विधानसभा चुनाव के नतीजे आज, कांटे की टक्कर जारी!

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को 2019 लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है| छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बीजेपी को हराकर 15 साल बाद वापसी कर रही है| मध्य प्रदेश और राजस्थान में कड़े मुकाबले के बाद कांग्रेस बीजेपी को सत्ता से बाहर कर सकती है|

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The result of the assembly elections today, the thorn of the ball continues!

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को 2019 लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है| छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बीजेपी को हराकर 15 साल बाद वापसी कर रही है| मध्य प्रदेश और राजस्थान में कड़े मुकाबले के बाद कांग्रेस बीजेपी को सत्ता से बाहर कर सकती है| तेलंगाना में KCR की कुर्सी बरकरार है, वहीं मिजोरम में हार के साथ कांग्रेस पूर्वोत्तर से साफ हो गई है| बहरहाल, बीजेपी को मात देते हुए कांग्रेस तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़) में आगे चल रही है| इसके अलावा तेलंगाना में टीआरएस, जबकि मिजोरम में मिजो नैशनल फ्रंट पूर्ण बहुमत हासिल कर ली है| तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति को बंपर बहुमत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं| मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव अपना चुनाव जीत गए हैं| इसी बीच उनके सहयोगी के तौर पर नजर आ रहे असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि 2019 में देश को केसीआर जैसे नेता की जरूरत है| ओवैसी ने यह भी कहा है कि केसीआर 2019 में गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी सरकार बनाने के लिए कुशल नेतृत्वकर्ता बन सकते हैं|आइये जानते है 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में क्या थे अहम मुद्दे-

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राजस्थान:राजस्थान में 200 में से 199 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुआ| राज्य में किसानों को बिजली, कर्ज, खाद की उपलब्धता और फसल की अच्छी कीमत नहीं मिलना लंबे समय से मुद्दा बना रहा| इसके अलावा युवाओं और किसानो में सरकार के प्रति नाराजगी में भी देखी गई| चुनाव के दरमियान बेरोजगारी बड़ा मुद्दा था| पिछले चुनाव में वसुंधरा की तरफ से 15 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन युवाओं का कहना है कि नई नौकरियां तो दूर सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भी भरने की कोशिश नहीं हुई| दूसरा, किसानो को एमएसपी का न मिलना| राज्य में किसान दो तरह की दिक्कतेन थी, एक तो जिन फसलों का समर्थन मूल्य घोषित है वह उन्हें नहीं मिल पा रहा| दूसरी दिक्कत यह कि तमाम फसलें भी सरकार की नजर-ए-इनायत से दूर हैं| उनके लिए अभी समर्थन मूल्य ही घोषित नहीं हुआ| वहीँ, गोरक्षा के नाम पर भीड़ के हमलों को देखते हुए दुधारू जानवर पाल कर जीविका चलाने वाले किसानों के लिए रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं| तीसरा गरम मुद्दा राजपूत फैक्टर रहा| राजस्थान की हर विधानसभा सीट पर राजपूत अच्छी तादाद रहे| खुद के खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग और आनंदपाल एनकाउंटर के कारण ये वसुंधरा सरकार से नाराज चल रहे थे| चौथा, राष्ट्रीय मुद्दों पर जोर|

बीजेपी की तरफ से राष्ट्रीय मुद्दों को हवा देकर चुनाव को मोदी बनाम राहुल करने का प्रयास किया गया| बीजेपी कांग्रेस सरकारों के 60 साल का हिसाब माँगा| राहुल के गोत्र पर सवाल उठा गया तो कभी राममंदिर निर्माण की बात कही गई|

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छत्तीसगढ़:छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए| इस विधानसभा चुनाव में प्रमुख रूप से 5 बड़े चुनावी मुद्दे थे जो यहाँ 15 साल से काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार गिरने की वजह बनी| चुनावी मुद्दों में मुख्या रूप से किसानों में नाराजगी थी| किसान वर्ग भाजपा सरकार से नाराज रहा| उनका आरोप है कि उन्हें उपज, खासतौर पर धान का सही मूल्य नहीं मिला| दूसरा कारण, युवाओं में रोजगार का संकट| रोजगार की कमी के कारण परिवारों को विस्थापित होना पड़ा| तीसरा, सरकारी दमन के खिलाफ लामबंद| आदिवासियों ने सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने का आरोप लगाया| पत्थलगड़ी आंदोलन और बड़ी संख्या में विस्थापन इसके प्रमाण रहे| चौथा, सरकारी कर्मचारी, पुलिस का आंदोलन| चुनाव से ठीक पहले सरकारी कर्मचारियों और पुलिस का आंदोलन सरकार को भारी पड़ा| पांचवा, सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर| 15 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए कहा जा रहा था कि इस बार एंटीइनकमबेंसी असर दिखाएगी| भाजपा नेता इससे इंकार करते रहे लेकिन आखिर में यही बात सही साबित हुई|

साल 2016 में आई एनसीआरबी की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार मामलों की फ़ाइलों बंद करने में छत्तीसगढ़ देश में सबसे आगे रहा| नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार देश के 29 राज्यों में एंटी करप्शन ब्यूरो तथा विजिलेंस विभाग द्वारा संज्ञेय अपराध के रूप में दर्ज 147 मामलों की जांच नहीं की गई या उनकी जांच बंद कर दी गई| इन 147 मामलों में से अकेले 81 मामले छत्तीसगढ़ के हैं|

