मज़दूरों की समस्या: सरकार कब सुनेगी उनकी पुकार?

सीवर में सफाई के दौरान लगातार मौतें बढ़ रही है| सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि कितनी भी आपात स्थिति हो, बिना सुरक्षा उपाय, उपकरणों और वस्त्रों के सीवर में जाना अपराध है| कोई मजबूर नहीं कर सकता है| इसके बाद भी ऐसी घटनाएं कम नहीं हुई हैं| मगर सबके आंकड़े अलग अलग हैं|

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सीवर में सफाई के दौरान लगातार मौतें बढ़ रही है| एक अध्ययन से पता चला है की 1992 से ले कर अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई करने वाले कर्मचारियों के होने वाले मौत में केवल 35% मामलों में (एफआईआर) दर्ज की गई थी| किसी ने किसी भी तरह का मुकदमा या अभियोजन पक्ष का नेतृत्व नहीं किया। केवल 31% प्रभावित परिवारों को नकद मुआवजा मिला, जबकि किसी को भी पुनर्वास या वैकल्पिक नौकरियां नहीं मिलीं, जिनके लिए वे कानूनी हकदार हैं। इन मौतों के लिए अब कोई सीधी जवाबदेही कानूनी वयवस्था नहीं बन सकी है|

सफाई वाली मशीन का आना एक बड़ा समाधान होगा लेकिन जाति आधारित मानसिकता के कारण जो लोग आज मशीन से भी यह काम करते हैं उन्हें भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है| लोग आज भी पैसे उनके हाथ में देने की बजाय ज़मीन पर रखकर जाते हैं| हमें इस समस्या का सम्पूर्ण  समाधान के लिए जाति का सफ़ाया अपने दिमाग से करना होगा|

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि कितनी भी आपात स्थिति हो, बिना सुरक्षा उपाय, उपकरणों और वस्त्रों के सीवर में जाना अपराध है| कोई मजबूर नहीं कर सकता है| इसके बाद भी ऐसी घटनाएं कम नहीं हुई हैं| मगर सबके आंकड़े अलग अलग हैं|

सफाई कर्मचारी आंदोलन का कहना है कि सिर्फ दिल्ली में 2016 से 2018 के बीच सीवर में काम करने से 429 लोगों की मौत हुई है| इसी साल अब तक 83 लोगों की सीवर में काम करने से मौत हुई जिनमें से छह ने बीते एक हफ़्ते में ही जान गंवाई| उधर राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग (NCSK) के मुताबिक जनवरी 2017 से अब तक देश भर में 123 सफ़ाई मज़दूरों ने अपनी जान गंवाई है| इसके आंकड़े ज़्यादातर अख़बारों की रिपोर्ट्स के आधार पर हैं|

2017 से अब तक के आंकड़े बताते हैं कि हर पांच दिन में एक सफाई कर्मचारी की मौत होती है| बृहनमुंबई नगरपालिका ने बताया था कि पिछले छह साल में यानी 2009 से 2015 के बीच 1386 सफाई कर्मियों की मौत हो गई है और यह संख्या बढ़ती ही जा रही है|

80 फीसदी सीवर साफ करने वाले रिटायरमेंट एज तक नहीं पहुंच पाते हैं| उन्हें कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं और समय से पहले मर जाते हैं| इसीलिए आप देखते हैं कि एक साथ चार या पांच लोग मार जाते हैं|

केजरीवाल के घर के बाहर सफाई कर्मचारियों का विरोध

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर सफाई कर्मचारियों ने जमकर प्रदर्शन किया| साथ ही अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नारे भी लगाए| जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया| बता दें कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम के सफ़ाई कर्मचारियों की हड़ताल का 23 वां दिन है| वेतन न मिलने के कारण पूर्वी दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे कि इलाके में सफाई का काम नहीं हो पा रहा है| साथ ही फंड की कमी से दूसरे नगर निगमों की स्थिति ठीक नहीं है| सफाई कर्मचारियों की मांग है कि जो सफाई कर्मचारी अनियमित हैं उनकी नौकरी पक्की की जाए, सैलरी नियमित रूप से दी जाए जो कभी मिलती है कभी नहीं मिलती|

देश ने अभी ही दो दिन पहले ही गांधी जयंती मनाई है, जिस पर देशभर में सफाई का अभियान चलाया जा रहा है| लेकिन राजधानी में ही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पूरा शहर कूड़े का ढेर बन गया है| कर्मचारियों ने 12 सितंबर को हड़ताल शुरू की थी|

हालांकि, घर के बाहर सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ”सफ़ाई कर्मचारी मेरे घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं| उन्हें भाजपा ने झूठ बोलकर बरगलाया है| मैं उनसे सीधे बात करने उनके बीच जा रहा हूं| उनको सच बताऊंगा| सारे तथ्य उनके और दिल्ली की जनता के सामने रखूंगा|”

इससे पहले दिल्ली सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि वह अगले दो दिन में स्थानीय निकायों को 500 करोड़ रुपये की राशि जारी करेगी इससे पूर्वी दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उपजे संकट से निपटने में मदद मिलेगी| गौरतलब है कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारी वेतन के नियमित भुगतान और कर्मचारियों के नियमितिकरण को लेकर हड़ताल पर हैं|.

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The Policy Times
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