बाबरी मस्जिद विध्वंस के 26 साल! शान्ति हासिल करने के लिए न्याय की आवाज़ बुलंद करें

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आज बाबरी मस्जिद विध्वंस को 26 साल गुज़र गए लेकिन इतने लंबे अरसे के बाद भी यह विवाद हल नहीं हो पाया है| आज ही के दिन हज़ारों की संख्या में आरएसएस, विहिप, बजरंग दल और बीजेपी के कारसेवक द्वारा ‘एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो’ के नारे के साथ सोलहवी सदी की इस मस्जिद को ढहा दिया गया था|

1990 के आस पास राम मंदिर आंदोलन का यह सबसे बड़ा परिणाम सामने आया था जिसमें मुख्य रूप से संघ परिवार, विश्व हिन्दू परिषद् (वीएचपी) औए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कुछ नेता शामिल थे| आज इस घटना को इतना लंबा अरसा गुज़र गया, पीढियां गुज़र गई लेकिन आज भी इस विवाद में लोगों की राय बंटी हुई है|

बाबरी मस्जिद विध्वंस की प्रत्यक्ष घटना परन्यूज़ट्रैकद्वारा एक फिल्म बनाई गई थी जिसकी चर्चा उन दिनों खूब हुई थी परन्तु सेंसर बोर्ड ने उस फिल्म पर पाबंदी लगा दी थी| उन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का चलन कम था इसलिएन्यूज़ट्रैककी तत्कालीन निर्मात्री मधु त्रेहन नेहिन्दुस्तान टाइम्सके अंक में इस फिल्म का ज़िक्र खुल कर किया था| 23 नवंबर, 1992 से ही न्यूज़ट्रैक की टीम अयोध्या में मौजूद थी और घटनाक्रम को विस्तार से दिखाया गया| इस टेप में यह दिखाया गया है कि किस प्रकार से हिन्दुत्ववादी नेता भीड़ का समर्थन कर रहे है और मस्जिद गिराकर मंदिर निर्माण की बात कर रहे है| रस्सी, गैतीफावड़ा और बोल्डरों के साथ मस्जिद विध्वंस कीप्रैक्टिसकर रही टीमों को भी कैमरे में शूट किया गयाइस टेप में यह भी साफ़ दिखया गया कि वास्तविक मस्जिद विध्वंस के वक्त किस तरह सुनियोजित ढंग से पत्रकारों को निशाना बनाया गया था| यहां तक कि कारसेवकों ने किस तरह वहांमोर्चा संभालाऔर आम सहभागियों को वहां से खदेड़ा| यह सारे दृश्य कैमरे में कैद है| मालूम हो कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के पीछे की साजिश को उजागर करने के लिए तत्कालीन राव सरकार ने एक आयोग का भी गठन किया था|

अगर चंद पुराने आकड़ों के पन्ने पलटें तो केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहतब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंटने किए अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि वर्ष 1954 से 1996 के दरमियान दंगों की 21,000 घटनाओं में 16,000 से अधिक लोग मारे गए थे जबकि एक लाख से अधिक घायल हुए थे| इनमें से मुट्ठीभर लोगों को ही अपने अपराधों की सज़ा मिल सकी है| (कम्यूनल रायट्स, इंडिया टुडे, जुलाई 21, 2003) क्या अब यह वक्त नहीं गया है कि स्थायी शांति हासिल करने के लिए हम न्याय की मांग को बुलंद करें? क्या वास्तविक न्याय के बिना असली शांति कायम हो सकती है कभी?

कब क्या हुआ?

करीब 2.77 एकड़ की जमीन पर बनी बाबरी मस्जिद के बाहरी परिसर में हिंदू धर्म के लोग पूजा किया करते थे| इस परिसर में सिंह द्वार के सीता रसोई और हनुमत द्वार के राम चबूतरे पर पूजा होती थी| 1855 में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच छिड़े दंगों के बाद यहां एक दीवार बना दी गई| वहीं, महंत रघुबर दास की अपील का उस समय पर बाबरी मस्जिद की देखरेख करने वाले मोहम्मद असगर ने विरोध किया| उनका कहना था मस्जिद के पूर्वी द्वार परअल्लाहलिखा हुआ है| ऐसे में इस स्थल पर किसी और का अधिकार नहीं हो सकता| उनका दावा था कि 1856 तक यहां कोई चबूतरा भी नहीं था|

24 दिसंबर, 1885 में फैजाबाद अदालत ने ये कहते हुए महंत की अपील ठुकरा दी कि अगर मंदिर निर्माण की अनुमति दे दी जाती है तो इससे दंगे भड़क सकते हैं| इसके बाद यहां तब तक कुछ नहीं हुआ जब 1949 में करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी| इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे| मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया| उस समय राज्य सरकार चाहती थी कि मूर्तियां हटा ली जाए लेकिन फैजाबाद जिला प्रशासन ने ऐसा करने से इंकार कर दिया क्योंकि उन्हें डर था कि इससे साप्रदायिक हिंसा पैदा हो सकती है16 जनवरी, 1950 में अयोध्या के निवासी गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजाअर्चना की विशेष इजाजत मांगी| इसके बाद कुछ और पार्टियों द्वारा अपील दायर की गई और मामलों को इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंप दिया गया| 1980 में विश्व हिंदू परिषद ने उस जगह पर भगवान राम का मंदिर बनाने के लिए आंदोलन छेड़ दिया। इसके मद्देनजर राम रथ यात्रा जैसी कई रैलियां उस वक्त निकाली गईं|

6 दिसंबर 1992 को विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी ने विवादित स्थान पर एक रैली आयोजित की जिसमें तकरीबन डेढ़ लाख कारसेवक थे| इस रैली में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे नेता शामिल थे जिन्होंने वहां भाषण दिए, लेकिन रैली अचानक ही हिंसक हो गई और कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढाह दिया, जिसके बाद सांप्रदायिक आग भड़क गई और खूब दंगे हुए| इन दंगों में तकरीबन 2000 लोग मारे गए| इस मामले में 16 दिसंबर को एस.एस. लिब्रहान आयोग का गठन हुआ और जांच बिठाई गई जिसमें 68 लोगों को जिम्मेदार ठहराया गया जिनमें विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी के भी कुछ लोग शामिल थेसर्वोच्च न्यायालय ने साल 2010 में इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया जिसमें विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा गया जिनमे एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटीसाल 2017 सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया| बहरहाल, अक्टूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ तकनीकी कारणों की वजह से राम जन्म भूमिबाबरी मस्जिद भूमि के विवादित मामले की सुनवाई अगले वर्ष जनवरी तक के लिए टाल दी है|

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 26 years of Babri Masjid demolition! To achieve peace, lift the voice of justice
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26 years of Babri Masjid demolition! To achieve peace, lift the voice of justice
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The Policy Times
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