कई उपकरण है जिसकी मदद से आप दिनभर कितना चले और फिजिकल फिटनेस से जुड़ी जानकारी लें सकते है| उनकी मदद से प्लान बनाएं|

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रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल है जहाँ लोग सबसे ज्यादा आलसी और आरामतलब है| शारीरिक सक्रियता जानने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 168 देशों के लगभग 19 लाख लोगों पर शोध किया था। इस शोध के मुताबिक भारत का स्थान 52वां है।
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The Policy Times
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