जनवरी से अप्रैल के बीच, महाराष्ट्र में 70% से अधिक मलेरिया के मामले दर्ज, मई के बाद बढ़ेंगे केस

'रेडी टू बीट मलेरिया’ के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 के लिए 'जीरो मलेरिया स्टार्टस विद मी' का शीर्षक दिया है, जिसका मतलब सबसे पहले स्वयं को मलेरिया से मुक्त रखने की शुरुआत करके फिर अपने परिवार को उसके बाद अपने मोहल्ले को, उसके बाद अपने समुदाय, गाँव व कार्यालय को मलेरिया से मुक्त करना है|

0
More than 70% of malaria cases registered in Maharashtra

Highlights

‘रेडी टू बीट मलेरिया 2018’ के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 के लिए ‘जीरो मलेरिया स्टार्टस विद मी’ का शीर्षक दिया है

जनवरी से अप्रैल के बीच, महाराष्ट्र में 70% से अधिक मलेरिया के मामले दर्ज, मई के बाद बढ़ेंगे केस

जनवरी से अप्रैल तक, राज्य भर में 1,041 मामलों में से, 559 मुंबई से और 221 गढ़चिरौली से थे।

भारत में पिछले साल 13 मौतें और 10,757 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए थे| साल 2017 में मलेरिया से मरने वालों की अनुमानित संख्या 4.35 लाख


‘रेडी टू बीट मलेरिया’ के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 के लिए ‘जीरो मलेरिया स्टार्टस विद मी’ का शीर्षक दिया है, जिसका मतलब सबसे पहले स्वयं को मलेरिया से मुक्त रखने की शुरुआत करके फिर अपने परिवार को उसके बाद अपने मोहल्ले को, उसके बाद अपने समुदाय, गाँव व कार्यालय को मलेरिया से मुक्त करना है|

Related Article:Malaria is still one of the three leading causes of death in developing world

मलेरिया से दशक से अधिक समय तक लगातार लड़ने के बाद भी डब्ल्यूएचओ की नवीनतम विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2017 की अवधि में मलेरिया के मामलों को कम करने में कोई महत्वपूर्ण लाभ नहीं हुआ। साल 2017 में मलेरिया से मरने वालों की अनुमानित संख्या 4.35 लाख थी जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग अपरिवर्तित रही।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, ठाणे और वसई-विरार क्षेत्रों के आदिवासी इलाको में मलेरिया के सबसे अधिक मामले सामने आये हैं। जनवरी से अप्रैल तक, राज्य भर में 1,041 मामलों में से, 559 मुंबई से और 221 गढ़चिरौली से थे। भारत में पिछले साल 13 मौतें और 10,757 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए थे|

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया के मामलों से निपटने के लिए एन्टोमोलॉजिकल सर्विलांस जैसे कदम उठाए हैं, निवारक उपायों के रूप में, ड्रग्स प्रदान करने के अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने कीटनाशक का छिड़काव भी शुरू कर दिया है और उच्च स्थानिक क्षेत्रों में मच्छरदानियाँ बांटी हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह के अनुसार, मलेरिया को हराने के लिए उच्च प्रभावी उपायों की मांग की है। डाक्टर सिंह ने कहा कि “डब्ल्यूएचओ का एक लंबा क्षेत्र दक्षिण-पूर्व एशिया मलेरिया को हराने की चाह में आज दुनिया के साथ दोराहे पर खड़ा है|

2015 से 2017 के बीच, इस क्षेत्र ने अपने अनुमानित 25.5 मिलियन मलेरिया कैसलोएड को 56% घटाकर 1.3 मिलियन कर दिया। 2015 और 2017 के बीच, कुल मामलों की संख्या 25% घट गई और पुष्टि की गई और मृत्यु दर आधी से अधिक थी|

आपको बता दें कि दुनिया भर में मलेरिया के लगभग आधे मामले केवल पाँच देशों में पाए गए हैं जिनमे नाइजीरिया 25%, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य 11%, मोज़ाम्बिक 5%, भारत 4% और युगांडा 4% हैं|

