लोकसभा चुनाव 2019: नमो टीवी पर बीजेपी को बड़ा झटका, चुनाव आयोग ने दिए पूरा सामग्री हटाने के निर्देश

लोकसभा चुनाव के बीच नमो टीवी को लेकर खूब विवाद हुआ। विपक्षी दलों की ओर से शिकायत के बाद यह विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया था। चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जितनी भी रैलियां चल रही थीं उनका सीधा प्रसारण नमो टीवी पर हो रहा था।

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Lok Sabha Elections 2019: Big blow to BJP on Namo TV, directing EC to remove entire contents given by Election Commission

लोकसभा चुनाव के बीच नमो टीवी को लेकर खूब विवाद हुआ। विपक्षी दलों की ओर से शिकायत के बाद यह विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया था। चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जितनी भी रैलियां चल रही थीं उनका सीधा प्रसारण नमो टीवी पर हो रहा था। यह प्रसारण बिना किसी ब्रेक और बिना किसी अन्य प्रकार के रुकावट के हो रहा था। इसके अलावा इस पर पीएम मोदी के रिकॉर्डेड इंटरव्यू और पुरानी रैलियों को भी दिखाया जा रहा था। लेकिन चुनाव आयोग आयोग ने निर्देश जारी कर नमो टीवी से सभी सामग्री को तुरंत प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही आयोग ने निर्देश दिया है कि बिना कमेटी की मंजूरी के नमो टीवी पर कोई कंटेंट नहीं जाने दिया जाए और बिना इजाजत नमो टीवी पर डाले गए सभी कंटेंट को हटाया जाएगा।

बीजेपी नेनमो टीवीको मंजूरी के बिना ही लॉन्च किया

भारतीय जनता पार्टी नेनमो टीवीको मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी की मंजूरी के बिना ही लॉन्च किया था। दस्तावेजों के मुताबिक एमसीएमसी ने नमो टीवी की लॉन्चिंग का अनुरोध रद्द कर दिया था। बीजेपी ने एमसीएमसी से मंजूरी लेने की अपील की थी लेकिन पार्टी की इस मांग को खारिज कर दिया गया था। इस मामले की पूरी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भी भेजी गई थी। बिना अनुमति ही नमो टीवी की लॉन्चिंग करने को सीधे प्रक्रियाओं का उल्लंघन माना जा रहा है। मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी राज्य और जिला स्तर पर चुनाव आयोग की ओर से चुनावों के दौरान स्थापित की जाती है। आचार संहिता लागू होने के बाद विज्ञापनों और प्रचार आदि की मंजूरी इस संस्था की मंजूरी जरूरी होती है।

इंडिया टुडे के मुताबिक उसके पास इस पूरे विवाद के दस्तावेज लगे हैं। ये दस्तावेज उस दौरान के हैं, जब भाजपा की ओर से नमो टीवी की इजाजत के लिए आवेदन किया गया था। चुनाव आयोग के संबंधित विभाग में भाजपा की चुनाव समिति के सदस्य नीरज की ओर से मीडिया/विज्ञापन का प्रमाण पत्र लेने के लिए 29 मार्च को आवेदन किया गया था। इस माध्यम को टीवी, रथ वैन, सोशल मीडिया और सिनेमा के माध्यमों से दिखाने की इजाजत मांगी गई थी।

मीडिया सर्टिफिकेशन कमेटी ने इस आवेदन की सामग्री की जांच के बाद 30 मार्च के प्रसारण की इजाजत दी थी। इसका इरादा है कि सिर्फ नमो टीवी के लोगो को हरी झंडी दी गई थी।

इसके बाद 29 मार्च, 30 मार्च, 1 अप्रैल, 2 अप्रैल, 3 अप्रैल, 5 अप्रैल और 8 अप्रैल को भी चुनाव आयोग के संबंधित विभाग को नमो टीवी के मीडिया/विज्ञापन के सर्टिफिकेशन के लिए 10 आवेदन मिले थे, जो कि विज्ञापन के बजाए भाषण और इंटरव्यू थे। इस आवेदन की मजेदार बात यह थी कि आवेदन में पीएम मोदी के भाषणों के लिए पूर्व इजाजत देने की मांग की गई थी। यह इसलिए संभव नहीं था क्योंकि पूर्व इजाजत उन्हीं कार्यक्रमों की दी जाती है, जो पहले से पब्लिक डोमेन में हों। भाजपा ने अपने आवेदन में यह नहीं बताया कि इसमें भाषण और डॉक्यूमेंटरीज दिखाई जाएंगी। इसमें नमो टीवी के लोगो के अलावा किसी चैनल या राजनीतिक विज्ञापन के मंच के बारे में भी नहीं बताया गया था।

