लोकपाल का अधिकार और महत्व

लोकपाल उच्च सरकारी पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने एवं उस पर कार्यवाही करने के निमित्त पद है।भारत में जनवरी 2011 में, सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सुझाव देने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया, जिसमें अन्ना हजारे द्वारा दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के बाद लोकपाल विधेयक के प्रस्ताव की जांच भी शामिल थी। जुलाई 2011 में, केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी, और दोनों सदनों ने दिसंबर 2013 में इसे पूरा किया।

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Lokpal

लोकपाल उच्च सरकारी पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने एवं उस पर कार्यवाही करने के निमित्त पद है।भारत में जनवरी 2011 में, सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सुझाव देने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया, जिसमें अन्ना हजारे द्वारा दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के बाद लोकपाल विधेयक के प्रस्ताव की जांच भी शामिल थी। जुलाई 2011 में, केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी, और दोनों सदनों ने दिसंबर 2013 में इसे पूरा किया।

साल 1967 में उठी थी मांग

विदेश में लोकपाल जैसी संस्था काफी साल पहले से है, लेकिन भारत में इसका प्रवेश साल 1967 में हुआ| उस वक्त पहली बार भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायकों को लेकर लोकपाल संस्था की स्थापना का विचार रखा था| हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया था|

कई बार लोकसभा में हुआ पेश उसके बाद भारत में साल 1971 में लोकपाल विधेयक प्रस्तुत किया गया, हालांकि उस वक्त पास नहीं हो पाया| उसके बाद 1985 में एक बार फिर इसे संसद के समक्ष पेश किया गया, लेकिन फिर भी यह पास नहीं हो सका| इसके बाद भी कई बार इसे लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन हर बार इसमें किसी किसी कारण से अड़ंगा लगता रहा|

दुन्या के कई सारे देश में कई देशों में लोकपाल को ओम्बड्समैन के नाम से जाना जाता है| फिनलैंड में 1918 में, डेनमार्क में 1954, नार्वे में 1961 और ब्रिटेन में 1967 में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए लोकपाल की स्थापना की गई|

कौन हो सकता है लोकपाल

लोकपाल का एक अध्यक्ष होगा, जो या तो भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता है| लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिए| वहीं संसद सदस्य, विधायक, भ्रष्टाचार में दोषी, निगम का सदस्य इसका हिस्सा नहीं हो सकते|

कौन करता है चयन

लोकपाल की चयन समिति में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त किया गया एक सदस्य होता है|लोकपाल कार्यालय में नियुक्ति ख़त्म होने के बाद अध्यक्ष और सदस्यों पर कुछ काम करने के लिए प्रतिबंध लग जाता है|इन्हें कोई कूटनीतिक ज़िम्मेदारी नहीं दी जा सकती और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में नियुक्ति नहीं हो सकती| इसके अलावा ऐसी कोई भी ज़िम्मेदारी या नियुक्ति नहीं मिल सकती जिसके लिए राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर और मुहर से वारंट जारी करना पड़ेगी|

पद छोड़ने के पांच साल बाद तक ये राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संसद के किसी सदन, किसी राज्य विधानसभा या निगम या पंचायत के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकते|

लोकपाल के अधिकार

लोकपाल के दायरे में कुछ मामलों में लोकपाल के पास दीवानी अदालत के अधिकार भी होंगे| लोकपाल के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधिकारियों की सेवा का इस्तेमाल करने का अधिकार, अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार और कर्मचारियों को सेवा से हटाने, जुर्माना लगाने, संपत्ति जब्त करने का अधिकार होता है|

लोकायुक्त

लोकायुक्त का एक अध्यक्ष होगा जो राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या फिर हाईकोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता हैं|लोकायुक्त में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिए|इसके अलावा कम से कम आधे सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए|

