सबरीमाला मुद्दे पर अमित शाह का विवादित बयान

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वह सबरीमाला मुद्दे के साथ खिलवाड़ न करें। साथ ही उन्हें चेताया कि अगर वह आस्था के मुद्दे को छेड़ने की कोशिश करेंगे तो फिर भाजपा केरल सरकार को उखाड़ फेंकने में संकोच नहीं करेगी।

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controversial speech of amit shah on sabarimala case
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वह सबरीमाला मुद्दे के साथ खिलवाड़ न करें। साथ ही उन्हें चेताया कि अगर वह आस्था के मुद्दे को छेड़ने की कोशिश करेंगे तो फिर भाजपा केरल सरकार को उखाड़ फेंकने में संकोच नहीं करेगी। सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाज़त  दिए जाने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी आलोचना करते हुए कहा कि अदालत को ऐसे फैसले नहीं देने चाहिए जो लोगों की धार्मिक आस्था के खिलाफ हों और जिन्हें लागू न किया जा सके।

यह सलाह सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले के संदर्भ में दी गई है, जिसमें स्वामी अयप्पा के सबरीमला मंदिर में 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई है| अमित शाह ने यह बयान केरल के कन्नूर में ज़िला बीजेपी कार्यालय के उद्घाटन के मौक़े पर आयोजित सार्वजनिक सभा के दौरान दिया|

अमित शाह ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से जोश भरे अंदाज़ में कहा, ”अदालतें इस तरह के फ़ैसले ना दें जो व्यवहारिक ना हों| आख़िरकार आप पांच करोड़ भक्तों के विश्वास को कैसे तोड़ सकते हैं? हिंदू कभी महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं करते| सभी त्योहारों में, पत्नियां अपने पति के साथ बैठकर त्योहार मनाती हैं|

इससे पूर्व, कन्नूर की एक जनसभा में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों जैसे जल्लीकट्टू, मस्जिदों में लाउडस्पीकरों पर प्रतिबंध और दही-हांडी में दखलंदाजी आदि का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के बहाने राज्य की वामपंथी सरकार हिंदुत्व के कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढा रही है।

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केरल के मुख्यमंत्री ने किया पलटवार

वहीं, केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने तिरुवनंतपुरम में शनिवार को ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट, संविधान और देश की न्यायिक प्रणाली पर हमला है। शाह का कहना है कि कोर्ट को केवल वही आदेश देना चाहिए जो लागू हो सके। इससे लगता है कि संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों को लागू नहीं किया जाना चहिए। उन्होंने कहा, ”अमित शाह का यह कहना कि अदालतों को सिर्फ़ वही फै़सले सुनाने चाहिए जो व्यवहारिक हों, यह संदेश देता है कि भारतीय संविधान में जो मूल अधिकारों की बात कही गई है उसका पालन नहीं होता| अमित शाह का यह बयान आरएसएस और संघ परिवार के असली चरित्र को दर्शाता है.’मुख्यमंत्री ने अमित शाह के बारे में कहा, ”इन्होंने अपने बयानों से यह साबित किया है कि वे मनुस्मृति में स्थापित किए गए लैंगिक असमानता के विचार से भरे हुए हैं| हमारे समाज को इस तरह की सोच से बाहर निकलने की ज़रूरत है|

विजयन ने इसके साथ ही यह भी कहा कि अमित शाह को याद रखना चाहिए की एलडीएफ को केरल की जनता ने चुनकर सरकार बनाने के लिए भेजा है| उन्होंने बीजेपी की दया से सरकार नहीं बनाई है|

लोकतंत्र  खतरे में है: मायावती

केंद्र में सत्ता पर काबिज पार्टी के अध्यक्ष का सार्वजनिक रूप से इस तरह का बयान दिखला रहा है कि लोकतंत्र खतरे में है, वो अपने आप को कानून से भी बड़ा समझने लगे हैं। सीबीआई, सीवीसी, ईडी के साथ भारतीय रिजर्व बैंक जैसी देश की महत्ववपूर्ण स्वायत्तशासी संस्थाओं में जो गंभीर संकट का दौर चल रहा है वो इसी तरह के विचारों वाले नेताओं की वजह से है।

मायावती ने कहा कि देश में न्यायालय तथा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ देश की 125 करोड़ आबादी इस पवित्र सिद्धान्त पर एकमत है कि देश संविधान से चलता है और इसी आधार पर आगे भी चलता रहेगा, लेकिन सत्ताधारी भाजपा के वर्तमान नेतृत्व द्वारा इस मामले में उत्तेजक भाषणबाजी करके राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास बार-बार किया जा रहा है, जो अति-गंभीर और अति-निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि शाह वास्तव में सबरीमाला मन्दिर मामले को लेकर इतना भड़काऊ, असंसदीय और असंवैधानिक भाषण देकर धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हो रहे विधानसभा चुनावों में करना चाहते हैं।

 

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वह सबरीमाला मुद्दे के साथ खिलवाड़ न करें। साथ ही उन्हें चेताया कि अगर वह आस्था के मुद्दे को छेड़ने की कोशिश करेंगे तो फिर भाजपा केरल सरकार को उखाड़ फेंकने में संकोच नहीं करेगी।
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