पीएम मोदी ने एशिया के दुसरे सबसे बड़े रेलमार्ग का उद्घाटन किया, जानिए क्या है इसकी खासियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डिब्रूगढ़ में मंगलवार को भारत के सबसे लंबे रेलमार्ग पुल बोगीबील पुल का उद्घाटन किया| इसकी आधारशिला रखे जाने के 21 साल बाद इस पुल का उद्घाटन किया गया| ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर बनाया गया यह पुल असम के धीमाजी जिले को डिब्रूगढ़ से जोड़ता है| इस पुल का सैन्य महत्व भी है क्योंकि इसके बन जाने से अरुणाचल प्रदेश से चीन की सीमा तक सड़क एवं रेल से पहुंचना एवं रसद भेजना आसान हो जाएगा|

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डिब्रूगढ़ में मंगलवार को भारत के सबसे लंबे रेलमार्ग पुल बोगीबील पुल का उद्घाटन किया| इसकी आधारशिला रखे जाने के 21 साल बाद इस पुल का उद्घाटन किया गया| ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर बनाया गया यह पुल असम के धीमाजी जिले को डिब्रूगढ़ से जोड़ता है| इस पुल का सैन्य महत्व भी है क्योंकि इसके बन जाने से अरुणाचल प्रदेश से चीन की सीमा तक सड़क एवं रेल से पहुंचना एवं रसद भेजना आसान हो जाएगा|

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4.90 किलोमीटर लंबे बोगीबील पुल की अनुमानित लागत 59 हज़ार करोड़ रुपए है| इस पुल का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक से किया गया है| इसके बन जाने से ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी और उत्तरी किनारों पर मौजूद रेलवे लाइनें आपस में जुड़ जाएंगी| पुल के साथ ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी किनारे पर मौजूद धमाल गांव और तंगनी रेलवे स्टेशन भी तैयार हो चुके हैं| इस पुल के बनने से डिब्रूगढ़ और अरुणाचल प्रदेश के बीच रेल की 500 किलोमीटर की दूरी घटकर 400 किलोमीटर रह जाएगी| जबकि ईटानगर के लिए रोड की दूरी 150 किमी घटेगी| इस पुल के साथ कई संपर्क सड़कों तथा लिंक लाइनों का निर्माण भी किया गया है| इनमें ब्रह्मापुत्र के उत्तरी तट पर ट्रांस अरुणाचल हाईवे तथा मुख्य नदी और इसकी सहायक नदियों जैसे दिबांग, लोहित, सुबनसिरी और कामेंग पर नई सड़कों तथा रेल लिंक का निर्माण भी शामिल है|

बोगीबील एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है| पुल का जीवनकाल 120 साल बताया गया है| पुल को बनाने में 30 लाख सीमेंट की बोरियों का इस्तेमाल किया गया| इतनी सीमेंट से 41 ओलिंपिक स्वीमिंग पूल बनाए जा सकते हैं| वहीं, पुल को बनाने में 12 हजार 250 मीटर लोहे (माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई से दोगुने) का इस्तेमाल किया गया|

इस पुल को मंजूरी 1997 में तत्कालीन एचडी देवेगौड़ा सरकार ने दी थी लेकिन इसका निर्माण अप्रैल 2002 में शुरू हो पाया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रेल मंत्री नीतीश कुमार के साथ इसका शिलान्यास किया था|

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उद्घाटन किए जाने के बाद बोगीबील ब्रिज से पहली गाड़ी तिनसुकिया-नाहरलगुन इंटरसिटी एक्सप्रेस गुजरी| 14 कोच की यह ट्रेन साढ़े पांच घंटे में अपना सफर पूरा करेगी| इससे असम के धीमाजी, लखीमपुर के अलावा अरुणाचल के लोगों को भी फायदा होगा| भविष्य में एक राजधानी एक्सप्रेस बोगीबील से धीमाजी होते हुए दिल्ली के लिए चलाई जा सकती है|

नई तकनीक का इस्तेमाल

  • पुल के निर्माण में 80 हजार टन स्टील प्लेटों का इस्तेमाल हुआ|
  • देश का पहला फुल्ली वेल्डेड पुल जिसमें यूरोपियन मानकों का पालन हुआ है|
  • हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन ने मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग, ड्राई पेनिट्रेशन टेस्टिंग तथा अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग जैसी आधुनिकतम तकनीकों का इस्तेमाल किया|
  • बीम बनाने के लिए इटली से विशेष मशीन मंगाई गई|
  • बीम को पिलर पर चढ़ाने के लिए 1000 टन के हाइड्रॉलिक और स्ट्रैंड जैक का इस्तेमाल किया गया|
  • पुल के 120 साल चलने की आशा है|
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PM Modi inaugurated Asia's second largest railroad, know what is its specialty
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को डिब्रूगढ़ में मंगलवार को भारत के सबसे लंबे रेलमार्ग पुल बोगीबील पुल का उद्घाटन किया| इसकी आधारशिला रखे जाने के 21 साल बाद इस पुल का उद्घाटन किया गया| ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर बनाया गया यह पुल असम के धीमाजी जिले को डिब्रूगढ़ से जोड़ता है| इस पुल का सैन्य महत्व भी है क्योंकि इसके बन जाने से अरुणाचल प्रदेश से चीन की सीमा तक सड़क एवं रेल से पहुंचना एवं रसद भेजना आसान हो जाएगा|
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