ऑस्ट्रेलियाई फिल्म निर्माताओं ने ICAN-4 में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा की स्थिति पर चर्चा की

जैसे-जैसे ऑस्ट्रेलिया में भारतीय आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे भारतीय फिल्मों की मांग भी बढ़ रही है।

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Australian filmmakers discuss status of Indian Cinema in Australia at ICAN-4

नोएडा: अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के आठवे दिन की शुरुआत ‘ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा के प्रोडक्शन, रिसेप्शन और डिस्ट्रीब्यूशन’ विषय पर पैनल चर्चा -4 के साथ हुई। सत्र का संचालन डॉ विक्रांत किशोर, स्क्रीन एंड डिज़ाइन विभाग में सीनियर लेक्चरर, स्कूल ऑफ़ कम्युनिकेशन एंड क्रिएटिव आर्ट्स, आर्ट्स एंड एजुकेशन फैकल्टी, डीकिन यूनिवर्सिटी,ऑस्ट्रेलिया द्वारा किया गया। पैनल में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा के फिल्म निर्माण, वितरण और विनियमन सम्बन्धी विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ मौजूद थे, जिनमें सुश्री अचला दातार, प्रमुख, फिल्म वितरण संचालन ज़ी स्टूडियो, ऑस्ट्रेलिया, श्री अनुपम शर्मा, फिल्म निर्माता, ऑस्ट्रेलिया, सुश्री जूली मार्लो, निर्माता, पटकथा संपादक/लेखक, ऑस्ट्रेलिया, श्री कार्तिक मोहनदास, फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन फोरम फिल्म्स, ऑस्ट्रेलिया, श्री प्रीतेश रानिगा, फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन फोरम फिल्म्स, ऑस्ट्रेलिया शामिल थे।

सम्मेलन के संयोजक डॉ अंबरीष सक्सेना ने अपने शुरूआती सम्बोधन में कहा कि यह पैनल डिस्कशन 6 जुलाई को आयोजित एशियाई सेलिब्रिटी पर आधारित थी। फर्क सिर्फ इतना है कि यह पैनल ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा के कारोबार के हर पहलू पर चर्चा kee।

Australian filmmakers discuss status of Indian Cinema in Australia at ICAN-4डॉ विक्रांत किशोर ने अभिनेता दिलीप कुमार को श्रद्धांजलि देकर चर्चा की शुरुआत की। डॉ किशोर ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा के व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं को समझाने के लिए पैनल को आमंत्रित किया।

सुश्री अचला ने यह कहते हुए शुरुआत की कि भारतीय सिनेमा ऑस्ट्रेलिया में तेजी से बढ़ा है। जैसे-जैसे ऑस्ट्रेलिया में भारतीय आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे भारतीय फिल्मों की मांग भी बढ़ रही है। हिंदी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अधिक लोकप्रिय हैं, लेकिन क्षेत्रीय खासकर पंजाबी और तमिल सिनेमा लोगों के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय है।

सुश्री दातार ने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि ऑस्ट्रेलिया के छोटे शहरों और कस्बों में हिंदी और भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा के लिए वितरकों की मांग बढ़ रही है।

Australian filmmakers discuss status of Indian Cinema in Australia at ICAN-4श्री कार्तिक का विचार था कि जो लोग आज फिल्मों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे हैं वे फिल्मों की कहानियों के अलग अलग पहलुओं को भी नियंत्रित कर रहे हैं। उन्होंने सॉफ्ट डिप्लोमेसी की ताकत और इस प्रक्रिया में कंटेंट की भूमिका और प्रासंगिकता के बारे में बताया। वो कहते हैं कि “प्रोडक्शन के नज़रिये से यह स्वर्णिम युग है। समस्या यह है कि हमारे पास बहुत अधिक सामग्री है लेकिन दर्शकों की कल्पना को बांधे रखने वाली वास्तविक सामग्री दुर्लभ है।”

श्री अनुपम ने कहा कि भारतीय फिल्मों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर “आइटम नंबर” के रूप में देखा जाता है। ऑस्ट्रेलियाई बाजार में नियंत्रण बेहद सीमित है। उन्होंने कहा, ‘इसका प्रमाण यह है कि भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई मूल के फिल्म निर्माता भारतीय विषयों पर फिल्में बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बहुत जल्द मेलबर्न से कुछ कुछ होता है फिल्म का प्रोडक्शन भी भविष्य में संभव है।”

प्रीतेश रानिगा ने फिजी से ऑस्ट्रेलिया तक फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में अपनी यात्रा के बारे में बताया। पहले हमने पंजाबी भाषा और पंजाबी संस्कृति की हिंदी फिल्मों पर ध्यान केंद्रित किया। वो बताते हैं कि “बाहुबली ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सिनेमा के वितरण के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई”।

