रिपोर्ट: विश्व की शीर्ष महानगरीय अर्थव्यवस्थाओं में दिल्ली 6वें स्थान पर

ग्लोबल मेट्रो मॉनिटर के 2018 की रिपोर्ट में बताया गया कि उच्च जीवन स्तर के साथ दिल्ली दुनिया में छठी सबसे अच्छी प्रदर्शन करने वाली महानगरीय अर्थव्यवस्था है। आर्थिक प्रदर्शन सूचकांक के शीर्ष 10 सबसे बड़े मेट्रो क्षेत्रों में से पांच मेट्रोपॉलिटन शहर चीन के हैं।

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Report Delhi ranked 6th in the top metropolitan economies of the world
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हाल ही में पेश हुई ग्लोबल मेट्रो मॉनिटर के 2018 की रिपोर्ट में बताया गया कि उच्च जीवन स्तर के साथ दिल्ली दुनिया में छठी सबसे अच्छी प्रदर्शन करने वाली महानगरीय अर्थव्यवस्था है। आर्थिक प्रदर्शन सूचकांक के शीर्ष 10 सबसे बड़े मेट्रो क्षेत्रों में से पांच मेट्रोपॉलिटन शहर चीन के हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक 2014 और 2016 के बीच, 300 सबसे बड़े मेट्रो शहरों में वैश्विक रोजगार वृद्धि का 36 प्रतिशत और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का 67 प्रतिशत हिस्सा है, जिसका दर प्रत्येक सूचक साल 2016 के शेयर से अधिक है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उभरती हुई अर्थव्यवस्था भारत में मेट्रो क्षेत्रों में हुई वृद्धि से हुई है| साथ ही दिल्ली, जिसकी जनसंख्या 1.8 करोड़ है, जो आर्थिक क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही है, बावजूद इसके मेट्रो शहरों में बेहतर जीवन की गुणवत्ता जैसे कई अन्य मानकों में कमी है।

मेट्रो शहरों में प्रदुषण सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से भारत की राजधानी दिल्ली छठे स्थान पर है।

अगर भारत के सन्दर्भ में देखें तो मुम्बई के बाद दिल्ली दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो शहर है| आज दिल्ली शहर में सबसे ज्यादा लोग प्रवास कर रहें है| भले ही राजधानी का नाम महानगरीय शहरों के आर्थिक प्रदर्शन में बेहतर हो परन्तु यह महानगर आज भी वायु प्रदुषण के घने कम्बल से निकल नहीं पाया है| यह समस्या दिल्ली के लिए आज भी बड़ी चुनौती है|

मेट्रो शहरों की उभरती चुनौतियां

आज शहर तेजी से बढ़ रहें है| वर्तमान में दुनिया की आधी आबादी शहरी इलाकों में रहती है| ‘संयुक्त राष्ट्र’ का अनुमान है कि वैश्विक शहरीकरण दर 2030 तक 60% तक पहुंच जाएगी और 2050 तक 70% तक पहुंच जाएगी।

शहर न केवल देश के आर्थिक प्रदर्शन के लिए माएने रखता है बल्कि यह लोगों के जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाओं का एक महत्वपूर्ण घटक भी है|

आज के दौर में महानगर नए लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है| इस बात पर कोई शक नहीं कि शहरी क्षेत्र लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में बेहतर और अधिक सेवाएं प्रदान करतें हैं। उनके पास आमतौर पर बेहतर यातायात व्यवस्था और अधिक विविध उपभोग के अवसर होते हैं। इसके साथ ही अधिकांश शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक सांस्कृतिक विविधता और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध होतीं है|

केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश के सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में शहरी इलाकों का योगदान करीब 60 फीसदी है| शहरी केंद्र अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर, लोगों का जीवन स्तर उठाकर और बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखतें हैं| पिछले दो दशक के दौरान देश के आर्थिक प्रगति में मुंबई तथा दिल्ली जैसे महानगरों के विकास का महत्वपूर्ण योगदान है जिससे शहरी केन्द्रों के महत्व को समझा जा सकता है|