आवेदन में अरुण जेटली का आप की अदालत में जाना, अमित शाह का इंडिया के डीएनए में जाना, नरेंद्र मोदी का एबीपी न्यूज में इंटरव्यू आदि के प्रसारण की बात कही गई थी। सर्टिफिकेशन कमेटी इनके प्रसारण का सर्टिफिकेट नहीं दे सकी, क्योंकि यह पहले से पब्लिड डोमेन में थे। इस आवेदन और इसकी सामग्री की जांच के बाद कमेटी को लगा था कि यह किसी तरह का राजनीतिक विज्ञापन नहीं है, इसलिए तय हुआ कि यह कमेटी इस पर निर्णय नहीं ले सकती है। इसका साफ आशय है कि भाषण या इंटरव्यू के लिए सर्टिफिकेट नहीं दिया गया था। इस बारे में आवेदक को बता भी दिया गया था। 3 अप्रैल, 6 अप्रैल और 8 अप्रैल को इस बारे में पत्र व्यवहार किया गया था। इसके बाद भाजपा की ओर से इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया गया था।

पहले भी चुनाव आयोग ने जवाब मांगी थी

पहले भी चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी थी। दिल्ली के निर्वाच अधिकारी ने चुनाव आयोग को इस संबंध में जवाब दिया है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट पर मंथन चल रहा था। पिछले सप्ताह चुनाव आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से नमो टीवी की लॉन्चिंग पर जवाब मांगा था। जवाब में सूचना प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि यह एक विज्ञापन प्रसारण चैनल है, न्यूज चैनल नहीं।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की थी कि नमो टीवी को सस्पेंड किया जाए क्योंकि यह मामला आचार संहिता के उल्लंघन का है। चुनाव आयोग ने नमो टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से पूछा था कि क्या सर्टिफिकेशन कमेटी ने पॉलिटकल कॉन्टेंट ब्रॉडकास्ट होने की मंजूरी दी थी या नहीं। वहीं सूचना प्रसारण मंत्रलाय ने कहा था कि नमो टीवी डीटीएच सेवा की ओर से प्रसारित होने वाला विज्ञापन चैनल है लेकिन रेगुलर चैनल नहीं है। ऐसे चैनलों की लॉन्चिंग के लिए सरकार की सहमति जरूरी नहीं है।

नमो टीवी के मालिक का पता नहीं, फिर भी जारी कर दिया प्रसारण

चुनाव आयोग ने दूरदर्शन को एक अलग पत्र लिख कर ये भी पूछा है कि दूरदर्शन 31 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी के घंटे भर चले कार्यक्रममैं भी चौकीदारको कैसे चला सकता है? वो भी चुनाव से कुछ समय पहले। जबकि आचार संहिता लागू हो चुकी है।

नमो टीवी के मालिक का पता नहीं

भाजपा के सोशल मीडिया हैंडल्स से लोगों को पी.एम मोदी की रैलियों और भाषणों के लिए नमो टीवी को देखने और नमो एप के इस्तेमाल के लिए ट्वीट किया जा रहा है। भाजपा से जुड़े लगभग सभी कार्यक्रमों को नामो टीवी पर चलाया जा रहा है जबकि इसका मालिकाना हक़ किसके पास है ये भी साफ़ नहीं है। ऐसे में चुनाव आयोग ने सूचना प्रसारण मंत्रालय से पूछा है कि आखिर नमो टीवी को आचार संहिता लागू होने के बाद कैसे प्रसारित होने दिया गया।

नमो टीवी कोई चैनल नहीं

जानकारों के मुताबिक ये माना जा रहा है सरकार चुनाव आयोग को ये बता सकती है कि नमो टीवी लाइसेंस प्राप्त चैनल नहीं है लेकिन सर्विस प्रोवाइडर के द्वारा ये मात्र एक विज्ञापन दिखाने का प्लेटफॉर्म भर है और वो इसका खर्च अपने सालाना ऑडिट रिपोर्ट में चुनाव आयोग को दिखाएगी।

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लोकसभा चुनाव के बीच नमो टीवी को लेकर खूब विवाद हुआ। विपक्षी दलों की ओर से शिकायत के बाद यह विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया था। चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जितनी भी रैलियां चल रही थीं उनका सीधा प्रसारण नमो टीवी पर हो रहा था।
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The Policy Times

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