राजस्थान चुनाव: दलितों के समर्थन के बिना भाजपा के लिए जीत मुश्किल

राजस्थान में तीन दिन बाद चुनाव होने है| ऐसे में अनुसूचित जाति और जनजाति का मत राजनितिक दलों के लिए मायने रखता है क्यूंकि राज्य की कूल आबादी में तक़रीबन एक तिहाई मत इसी समाज का है और इस वर्ग की 59 सीटों पर जीत-हार सरकार बनाने में निर्णायक हो सकती है| भाजपा जहाँ राजस्थान में अपने प्रचार की कई रैलियां कीं वहीँ, कांग्रेस का मानना है कि भाजपा दलितों के समर्थन के बगैर जीत हासिल नहीं कर सकती|

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Ahmedabad: Dalit community people attend a Mahasammelan in Ahmedabad on Sunday in the wake of the recent Una incident. PTI Photo (PTI7_31_2016_000133B)

राजस्थान में तीन दिन बाद चुनाव होने है| ऐसे में अनुसूचित जाति और जनजाति का मत राजनितिक दलों के लिए मायने रखता है क्यूंकि राज्य की कूल आबादी में तक़रीबन एक तिहाई मत इसी समाज का है और इस वर्ग की 59 सीटों पर जीत-हार सरकार बनाने में निर्णायक हो सकती है| भाजपा जहाँ राजस्थान में अपने प्रचार की कई रैलियां कीं वहीँ, कांग्रेस का मानना है कि भाजपा दलितों के समर्थन के बगैर जीत हासिल नहीं कर सकती|

राजस्थान में करीब डेढ़ माह तक चले चुनाव अभियान में राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के भाषणों के कुछ शब्द इस तरह लोगों को याद हो गए कि वे पहले ही भांप लेते है कि अब क्या बोला जाने वाला है| राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेता अपने भाषणों में एक ही बात दोहराते है तो लोगों को याद होना स्वाभाविक है| सोशल मीडिया पर भी ये सब बातें रिपीट होती है इसलिए नेताओं की कही बातें लोगों के जहन में बस जाती है| भाजपा हो या कांग्रेस या फिर कोई अन्य दलों के नेता पिछले दो माह से एक जैसी बातें ही अपने भाषणों में बोल रहे है|

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देश में कुछ महीनों के घटनाक्रम की वजह से बीजेपी के प्रति दलितों में नाराजगी बढ़ी है| लोकनीति और सीएसडीसी के सर्वे की मानें तो मई 2017 में बीजेपी के लिए दलितों का समर्थन 33 प्रतिशत था और मई 2018 में यह 22 प्रतिशत पहुंच गया| वहीं, कांग्रेस के प्रति दलितों के समर्थन में 20 से 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है|

अनुमान लगाया जा रहा है कि दलितों के हितों की रक्षा करने में फेल साबित हुई बीजेपी के लिए उनके बगैर 2019 की राह भी आसान नहीं होगी| 2014 के चुनाव में बीजेपी को 2009 के चुनाव के मुकाबले दोगुना समर्थन मिला था|

बता दें कि देश की कुल आबादी की 16.6 प्रतिशत जनसंख्या दलित समुदाय से ताल्लुक रखती है वहीं चौंकाने वाली बात यह है कि दलितों के खिलाफ जितने मामले दर्ज हुए हैं उनमें 25 प्रतिशत मामले इन तीनों राज्यों से ही हैं| एससी/एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट में परिवर्तन के फैसले के बाद मार्च 2018 में दलित आंदोलनों का सबसे ज्यादा असर राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही देखने को मिला था|

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भाजपा के लिए चुनाव चुनौतीपूर्ण

राजस्थान आदिवासी अधिकार मंच के संयोजक 45 साल के धर्मचंद खैर कहते हैं कि इस बार आदिवासी इलाकों में वसुंधरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी है| खैर कहते हैं कि मनरेगा में मुश्किल आ रही है| मुख्यमंत्री ने इसमें पीओएस मशीनें लागू की हैं जबकि तमाम ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता|

लोगों को अपने पेंशन का दावा करने और जन वितरण प्रणाली से राशन लेने में परेशानी आ रही है| अभी भी अच्छी सड़कें और बिजली आदि को लेकर समस्याएं हैं| भाजपा सरकार में सिर्फ 6000 लोगों को जमीन का पट्टा मिला है| वहीं, कांग्रेस राज में 2009 से 2012 के बीच 32,000 को पट्टा मिला था|

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अलवर क्षेत्र में दलित नेता सूरज कर्दम कहते हैं अनुसूचित जाति के मतदाताओं में भाजपा सरकार से नाराजगी है| छात्रों को कई साल से छात्रवृति नहीं मिली है| वहीं, दो अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के दौरान 2500 से ज्यादा लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था, इससे भी नाराजगी है|

भाजपा आदिवासी नेता किरोड़ी लाल मीणा की वापसी से उत्साहित है| मीणा 2008 में वसुंधरा से मतभेद के बाद पार्टी से अलग हो गए थे| वहीँ, कांग्रेस ने इस बार रघुबीर सिंह मीणा को अपने शीर्ष निर्णायक मंडल में जगह दी है| पार्टी को उम्मीद है कि रघुबीर आदिवासी वोटों को कांग्रेस के पाले में लाने में सफल रहेंगे|

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Rajasthan elections: Without support of Dalits, victory for BJP is difficult
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Rajasthan elections: Without support of Dalits, victory for BJP is difficult
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राजस्थान में तीन दिन बाद चुनाव होने है| ऐसे में अनुसूचित जाति और जनजाति का मत राजनितिक दलों के लिए मायने रखता है क्यूंकि राज्य की कूल आबादी में तक़रीबन एक तिहाई मत इसी समाज का है और इस वर्ग की 59 सीटों पर जीत-हार सरकार बनाने में निर्णायक हो सकती है| भाजपा जहाँ राजस्थान में अपने प्रचार की कई रैलियां कीं वहीँ, कांग्रेस का मानना है कि भाजपा दलितों के समर्थन के बगैर जीत हासिल नहीं कर सकती|
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