क्षेत्राधिकार

लोकायुक्त भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर किसी भी मामले की जांच कर सकता है या करवा सकता है अगर शिकायत या मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ हो| लोकायुक्त निम्न मामलों में जांच कर सकता है| ऐसा मामला जिसमें वर्तमान मुख्यमंत्री हो पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हों|ऐसी सभी कर्मचारी राज्य सरकार के कर्मचारी माने जाएंगे जो ऐसे किसी भी संस्थान या बोर्ड या कॉर्पोरेशन या अथॉरिटी या कंपनी या सोसाएटी या ट्रस्ट या स्वायत्त संस्था में काम करते हों जिनका गठन संसद या राज्य सरकार के क़ानून द्वारा किया गया हो या राज्य सरकार द्वारा आंशिक या पूर्ण रूप से नियंत्रित या वित्तपोषित हों|

ऐसा व्यक्ति शामिल हो जो ऐसी किसी भी सोसायटी, एसोसिएशन का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या कोई और अधिकारी हो जिसे जनता से डोनेशन मिलता हो और जिसकी वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा तय की गई सीमा से अधिक हो या या विदेश से प्राप्त होने वाली धनराशि विदेशी चंदा (विनियमन) कानून के तहत 10 लाख रुपए से अधिक हो या फिर केंद्र सरकार द्वारा तय की गई सीमा के अधिक हो|

लोकायुक्त के अधिकार

लोकायुक्त के पास किसी मामले में जांच एजेंसी के निरीक्षण करने और उसे निर्देश देने का अधिकार है| अगर लोकायुक्त को लगता है कि कोई दस्तावेज़ काम को हो सकता है या किसी जांच से संबंधित हो सकता है तो वह किसी भी जांच एजेंसी को आदेश दे सकता है कि वह उस स्थान की तलाशी ले और उस दस्तावेज़ को ज़ब्त कर ले|

आगे क्या?

लोकपाल के कार्यभार संभालने के बाद, आठ सदस्यों को खोजने और चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है।