नवंबर 2018 में जारी नवीनतम विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के 217 मिलियन मामले 2017 में बढ़कर 219 मिलियन मामले दर्ज किये गए| मलेरिया से अफ्रीका में बड़े पैमाने पर लोगों की मौत होती है। यहां पर हर साल 2, 50,000 बच्‍चों की जान इस बीमारी के कारण जाती है।

डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुमान के अनुसार, दक्षिण पूर्व एशिया के कुल मामलों में 89 फीसद मामले अकेले भारत से दर्ज होते हैं। नेशनल वेक्‍टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP) के अनुसार साल 2016 में 1,090,724 मामले दर्ज किए गए थे, इनमें से 331 लोगों की इस बीमारी से मौत हो गई थी।

हालाँकि 30 वर्षों से चल रहे निरंतर प्रयास के बाद अफ्रीका ने गुरुवार को दुनिया का पहला मलेरिया टीका लॉन्‍च कर दिया| यह टीका अफ्रीकी देश मलावी में लॉन्‍च किया गया| दुनिया भर में हर साल 4,35,000 को मौत के मुंह में ले जाने वाली इस जानलेवा बीमारी से बच्‍चों को बचाने के लिए पिछले 30 वर्षों से इस टीके को लाने के प्रयास चल रहे थे। यह टीका पांच महीने से दो साल तक के बच्चों के लिए विकसित किया गया है।

इस टीके की लॉन्चिंग बच्चों को मलेरिया से बचाने के लिए शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्‍ट का हिस्सा है। इस टीके का नाम RTS,S/AS01 रखा गया है डब्‍ल्‍यूएचओ ने बताया कि अफ्रीकी महाद्वीप के दो देशों घाना और केन्‍या में इस टीके की लॉन्चिंग अगले कुछ हफ्तों में होगी। बता दें कि दुनिया की इस घातक बीमारी से हर मिनट में दो बच्‍चों की मौत हो जाती है।

Related Article:Zika reaches MP, Health Ministry sends team to prevent outbreak

मलेरिया की वैश्विक प्रतिक्रिया को पटरी पर लाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है और चुनौती का सामना करना मलेरिया प्रभावित देशों के हाथों में है। विश्व मलेरिया दिवस 2019 पर, डब्ल्यूएचओ, आरबीएम पार्टनरशिप और अफ्रीकी संघ आयोग मलेरिया को समाप्त करने के लिए ‘जीरो मलेरिया स्टार्टस विद मी’ को बढ़ावा देने में अन्य भागीदार संगठनों में शामिल हो गया है|

‘जीरो मलेरिया स्टार्टस विद मी’ एक जमीनी स्तर पर छेड़ा गया एक अभियान है जिसका उद्देश्य राजनीतिक एजेंडे में मलेरिया को प्राथमिकता देना, अतिरिक्त जुटाना संसाधनों, और समुदायों को मलेरिया की रोकथाम और देखभाल का स्वामित्व लेने के लिए सशक्त बनाना।

मरीजों के बढ़ने की आशंका

स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि अभी शादी सीजन का दौर चल रहा है। इसलिए लाेगों को इधर से उधर आना जाना पड़ रहा है। कहीं भी सो रहे हैं और रातभर जाग रहे हैं। इस स्थिति में अभी मच्छर काटने पर असर मई में दिखेगा। वहीं गर्मी व गंदगी के बीच मई से लेकर बारिश तक मच्छरों का प्रकोप ज्यादा रहता है, जिससे मरीज भी बढ़ते क्रम पर रहते हैं।

Summary
Article Name
More than 70% of malaria cases registered in Maharashtra
Description
'रेडी टू बीट मलेरिया’ के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 के लिए 'जीरो मलेरिया स्टार्टस विद मी' का शीर्षक दिया है, जिसका मतलब सबसे पहले स्वयं को मलेरिया से मुक्त रखने की शुरुआत करके फिर अपने परिवार को उसके बाद अपने मोहल्ले को, उसके बाद अपने समुदाय, गाँव व कार्यालय को मलेरिया से मुक्त करना है|
Author
Publisher Name
The Policy Times