Australian filmmakers discuss status of Indian Cinema in Australia at ICAN-4वो बताते हैं “कोविड के साथ बाजार बदल गया है। कंटेंट का महत्व और अधिक हो गया है । डिस्ट्रीब्यूटर अब लोगों के अनुसार सामग्री पर ध्यान केंद्रित करने लगे हैं।”

सुश्री जूली ने सिनेमा में भारत-ऑस्ट्रेलियाई सहयोग विषय पर विस्तार से बात की। वो बताती हैं कि “भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई फिल्म निर्माताओं को आपसी तालमेल की जरूरत है। यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसमें धैर्य की जरूरत है। ओटीटी प्लेटफार्मों, विशेष रूप से नेटफ्लिक्स और अमेज़ॅन प्राइम की बढ़ती लोकप्रियता की ओर इशारा करते हुए, जूलिया मार्लो ने कहा कि ओटीटी ने सिनेमा में नए क्षेत्रों और विषयों की पहचान करने में मदद की है। केवल नए विचार और अच्छी लिखी स्क्रिप्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रह सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया भारतीय मूल सामग्री के लिए एक बड़ा बाजार है।

सत्र का समापन करते हुए सम्मेलन की सह संयोजक डॉ सुस्मिता बाला ने कहा कि भारतीय सिनेमा में अच्छी सामग्री की कोई कमी नहीं है। इसे बस अंतरराष्ट्रीय दर्शकों द्वारा तलाशे जाने की जरूरत है।
सत्र की सह-मेजबानी श्री सचिन नायर, सहायक प्रोफेसर, मीडिया स्कूल, डीएमई द्वारा की गई और मृणाल रावत, छात्र डीएमई मीडिया स्कूल द्वारा एंकरिंग की गई।

Technical Session VII

ICAN4 के आठवें दिन तकनीकी सत्र 7 का आयोजन किया गया। तकनीकी सत्र का विषय था ‘COVID- 19 महामारी के दौरान फेक न्यूज़ और भेदभावपूर्ण कंटेंट’, जिसकी अध्यक्षता डॉ सिमरन सिद्धू, प्रमुख, पीजी डिपार्टमेंट ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, दोआबा कॉलेज, जालंधर, पंजाब ने की और सुश्री श्रुति वी.एस., सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल ने सह-अध्यक्ष के तौर पर सत्र का संचालन किया। सत्र के दौरान सोशल मीडिया पर COVID-19 के दौरान फेक न्यूज का विस्तार, फेक न्यूज के प्रभाव और उसकी समीक्षा और दुष्प्रचार से संबंधित मुद्दों जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

डॉ अंबरीष सक्सेना ने सत्र की शुरुआत करते हुए कहा, “भेदभावपूर्ण सामग्री और फेक न्यूज हमारे समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक हैं। ICAN 4 में इस विषय पर चर्चा करना अच्छा है।” तकनीकी सत्र के अंत में डॉ सिमरन ने फेक न्यूज़ के अनछुए पहलुओं को सामने लाने में शोधकर्ताओं के प्रयासों की प्रशंसा की और अपने शोधकार्य में सुधार के लिए अपनी राय दी।

श्री ज्योतिर्मय देब, डिपार्टमेंट ऑफ़ हयूमैनिटिज़ एंड सोशल साइंस, टेक्नो इंडिया यूनिवर्सिटी, कोलकाता को “द एफ्फेक्टिवनेस ऑफ़ स्टोरी नैरेटिव इन टेलीविज़न एडवरटाइजिंग विद द रिफरेन्स ऑफ़ साइकोग्राफ़िक्स इन व्यूअर्स ऑफ़ कोलकाता” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुति के लिए तकनीकी सत्र 6 का सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुतकर्ता घोषित किया गया था।

Panel Discussion 5

Australian filmmakers discuss status of Indian Cinema in Australia at ICAN-4ICAN 4 के आठवें दिन का तीसरा सत्र ‘एपिसोडिक स्टोरीटेलिंग एंड शॉर्ट फॉर्मेट डायड: द इंडियन स्पेक्टेटर’ विषय पर पैनल डिस्कशन 5 था। सत्र डॉ गौरी डी. चक्रवर्ती, जॉइंट एक्टिंग हेड और एसोसिएट प्रोफेसर, एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, एमिटी यूनिवर्सिटी, नॉएडा द्वारा संचालित किया गया था। पैनल में NYFA में प्रशिक्षित सिनेमैटोग्राफर श्री हिमांशु दुबे ; सुश्री पियाली दासगुप्ता, नाटककार और निदेशक और संस्थापक, हिजीबिजी कलेक्टिव; श्री मुर्तजा अली खान, प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक और श्री पंकज राकेश, सीनियर फिल्म निर्माता और फिल्म शिक्षक शामिल थे।

