भारत बंद: विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा कब तक?

केंद्र सरकार द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए संशोधन के विरोध में ‘भारत बंद’ का व्यापक असर देश भर के कई राज्यों में देखने को मिला| स्वर्ण समुदाय द्वारा सड़क में उतरे प्रदर्शनकारियों के ‘भारत बंद’ से आम जन-जीवन अधिक प्रभावित हुआ वहीँ, लोगों को चाय-नास्ता के लिए भी परेशान होना पड़ा|

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Bharat band: Violence in the name of protest
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केंद्र सरकार द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए संशोधन के विरोध में ‘भारत बंद’ का व्यापक असर देश भर के कई राज्यों में देखने को मिला| बीते 6 सितम्बर को स्वर्ण समुदाय द्वारा ‘भारत बंद’ से आम जन-जीवन अधिक प्रभावित हुआ वहीँ, लोगों को चाय-नास्ता के लिए भी परेशान होना पड़ा|

पिछली बार 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विरोध में दलित संगठनो ने ‘भारत बंद’ बुलाया था जिसमें जगह-जगह हिंसा और आगजनी की खौफनाक घटनाएं हुई थी|

‘भारत बंद’ के कारण देश की राजधानी सहित कई राज्यों में इसका दुष्परिणाम देखने को मिला जिसमें आम जनता ही नहीं बल्कि देश के करोड़ो के कारोबार का भी नुकसन हुआ|

स्वर्ण समुदाय द्वारा हुए विरोध से बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में जगह-जगह आम जन-जीवन प्रभावित हुआ। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सड़क, रेल मार्ग रोक दिए गए। कई बड़े बाजार और स्कूल तक बंद रहे।

इन राज्यों में आम जीवन अधिक प्रभावित

  1. मध्य प्रदेश
    बंद के मद्देनजर शहर के अधिकांश स्कूल बंद रहे। आम दिनों के मुकाबले सड़कों पर यातायात में कमी दिखाई दी। मंडियों और बाजारों में आधे दिन कारोबार ठप रहा। इससे करोड़ों रूपए के कारोबार पर असर पड़ा।

अहिल्या चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने बताया कि आधे दिन तक स्थानीय मंडियां और बाजार बंद रखने की अपील को करीब 110 कारोबारी संगठनों ने अपना समर्थन दिया था। उन्होंने बताया, ‘आधे दिन के बंद के दौरान शहर में किराना जिंसों, अनाजों, दाल-दलहनों, जेवरात, बर्तनों, लोहा उत्पादों, कपड़ों आदि के प्रमुख कारोबारी केंद्रों में सन्नाटा पसरा रहा।’

  1. बिहार
    भारत बंद का असर बिहार में भी देखा गया। कई स्थानों पर रेल और सड़क मार्ग पर प्रदर्शनकारियों ने हंगामा किए।

एससी-एसटी एक्ट के संशोधन के विरोध में भारतीय जनता पार्टी और जद (यू) कार्यालय के सामने भी प्रदर्शन किया गया। पटना, गया, भोजपुर, दरभंगा सहित करीब सभी जिलों के विभिन्न इलाकों में सवर्ण समुदाय के लोग सड़क पर उतरे और अधिनियम के विरोध में नारेबाजी की। कई इलाकों में बंद को देखते हुए स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई थी।
कई स्थानों से आगजनी की घटना भी सामने आई। हाजीपुर-लालगंज मार्ग पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह से ठप रहा। सासाराम में बंद समर्थकों ने व्यस्त रहने वाली सड़क जीटी रोड को जाम कर दिया जिससे वाहनों की लंबी कतार लग गई।

  1. उत्तर प्रदेश
    ‘भारत बंद’ के दौरान उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हिंसक घटनाएं हुई| जिसमें 6 पुलिसवाले जख्मी हो गए थे। बाकी ज्यादातर जगह असर सामान्य था। आगरा में दुकानों को बंद रखा गया था, वहां प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम करने की कोशिश भी की थी।
  2. राजस्थान
    राजस्थान में व्यापक असर देखा गया। बंद के समर्थन में बाजार में दुकानें, व्यावसायिक संस्थान, स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थाएं गुरूवार को बंद रही। हालांकि, वहां भी किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं आई। बंद के दौरान जयपुर, करौली, प्रतापगढ़, उदयपुर, पाली, नागौर, और अन्य जिलों में दुकानें और स्कूल बंद रहे।
  3. उत्तराखंड
    उत्तराखंड में मिला-जुला असर देखने को मिला। शहर के कुछ स्थानों पर दूध तथा अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति सामान्य दिनों की तरह नहीं हुई। अल्मोड़ा, पौड़ी जैसे प्रदेश के कुछ स्थानों पर बंद का प्रभाव दिखाई दिया और बाजार आदि बंद रहे।

विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा कब तक ?

इन सब के बीच बड़ा सवाल यह उठता है कि देश में विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा कब तक होती रहेगी?

पिछले 2 अप्रैल को हुए ‘भारत बंद’ में इससे बड़ी हिंसा देखी गई थी जिसमें सबसे अधिक नुकसान आम लोगों का हुआ|

दलित संगठनो द्वारा प्रदर्शन में भी हिंसा की खौफनाक तस्वीर देखी गई थी जहां, एंबुलेंस का रास्ता रोका गया जिसके कारण एक मासूम की जान चली गई।

यूपी के बिजनौर में एंबुलेंस का रास्ता रोके जाने पर एक बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। मेरठ में किडनी की बीमारी से पीड़ित महिला मरीज भी इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच सकीं। भारत बंद के नाम पर हर जगह भीड़ की गुंडागर्दी दिखी|

बिहार के मुजफ्फरपुर में प्रदर्शनकारियों ने एक ऑटो पर लाठी-डंडों से हमला किया जिसमें एक बच्चा बुरी तरह घायल हो गया था| वहीँ, उत्तराखंड के रूड़की में बंद के दौरान हुई फायरिंग में गोली लगने से एक बच्चा घायल हो गया था|

भारत बंद के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को उठाना पड़ा था| कई शहरों में ट्रेनों पर पत्थरबाजी की गई| पटरियां उखाड़ दी गई|

सवाल यह भी है कि जिन लोगों की जिंदगियां खत्म हो गई उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? भारत बंद के दौरान हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ जगह-जगह केस दर्ज होते है लेकिन उन्हें कानून की ओर से कोई कड़ी सजा नहीं सुनाई जाती, क्यों?

देश की न्यायपालिका जब तक निष्पक्ष और मज़बूत नहीं होगी तब तक हिंसा की घटनाएं देश भर में होती रहेंगी|

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केंद्र सरकार द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए संशोधन के विरोध में ‘भारत बंद’ का व्यापक असर देश भर के कई राज्यों में देखने को मिला| स्वर्ण समुदाय द्वारा सड़क में उतरे प्रदर्शनकारियों के ‘भारत बंद’ से आम जन-जीवन अधिक प्रभावित हुआ वहीँ, लोगों को चाय-नास्ता के लिए भी परेशान होना पड़ा|
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The Policy Times
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