बैंक हड़ताल: 10 लाख कर्मचारी हड़ताल पर, हफ्ते भर में एक ही बार खुल पाए बैंक

पिछले करीब एक हफ्ते में देश की बैंकिंग सेवा काफी प्रभावित रही है| 5 दिनों में से एक बार बैंक खुलने के बाद आज फिर देश के बैंक बंद रहेंगे| कुल नौ बैंक यूनियन ने आज हड़ताल बुलाई है| ऐसे में इस हड़ताल से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना कर पड़ सकता है| बता दें कि 21 से 23 दिसंबर को भी बैंकों ने हड़ताल की थी| उसके बाद 24 दिसंबर को बैंक खुले थे| फिर 25 और 26 को छुट्टी के कारण बैंक बंद रहे थे| देश के करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी आज हड़ताल पर चले गए है|

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Bank strike: 10 lakh employees strike, banks open only once a week

पिछले करीब एक हफ्ते में देश की बैंकिंग सेवा काफी प्रभावित रही है| 5 दिनों में से एक बार बैंक खुलने के बाद आज फिर देश के बैंक बंद रहेंगे| कुल नौ बैंक यूनियन ने आज हड़ताल बुलाई है| ऐसे में इस हड़ताल से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना कर पड़ सकता है| बता दें कि 21 से 23 दिसंबर को भी बैंकों ने हड़ताल की थी| उसके बाद 24 दिसंबर को बैंक खुले थे| फिर 25 और 26 को छुट्टी के कारण बैंक बंद रहे थे| देश के करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी आज हड़ताल पर  चले गए है|

यह हड़ताल विजया बैंक और देना बैंक के बैंक आफ बड़ौदा में प्रस्तावित विलय के खिलाफ बुलाई गई है| सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की यूनियन ने हड़ताल का आह्वान किया है| आपको बता दें कि एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी बैंक हड़ताल है| इससे पहले विलय और वेतन संशोधन पर बातचीत को जल्दी निष्कर्ष पर पहुंचाने को लेकर बीते 21 दिसंबर को भी हड़ताल की थी| हालांकि निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज आम दिनों की तरह सामान्य रहेगा| गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने हड़ताल का आह्वान किया है|

हड़ताल की वजह

सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के मर्जर का फैसला लिया है। कर्मचारी संघ इसका विरोध कर रहे हैं। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने 8% वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। बैंक कर्मचारी संघों को यह मंजूर नहीं। वेतन वृद्धि नवंबर 2017 से बकाया है।

नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स का कहना है कि बैंकों में पब्लिक का भी शेयर है। इसलिए, सरकार कोई फैसला अपने आप नहीं ले सकती। हमारी मांग है कि सभी पक्षों के बातचीत के बाद फैसला होना चाहिए। वेतन बढ़ोतरी के लिए जो तर्क इंडियन बैंक एसोसिएशन दे रहा है वह कर्मचारी संघों को मंजूर नहीं।

कर्मचारी संघों का कहना है कि बैंक लगातार ऑपरेटिव प्रॉफिट कमा कर दे रहे हैं। सरकार की नीतियों की वजह से ज्यादातर ऑपरेटिव प्रॉफिट का हिस्सा एनपीए की प्रोविजनिंग में चला जाता है। इस वजह से बैंक घाटे में आ जाते हैं। बैंक कर्मचारी इसके लिए जिम्मेदार नहीं। फिर उन्हें उचित वेतन वृद्धि से वंचित क्यों किया जा रहा है?

 

एक हफ्ते में दूसरी हरताल कर्मचारियों की यूनियन की एक हफ्ते से भी कम समय में यह दूसरी हड़ताल है। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) से जुड़े कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। शनिवार, रविवार को सार्वजनिक अवकाश रहा। सोमवार को बैंक खुले, लेकिन मंगलवार को फिर क्रिसमस की छुट्टी रही। इस तरह पिछले 5 दिन में बैंकों में सिर्फ 1 दिन काम हुआ।

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पिछले करीब एक हफ्ते में देश की बैंकिंग सेवा काफी प्रभावित रही है| 5 दिनों में से एक बार बैंक खुलने के बाद आज फिर देश के बैंक बंद रहेंगे| कुल नौ बैंक यूनियन ने आज हड़ताल बुलाई है| ऐसे में इस हड़ताल से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना कर पड़ सकता है| बता दें कि 21 से 23 दिसंबर को भी बैंकों ने हड़ताल की थी| उसके बाद 24 दिसंबर को बैंक खुले थे| फिर 25 और 26 को छुट्टी के कारण बैंक बंद रहे थे| देश के करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी आज हड़ताल पर चले गए है|
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THE POLICY TIMES