Summary
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लोकपाल उच्च सरकारी पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने एवं उस पर कार्यवाही करने के निमित्त पद है।भारत में जनवरी 2011 में, सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सुझाव देने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया, जिसमें अन्ना हजारे द्वारा दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के बाद लोकपाल विधेयक के प्रस्ताव की जांच भी शामिल थी। जुलाई 2011 में, केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी, और दोनों सदनों ने दिसंबर 2013 में इसे पूरा किया। साल 1967 में उठी थी मांग विदेश में लोकपाल जैसी संस्था काफी साल पहले से है, लेकिन भारत में इसका प्रवेश साल 1967 में हुआ| उस वक्त पहली बार भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायकों को लेकर लोकपाल संस्था की स्थापना का विचार रखा था| हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया था| कई बार लोकसभा में हुआ पेश उसके बाद भारत में साल 1971 में लोकपाल विधेयक प्रस्तुत किया गया, हालांकि उस वक्त पास नहीं हो पाया| उसके बाद 1985 में एक बार फिर इसे संसद के समक्ष पेश किया गया, लेकिन फिर भी यह पास नहीं हो सका| इसके बाद भी कई बार इसे लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन हर बार इसमें किसी न किसी कारण से अड़ंगा लगता रहा| दुन्या के कई सारे देश में कई देशों में लोकपाल को ओम्बड्समैन के नाम से जाना जाता है| फिनलैंड में 1918 में, डेनमार्क में 1954, नार्वे में 1961 और ब्रिटेन में 1967 में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए लोकपाल की स्थापना की गई| कौन हो सकता है लोकपाल लोकपाल का एक अध्यक्ष होगा, जो या तो भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता है| लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिए| वहीं संसद सदस्य, विधायक, भ्रष्टाचार में दोषी, निगम का सदस्य इसका हिस्सा नहीं हो सकते| कौन करता है चयन लोकपाल की चयन समिति में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त किया गया एक सदस्य होता है|लोकपाल कार्यालय में नियुक्ति ख़त्म होने के बाद अध्यक्ष और सदस्यों पर कुछ काम करने के लिए प्रतिबंध लग जाता है|इन्हें कोई कूटनीतिक ज़िम्मेदारी नहीं दी जा सकती और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के रूप में नियुक्ति नहीं हो सकती| इसके अलावा ऐसी कोई भी ज़िम्मेदारी या नियुक्ति नहीं मिल सकती जिसके लिए राष्ट्रपति को अपने हस्ताक्षर और मुहर से वारंट जारी करना पड़ेगी| पद छोड़ने के पांच साल बाद तक ये राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, संसद के किसी सदन, किसी राज्य विधानसभा या निगम या पंचायत के रूप में चुनाव नहीं लड़ सकते| लोकपाल के अधिकार लोकपाल के दायरे में कुछ मामलों में लोकपाल के पास दीवानी अदालत के अधिकार भी होंगे| लोकपाल के पास केंद्र या राज्य सरकार के अधिकारियों की सेवा का इस्तेमाल करने का अधिकार, अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार और कर्मचारियों को सेवा से हटाने, जुर्माना लगाने, संपत्ति जब्त करने का अधिकार होता है| लोकायुक्त लोकायुक्त का एक अध्यक्ष होगा जो राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या फिर हाईकोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता हैं|लोकायुक्त में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिए|इसके अलावा कम से कम आधे सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए| क्षेत्राधिकार लोकायुक्त भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर किसी भी मामले की जांच कर सकता है या करवा सकता है अगर शिकायत या मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ हो| लोकायुक्त निम्न मामलों में जांच कर सकता है| ऐसा मामला जिसमें वर्तमान मुख्यमंत्री हो पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हों|ऐसी सभी कर्मचारी राज्य सरकार के कर्मचारी माने जाएंगे जो ऐसे किसी भी संस्थान या बोर्ड या कॉर्पोरेशन या अथॉरिटी या कंपनी या सोसाएटी या ट्रस्ट या स्वायत्त संस्था में काम करते हों जिनका गठन संसद या राज्य सरकार के क़ानून द्वारा किया गया हो या राज्य सरकार द्वारा आंशिक या पूर्ण रूप से नियंत्रित या वित्तपोषित हों| ऐसा व्यक्ति शामिल हो जो ऐसी किसी भी सोसायटी, एसोसिएशन का निदेशक, प्रबंधक, सचिव या कोई और अधिकारी हो जिसे जनता से डोनेशन मिलता हो और जिसकी वार्षिक आय राज्य सरकार द्वारा तय की गई सीमा से अधिक हो या या विदेश से प्राप्त होने वाली धनराशि विदेशी चंदा (विनियमन) कानून के तहत 10 लाख रुपए से अधिक हो या फिर केंद्र सरकार द्वारा तय की गई सीमा के अधिक हो| लोकायुक्त के अधिकार लोकायुक्त के पास किसी मामले में जांच एजेंसी के निरीक्षण करने और उसे निर्देश देने का अधिकार है| अगर लोकायुक्त को लगता है कि कोई दस्तावेज़ काम को हो सकता है या किसी जांच से संबंधित हो सकता है तो वह किसी भी जांच एजेंसी को आदेश दे सकता है कि वह उस स्थान की तलाशी ले और उस दस्तावेज़ को ज़ब्त कर ले| आगे क्या? लोकपाल के कार्यभार संभालने के बाद, आठ सदस्यों को खोजने और चुनने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है।
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लोकपाल उच्च सरकारी पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनने एवं उस पर कार्यवाही करने के निमित्त पद है।भारत में जनवरी 2011 में, सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सुझाव देने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया, जिसमें अन्ना हजारे द्वारा दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के बाद लोकपाल विधेयक के प्रस्ताव की जांच भी शामिल थी। जुलाई 2011 में, केंद्रीय कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी, और दोनों सदनों ने दिसंबर 2013 में इसे पूरा किया।
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The Policy Times