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तेलंगाना:तेलंगाना में भी 119 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना हुआ| विधानसभा चुनावों में मोटे तौर पर तीन मुद्दे सबसे प्रभावी रहे| इनमें पहला है तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाने का श्रेय लेने की होड़| ये होड़ सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति और विपक्षी कांग्रेस के बीच अधिक दिखी| वहीं, मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव और उनकी पार्टी टीआरएस अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश में दिखते नज़र आये| दूसरी तरफ केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी टीआरएस के अंदर के परिवारवाद को भी एक चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करती नजर आई थी| परन्तु, इन मुद्दों के बीच तेलंगाना के आम लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाले कुछ मुद्दे खो गए हैं| कहां तो इन मुद्दों को तेलंगाना विधानसभा चुनावों के केंद्र में होना चाहिए था लेकिन तकरीबन हर दल के चुनाव प्रचार अभियान से ये मुद्दे गायब दिखे|

मध्यप्रदेश:मध्यप्रदेश में आज 230 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ| यह चुनाव कई मायनों में अलग रहा| उसका कारण यह भी रहा कि इस बार का चुनाव इतनी खामोशी से हुआ कि शायद नेताओं को भी इस बात का यकीन नहीं रहा होगा| चुनाव प्रचार से लेकर मतदान तक पूरे प्रदेश में राजनीतिक सस्पेंस बना रहा| इतना ही नहीं एग्जिट पोल के नतीजों ने भी वही सस्पेंस बरकरार रखा| हालांकि, कुछ ऐसे मुद्दे जरूर रहे जो चुनाव प्रचार के दौरान छाए रहे| भले ही वे मुद्दे जनता से ना जुड़े रहे हों फिर भी बीजेपी और कांग्रेस के सभी नेताओं ने चुनाव प्रचार में जमकर इन मुद्दों को जनता के सामने रखा| एक ओर जहां बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा तो वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं शिवराज पर और उनकी योजनाओं पर निशाना साधा|

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मंदसौर गोलीकांड’ का मुद्दा गरम रहा| 6 जून 2017 को मंदसौर में हुए किसानों के हिंसक प्रदर्शन में शिवराज सरकार बैकफुट पर आ गई थी| दुसरे चुनावी मुद्दे में किसानों के लिए कर्जमाफी रहा| मंदसौर में राहुल गांधी द्वारा किसानों के लिए कर्ज माफी का ऐलान भी इस चुनावी कैम्पेन का अहम हिस्सा रहा| इस ऐलान के बाद कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर हो गई थी कि बीजेपी सरकार ने कर्ज माफी का ऐलान क्यों नहीं किया| इसके बाद शिवराज सरकार ने अपने घोषणापत्र में किसानों के लिए बोनस का ऐलान किया था| तीसरा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह बयान सियासी तूफान खड़ा करने के लिए काफी था| दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता| चौथा, राहुल द्वारा शिवराज को घोषणा मशीन बोलना| कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक रैली के दौरान कहा कि जैसे क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर रनमशीन हैं वैसे राजनीति में शिवराज सिंह चौहान घोषणामशीन हैं| इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई थी| राहुल गांधी के बयान के बाद प्रदेश के अन्य कांग्रेस नेताओं ने शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसे| पांचवां, मंदसौर की पहली रैली से ही राहुल गांधी ने अपने चुनावी प्रचार में मेड इन मध्य प्रदेश और मेड इन मंदसौर जैसी बातें बोलकर जनता से कनेक्ट होने की कोशिश की| छठा, यूं तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया था लेकिन यह मुद्दा भी छाया रहा| वहीँ, सातवाँ, कमलनाथ के वायरल वीडियोज़ ने भी खूब धूम मचाई थी|

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मिजोरम:मिजोरम में 40 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुआ| इस विधानसभा चुनाव में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की जीत पर किसी को हैरानी नहीं है क्योंकि ज्यादातर एग्जिट पोल के मुताबिक भी इस पार्टी को सत्ताधारी कांग्रेस पर बढ़त मिल रही थी| मिजोरम को 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था और इसी साल हुए पहले विधानसभा चुनाव में एमएनएफ ने ही सरकार बनाई थी| चूंकि अभी तक मिजोरम की जनता ने किसी भी पार्टी को तीसरा कार्यकाल नहीं दिया है, इस वजह से भी मुख्यमंत्री ललथनहॉला के नेतृत्व वाली सरकार की वापसी मुश्किल लग रही थी| हालांकि, यहां दो मुद्दे ऐसे भी थे जिनके चलते सत्ता में कांग्रेस की वापसी की राह और मुश्किल हो गई|

करीब 87 प्रतिशत ईसाई आबादी वाले मिजोरम पर चर्च और ईसाई धार्मिक संगठनों का बहुत असर है| पूर्वोत्तर में यही एक राज्य है जहां शराबबंदी हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है| यहां 1991 से शराबबंदी थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने 2015 में इसे खत्म कर दिया| एमएनएफ ने चुनाव में इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था|

पार्टी ने इस बार यहां 35 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे|

इसके अलावा यहाँ भाजपा ने यहां चुनाव लड़ने में काफी जोर लगाया था| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के उत्तर-पूर्वी राज्यों के कई नेताओं ने यहां चुनावी रैलियां की थीं|

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