शहरीकरण: समस्या या अवसर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि गरीबी दूर करने का एक अवसर माना जाना चाहिए| शहरीकरण से जहां लोगों को रोजगार मिला और आय बढ़ी, वहीं शहरों में गरीबों और बेघरों की तादाद बढ़ी| गांव से आए गरीब शहर के बेघर हो गए| सरकार की नीतियों का अनियोजित शहरीकरण जिसने सामाजिक असामनता को बढाया| साथ ही गाँव की बदहाली अब शहर की बदहाली बनती जा रही है |

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Urbanization: Problem or Opportunity
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शहरीकरण के मामलें में 7933 शहरों वाला भारत विश्व का दूसरा बड़ा देश है|

ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत की 121 करोड़ की आबादी में से 83.3 करोड़ लोग गांवो में रहतें है वहीँ, 37.7 करोड़ लोग शहरों में निवास करते है|

रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी 72.19 प्रतिशत से घटकर 68.84 फीसद हो गया है, जबकि नगरीय आबादी का प्रतिशत पिछलें  एक दशक में 27.81 फीसद से बढ़कर 31.16 फीसद हो गया है|

हर साल क़स्बे नगर बन रहें है और नगर महानगर| देश में एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या 302 हो गई है| वर्ष 1971 में ऐसे शहर मात्र 151 थे। ऐसा ही हाल दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की है जिसकी संख्या गत दो दशकों में दुगनी होकर 16 हो गई है।

शहरीकरण की समस्याएं

प्रदुषण

शहरीकरण की सबसे बड़ी समस्या प्रदुषण है| शहर में प्रदूषित हवाओं से लोगों को सिलोकोसिस और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों हो रही है| भारत में प्रदुषण का स्तर विश्व सेहत संगठन से समझा जा सकता है| वर्ष 2016 में इस रिपोर्ट ने विश्व के 15 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों की लिस्ट पेश की थी जिसमें अकेले भारत के 14 शहरों के नाम शामिल थे| 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली संसार का सबसे प्रदूषित शहर था| 2011 की रिपोर्ट में भी दिल्ली व आगरा प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल थे| 2013, 2014 व 2015 में भी विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के चार से सात शहर शामिल थे |

पर्यावरण संबंधित

यूएनडीपी के मुताबिक 70% भारतीय आबादी बाढ़ के खतरे और 60% भूकंप से प्रभावित है। घनत्व और अतिसंवेदनशीलता के कारण शहरी क्षेत्रों में जोखिम अधिक है। साल 2015 में चेन्नई में आई बाढ़ को भुला नहीं जा सकता| इस बाढ़ से दक्षिण भारत के कई बड़े शहर डूब गए थे| इसके कारण 300 लोग मारे गए थे, 18 लाख से अधिक आबादी का जीवन प्रभावित हुआ था और 20 हज़ार करोड़ से अधिक का नुकसान|

केरल इसका ताजा उदहारण है| केरल में आए बाढ़ ने पिछलें 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है, जिसमें 370 से अधिक लोगों की जाने गई| यह अनियोजित शहरीकरण का ही परिणाम है|

बढ़ते अपराध

शहरों में बढ़ते अपराध राज्य सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है| वर्ष 2015 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक दस लाख की आबादी से अधिक के 53 बड़े शहरों में अपराध बढ़े है| देश की राजधानी दिल्ली में 25 फीसदी अपराध दर्ज हुए| यह संख्या 1.73 लाख है| इसके बाद मुंबई (42,940), बेंगलुरु (35,576), कोलकाता (23,990) तथा हैदराबाद (16,965) का स्थान है| चेन्नई महानगरों में सबसे असुरक्षित है, जहां से 13,422 घटनाएं सामने आई है|

वहीँ सबसे असुरक्षित शहरों की लिस्ट में बिहार का पटना, राजस्थान का जोधपुर और केरल का कोल्लम भी शामिल हैं|  हत्या के मामलों में दिल्ली (464), पटना (232) और बेंगलुरु (188) सबसे असुरक्षित शहरों में हैं|