ताजा अनुमानों के मुताबिक भारत में शहरी आबादी देश की कुल जनसंख्या का करीब 31 प्रतिशत है| अनुमान है कि 2030 तक भारत में शहरी आबादी देश की कुल आबादी की करीब 41 फीसदी हो जाएगी| संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग का आकलन है कि अगले 40 साल में भारत की शहरी आबादी में 49.7 करोड़ की वृद्धि होगी|’’

हम जानते हैं कि लोग बेहतर आर्थिक और सामाजिक मौकों की तलाश में महानगरों में प्रवास करते है| इससे नगरों के आसपास शहरी बस्तियों का विस्तार होता है|

यदि देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात की जाए तो यह क्षेत्र पहले ही काफी चुनौतियों से भरा है| तेज शहरीकरण का एक नतीजा यह भी है कि देश को अगले दो दशकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में भारी खर्च करने की जरूरत पड़ेगी| आज भी मेट्रो शहरों में बुनियादी जरूरतों, ट्रैफिक, नागरिक सुविधाओं का अभाव और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए संसाधनों की कमी है|

महानगर जिस रफ़्तार से आर्थिक प्रगति की नई सीढ़ी चढ़ रहा है, वहीँ दूसरी ओर शहरों में गंदगी भी उसी रफ़्तार से बढ़ रही है| शहरों में साफ -सफाई की सुविधाओं का भी अभाव है| दिल्ली में भी यही हाल है| वहां 22 फीसदी लोगों के घरों में शौचालय की सुविधा नहीं है| वे आज भी या तो शौच के लिए खुले में जाते हैं या सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल करते हैं|

इससे यह कहा जा सकता है कि देशभर के मेट्रो शहरों की बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थाओं में अंतर है| इससे प्रगति बनाम जीवन स्तर पर कई सवाल खड़े होते है|

महानगरों की चुनौतियों में से एक जनसंख्या घनत्व का बढऩा भी एक बड़ी चुनौती है| महानगरों में बढ़ती आबादी, जमीन पर दबाव बढ़ा रही है| दिल्ली में जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किमी 11,297 व्यक्ति है| वर्ष 2001-2011 पर आधारित जनसंख्या घनत्व के अनुमान से पता चलता है कि यदि जनसँख्या का यही दर रहा तो 2030 तक जनसंख्या घनत्व बढ़कर प्रति वर्ग किमी 15,211 व्यक्ति हो जाएगी| ऐसे में महानगरों की यह चुनौतियां विकराल रूप ले सकती है| दिल्ली की सड़कों में ट्रैफिक जाम और आवास की कमी है| इससे शहरी केंद्रों में समृद्धि घटेगी और बिखराव की प्रक्रिया शुरू होगी| यही हालत देश के बाकी महानगरों की भी हो सकती है|

इसमें शक नहीं कि आज भारत के बड़े नगर में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण और शहरीकरण आकार ले रहें हैं| लेकिन आने वाले समय यदि स्थति में सुधार नहीं हुए, तो शहरों में बेहिसाब बोझ बढऩे से उनमें उत्पादकता, आवाजाही की सुविधाओं और जीवन स्तर में गिरावट आ सकती है| इसलिए निति नियंतक और सरकार को बड़े और छोटे शहरों के विकास से पहले कुछ बेहद अहम सवालों के जवाब ढूंढ लेना जरूरी है|

इसके साथ ही शहरी प्रशासन के लिए यह ज़रूरी है कि वे आर्थिक नीतियों और चुनौतियों को समझते हुए महानगरों और नगरों के विकास कार्य पर ध्यान केन्द्रित करें| साथ ही सरकार को देश में बड़े शहरी केन्द्रों में बोझ घटाने के लिए महानगरों और नगरों के विकास के फलस्वरूप हर स्तर पर ध्यान देने की जरूरत है|

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ग्लोबल मेट्रो मॉनिटर के 2018 की रिपोर्ट में बताया गया कि उच्च जीवन स्तर के साथ दिल्ली दुनिया में छठी सबसे अच्छी प्रदर्शन करने वाली महानगरीय अर्थव्यवस्था है। आर्थिक प्रदर्शन सूचकांक के शीर्ष 10 सबसे बड़े मेट्रो क्षेत्रों में से पांच मेट्रोपॉलिटन शहर चीन के हैं।
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The Policy Times
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