सत्र की शुरुआत में, डॉ अंबरीष सक्सेना ने कहा, “सिनेमा और टेलीविजन मनोरंजन के प्रमुख साधन रहे हैं। सिनेमा, डेली सोप और वेब सीरीज में जिस तरह के बदलाव हुए हैं, वे बहुत दिलचस्प हैं और इस विषय में और भी बहुत सी चीजें सीखना बाकी है।”

डॉ. चक्रवर्ती ने कहा, “आज का मनोरंजन पहले से अलग है। कंटेंट सब्सक्रिप्शन मीडिया में नया चलन है। आज लोगों के पास चुनने के लिए कई विकल्प ,मौजूद हैं। कहानी कहने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है और दर्शकों की भागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।”

कहानी कहने की संरचना के बारे में बात करते हुए, श्री पंकज ने कहा, “कहानी बताने का अंदाज़ आज भी प्रासंगिक है। इसमें थ्री एक्ट स्ट्रक्चर और ऐट क्वार्टर स्टोरी स्ट्रक्चर शामिल है।”

सुश्री पियाली ने कहा, “महामारी के बाद की कहानियों ने लोगों के उपभोग के पैटर्न को बदल दिया है। YouTube के आगमन के साथ, जेन जेड और मिलेनियल्स ऐसी कहानियों की तलाश में हैं जो उनके जीवन से मेल खाती हो।”

श्री मुर्तजा ने अपने विचार रखे कि कैसे इन दिनों कहानी बताने का अंदाज़ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, “रे नामक वेब श्रृंखला ने सरल कहानियों को प्रस्तुत करने का नया अंदाज़ प्रस्तुत किया है। इसी तरह तुर्की नाटक एर्टुगरुल ने देश भर में लोकप्रियता हासिल की है।”

श्री हिमांशु ने अपने संबोधन में कहा, “एक कहानी जब सही क्रम में प्रस्तुत की जाती है तो दर्शकों को बांधे रखती है।”

डॉ सुस्मिता बाला ने सत्र का समापन करते हुए इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि सभी के बहुमूल्य विचारों से प्रतिभागी लाभान्वित हुए हैं।

सुश्री सुकृति अरोड़ा, सहायक प्रोफेसर, डीएमई मीडिया स्कूल ने सत्र का संचालन किया और प्रथम वर्ष के छात्रों इशिका वाधवा और योगेश ने सत्र में एंकरिंग की

Workshop 2

ICAN4 के सातवें दिन का अंतिम सत्र सम्मेलन की दूसरी कार्यशाला थी जिसका शीर्षक- ‘पत्रकारिता में उभरती प्रौद्योगिकी: 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी स्टोरीटेलिंग- प्रैक्टिकल एंड एप्रोचेबल’ था। सत्र का आयोजन डॉ आरोन एटकिंस, सहायक प्रोफेसर, वेबर स्टेट यूनिवर्सिटी, ओग्डेन यूटा, यूएसए द्वारा किया गया।

डॉ अंबरीष सक्सेना ने सत्र की शुरुआत करते हुए कहा, “360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी विषय पर आज की कार्यशाला पत्रकारिता से जुड़ी तकनीक को समझने में हमारे छात्रों के लिए बहुत कारगर होगी।”

डॉ एटकिंस ने प्रतिभागियों को 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी स्टोरीटेलिंग सहित पत्रकारिता में व्यापक रूप से उपयोग की जा रही नवीनतम तकनीकों के बारे में बताया ।

डॉ एटकिन्स ने यह भी कहा कि “360 वीआर टेक्नोलॉजी का लक्ष्य युवाओं को जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर शिक्षित करना है।”

डॉ सुस्मिता बाला ने अपनी समापन टिप्पणी में दिलचस्प सत्र के लिए डॉ एटकिंस को धन्यवाद दिया और कहा कि इससे छात्रों को एक नया नजरिया प्राप्त हुआ है।

सत्र में एंकरिंग मीडिया स्कूल, दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन की छात्रा हनी खुराना ने किया और श्री प्रमोद पांडे, सहायक प्रोफेसर, मीडिया स्कूल, दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन ने सत्र का संचालन गया।


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Mohd Kamil
Assistant Professor, DME Media School
Phone: 91-9026058885
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ICAN4 2021


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