बढ़ती असामनता

शहर की आबादी का लगभग एक तिहाई गरीबी रेखा से नीचे रहता है। योजना आयोग के अनुमान के अनुसार भारत की जनसंख्या का पांचवा भाग झुग्गी-झोंपड़ी में रहता है। एक सर्वेक्षण के अनुसार बंगलुरू में 10 प्रतिशत, कानपुर में 17 प्रतिशत, मुंबई में 38 प्रतिशत तथा कोलकाता में 42 प्रतिशत लोगों के सामने आवास की कठिन समस्या है।

वर्ष 2010 के संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट आवास के अनुसार शहरों में असमानता दर बढ़ी है| 1995 से 2005 के बीच भारत में शहरी असमानता 34 से 38% तक बढ़ी है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार बंगलुरू में 10 प्रतिशत, कानपुर में 17 प्रतिशत, मुंबई में 38 प्रतिशत तथा कोलकाता में 42 प्रतिशत लोगों के पास आवास की समस्या है। एक तरफ जहाँ लोगों के आलीशान मकान हैं वहीँ दूसरी ओर टूटे-फूटे मकान है।

जिस गति से भारत की जनसंख्या बढ़ रही है,  वर्ष 2020 तक इसके  डेढ़ अरब हो जाने की संभावना है। ऐसी स्थिति में 50 लाख से अधिक लोग बेघर हो सकते है|

शहरी आवास के लिए 3,581.87 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया था। योजना के अंतर्गत 78 लाख नए घरों को बनाने की योजना थी। नौंवी योजना में सभी वर्गों के लिए आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य था। लेकिन ये लक्ष्य पूरे नहीं हुए।

ट्रैफिक जाम

भारत में ऐसा कोई शहर नहीं जहाँ लोग ट्रैफिक की समस्या से परेशान न हो| दिल्ली में यातायात की समस्या का अध्ययन (2004) बताता है कि सड़कों पर पहले ही 44 लाख वाहन हैं जो अगले मास्टर प्लान लागू होने पर 2021 तक लगभग दोगुना हो जाएगा, जबकि सड़क की लंबाई आनुपातिक रूप से नहीं बढ़ी है।

बढती झुग्गी-झोपड़ियां

शहरीकरण के कारण नगरों में झुग्गी-झोपड़ियों का फैलाओं भी बढ़ा है| रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा 76 कस्बों की संख्या है जो झोपड़पट्टी की आबादी में सबसे अधिक है। इसके बाद उत्तर प्रदेश (65), तमिलनाडु (63), महाराष्ट्र (62), पश्चिम बंगाल (51), मध्य प्रदेश (42) और कर्नाटक (35) हैं।

मध्य मुंबई में धारावी झोपड़ियां एशिया की सबसे बड़ी झोपड़ी है। यहां की सड़कें इतनी संकीर्ण हैं कि एक साइकिल भी पास नहीं हो सकती।

पुणे में स्मार्ट सिटी परियोजना का शुभारम्भ करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि गरीबी दूर करने का एक अवसर माना जाना चाहिए| शहरीकरण से जहां लोगों को रोजगार मिला और आय बढ़ी, वहीं शहरों में गरीबों और बेघरों की तादाद बढ़ी| गांव से आए गरीब शहर के बेघर हो गए| सरकार की नीतियों का अनियोजित शहरीकरण जिसने सामाजिक असामनता को बढाया| साथ ही गाँव की बदहाली अब शहर की बदहाली बनती जा रही है |

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था शहरीकरण को समस्या नहीं, बल्कि गरीबी दूर करने का एक अवसर माना जाना चाहिए| शहरीकरण से जहां लोगों को रोजगार मिला और आय बढ़ी, वहीं शहरों में गरीबों और बेघरों की तादाद बढ़ी| गांव से आए गरीब शहर के बेघर हो गए| सरकार की नीतियों का अनियोजित शहरीकरण जिसने सामाजिक असामनता को बढाया| साथ ही गाँव की बदहाली अब शहर की बदहाली बनती जा रही है |
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The Policy Times
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