राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू

देश का सबसे गर्म और सियासी मुद्दा राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार यानी आज से सुनवाई शुरू करेगी|

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Ram Janmabhoomi-Babri Masjid controversy starts hearing in Supreme Court

देश का सबसे गर्म और सियासी मुद्दा राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार यानी आज से सुनवाई शुरू करेगी| रंजन गोगोई के चीफ जस्टिस बनने के बाद इस मामले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय बेंच का गठन किया गया है| रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस कौल और केएम जोसेफ शामिल हैं| बता दें इस मामले की सुनवाई पहले दीपक मिश्रा की बेंच कर रही थी|

सुप्रीम कोर्ट अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज से सुनवाई की शुरुआत करने जा रहा है।

हाईकोर्ट की 3 जजों की बेंच ने 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए।

सोमवार को पीठ भविष्य में होने वाली सुनवाई की रूपरेखा तैयार करेगी। पक्षकारों के एक वकील विष्णु जैन की मानें तो पीठ मामले में उचित पीठ का गठन भी कर सकती है।

मालुम हो यह मामला साल 2010 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन भूमि विवाद के मसले पर अब तक सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। सुनवाई की शुरुआत में ही मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 1994 में इस्माइल फारूखी मामले में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी से प्रभावित है जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है।

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राम के जन्म स्थान को कभी बदला नहीं जा सकता: आरएसएस नेता

इस मामले में आरएसएस नेता ने कहा कि सच कभी बदला नहीं जा सकता| वरिष्ठ आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने सोमवार को इस पर बयान दिया कि जिस तरह काबा, हरमंदिर साहब और वेटिकन के रूप में स्थापित है, राम के जन्मस्थान को भी उसी रूप में स्थापित किया जाएगा| वहीँ, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शशि थरूर द्वारा हाल ही में दिए बयान जिसमे उन्होंने कहा था कि राम मंदिर को अयोध्या में नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि उस जगह मस्जिद मौजूद थी। इसके जवाब में प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि शायद थरूर भूल गए हैं कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे और मंदिर को ध्वस्त करने के बाद वहां बाबरी मस्जिद बनाई गई थी| इसके बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि विपक्षी दल भी अयोध्या राम मंदिर का विरोध नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पता है कि यह अधिकांश भारतीयों की आस्था का सवाल है|

इस जटिल विवाद में कब क्या हुआ?

1949- बाबरी मस्जिद के भीतर भगवान राम की मूर्तियां रात के अँधेरे में रखी गयी थी जिसके बाद सरकार ने उस स्थाल को विवादित घोषित कर दिया। उस परिसर के भीतर जाने वाले द्वार बंद कर दिए गए।

1950- फैजाबाद अदालत में याचिका दायर कर हिन्दुेओं को मस्जिद के भीतर पूजा करने की अनुमति देने की मांग की गई। हिन्दुओं को मस्जिद परिसर के भीतर पूजा करने की अनुमति दी गई और भीतरी प्रांगण को बंद कर दिया गया।

1959 – निर्मोही अखाड़ा ने एक मामला दायर कर मस्जिद पर नियंत्रण की मांग की।

1961 – सुन्नीप वक्फन बोर्ड ने याचिका दायर मूर्तियों को मस्जिद से हटाने की मांग की।

1984 – विश्वी हिन्दूे परिषद (VHP) ने बाबरी मस्जिद तक हिन्दुनओं की पहुंच सुनिश्चि त करने के उद्देश्यव से जनसमर्थन जुटाने के लिए अभियान शुरू किया।

1986 – फैजाबाद की अदालत ने मस्जिद के द्वार खोलने के आदेश दिए, ताकि हिन्दू पूजा-अर्चना कर सकें। उसी साल मामले के निपटारे के लिए बाबरी मस्जिद एक्शदन कमेटी का गठन हुआ।

1989 – प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने विहिप को विवादित स्थलल के करीब भूमि पूजन की अनुमति दी।

1990 – वरिष्ठम बीजेपी नेता लालकृष्णक आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली। वे अयोध्या की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन बिहार के समस्ती पुर में तत्काीलीन मुख्यिमंत्री लालू प्रसाद की सरकार ने उन्हेंट रोक दिया और गिरफ्तार कर लिया।

1992 – बीजेपी, विहिप और आरएसएस के कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया और वहां एक अस्थाीई मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद देशभर में दंगे हुए, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान चली गई। तत्काशलीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हाव राव के नेतृत्वे वाली कांग्रेस सरकार ने न्या यमूर्ति एम एस लिब्रहान की अध्यमक्षता में एक आयोग का गठन किया।

2003 – इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व  सर्वेक्षण (ASI) को विवादित स्थअल की खुदाई करने को कहा। ASI ने रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि मस्जिद के नीचे 10वीं सदी के मंदिर होने के संकेत मिले हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड ने कहा कि वह ASI की रिपोर्ट को चुनौती देगा।

2010 – इलाहाबाद उच्चप न्यातयालय ने विवादित स्थमल को तीन भागों में बांटने का आदेश दिया। जमीन का एक हिस्साा सुन्नी  वक्फा बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा राम लला, जिसका प्रतिनिधित्व‍ हिन्दू‍ महासभा ने किया, को देने का निर्देश दिया गया।

2016 – सर्वोच्च‍ न्या्यालय ने सुब्रमण्योम स्वायमी को लंबित मामलों में दखल की अनुमति दी। उन्हों ने विवादित स्थ ल पर मंदिर निर्माण और दूसरी तरफ सरयू नदी के किनारे मस्जिद बनाने का प्रस्तााव रखा।।

2017 – सर्वोच्चा न्या्यालय ने सभी पक्षकारों से आपसी बातचीत के जरिये और सौहार्दपूर्ण तरीके से इस मामले के निपटारे पर जोर दिया।

विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले की सुनवाई 60 दिनों तक चल सकती है जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज किसी फैसले तक पहुंचेंगे|

 

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