बेकारी और भुखमरी दूर करने में नाकाम रही मोदी सरकार, 119 देशों में से 103वें पर पहुंचा भारत

भारत गरीबी के चंगुल से निकलने के लिए हमेशा असफल रही है। गरीबी उन्मूलन की विभिन्न योजनाओं के चलते देश में गरीबी हटने के आशा जनक संकेत तो कम से कम यही बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम 2018 मल्टी-डाइमेंशनल वैश्विक गरीबी सूचकांक पर्ची की मानें तो वित्त वर्ष 2005-06 से 2015-16 के बीच के एक दशक में भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए हैं। इस समय देश की आबादी लगभग 135 करोड़ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में 1.3 अरब लोग मल्टी-डाइमेंशनल गरीबी में जीवन बिता रहे हैं, जो कि 104 देशों की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में दस वर्षों की अवधि में गरीब लोगों की संख्या घटकर आधी रह गई है, जो 55 फीसदी से घटकर 28 फीसदी हो गई है।

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Modi government fails to remove unemployment and starvation, reaching 103th out of 119 countries

भारत गरीबी के चंगुल से निकलने के लिए हमेशा असफल रही है। गरीबी उन्मूलन की विभिन्न योजनाओं के चलते देश में गरीबी हटने के आशा जनक संकेत तो कम से कम यही बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम 2018 मल्टी-डाइमेंशनल वैश्विक गरीबी सूचकांक पर्ची की मानें तो वित्त वर्ष 2005-06 से 2015-16 के बीच के एक दशक में भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए हैं। इस समय देश की आबादी लगभग 135 करोड़ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में 1.3 अरब लोग मल्टी-डाइमेंशनल गरीबी में जीवन बिता रहे हैं, जो कि 104 देशों की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में दस वर्षों की अवधि में गरीब लोगों की संख्या घटकर आधी रह गई है, जो 55 फीसदी से घटकर 28 फीसदी हो गई है।

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भुखमरी दूर करने को लेकर भारत की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है। साल 2018 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी हो गया है और इस बार भारत की रैंकिंग में भरी गिरावट आया है। भारत को 119 देशों की सूची में 103वां स्थान मिला है। साल 2017 भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 100वें स्थान पर था। हालाँकि कि साल 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार बनने के बाद से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में लगातार गिरावट आई है।  साल 2014 में भारत में जहां 55वें पायदान पर था, वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें पायदान पर आ गया है। इसबार रैंकिंग 3 गुना निचे आ गया है।

वेल्ट हंगरलाइफ़ नाम के एक जर्मन संस्थान ने 2006 में पहली बार ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी किया था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स की शुरुआत साल 2006 में इंटरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने की थी। इस बार यानी 2018 का इंडेक्स इसका 13वां संस्करण है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स में दुनिया के तमाम देशों में खानपान की स्थिति का विस्तृत ब्योरा होता है। लोगों को किस तरह का खाद्य पदार्थ मिल रहा है, उसकी गुणवत्ता और मात्रा कितनी है और उसमें कमियां क्या हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स  रैंकिंग हर साल अक्टूबर में जारी होती है।

भारत गरीबी और भूखमरी को दूर कर विकासशील से विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए जोर-शोर से प्रयास कर रहा है। सरकार ने दावा क्या है कि इसके लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। नीतियां बनाई जा रही हैं और उसी के अनुरूप विकास कार्य किये जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा 2018 के 73वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके लिए भारत की तारीफों के पुल भी बांधे। लाखों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने के उन्होंने सरकार की पीठ थपथपाई, लेकिन ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने तमाम दावों और आंकड़ों पर सवाल खड़े कर दिये हैं।

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018 के मुताबिक भारत की स्थिति बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों से भी खराब है। इस साल ग्लोबल हंगर इंडेक्स में बेलारूस टॉप पर है। तो वहीं भारत के पड़ोसी चीन को 25वीं, बांग्लादेश को 86वीं नेपाल को 72वीं श्रीलंका को 67वीं और म्यांमार को 68वीं रैंक मिली है। हालांकि पाकिस्तान रैंकिंग में भारत से नीचे से और उसे 106वीं रैंक मिली है।

वर्ष 2014 में भारत की रैंकिंग 55, वर्ष 2015 में 80, वर्ष 2016 में 97, वर्ष 2017 में 100, वर्ष 2018 में 103 स्थान था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018 में भारत के पड़ोसी देशों की स्थिति- चीन 25वे स्थान पर तो श्रीलंका  67 वा। वही म्यामांर 68 वा तो नेपाल 72 वां स्थान पर। बांग्लादेश 86, मलेशिया 57, थाईलैंड     44, तो पाकिस्तान106 वा स्थान पर था।

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भारत गरीबी के चंगुल से निकलने के लिए हमेशा असफल रही है। गरीबी उन्मूलन की विभिन्न योजनाओं के चलते देश में गरीबी हटने के आशा जनक संकेत तो कम से कम यही बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम 2018 मल्टी-डाइमेंशनल वैश्विक गरीबी सूचकांक पर्ची की मानें तो वित्त वर्ष 2005-06 से 2015-16 के बीच के एक दशक में भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए हैं। इस समय देश की आबादी लगभग 135 करोड़ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में 1.3 अरब लोग मल्टी-डाइमेंशनल गरीबी में जीवन बिता रहे हैं, जो कि 104 देशों की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में दस वर्षों की अवधि में गरीब लोगों की संख्या घटकर आधी रह गई है, जो 55 फीसदी से घटकर 28 फीसदी हो गई है।
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The Policy Times