गुजरात सरकार और प्राइवेट स्कूलों के बीच विवाद : छात्र तथा शिक्षक प्रभावित

पिछले हफ्ते, गुजरात सरकार ने एक नोटिस जारी किया और राज्य के सभी स्व-वित्त विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे जब तक स्कूल शुरू नहीं होते, तब तक स्कूल अभिभावकों से फीस नहीं ले सकते है।

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गुजरात सरकार और निजी स्कूलों के बीच विवाद दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है तथा हजारों स्कूल जाने वाले बच्चे और शिक्षक सरकार और स्कूलों के बीच इस जंग  के कारण प्रभावित हो रहे हैं।फीस के मुद्दे पर सरकार और स्कूलों संघटनों के बीच विवाद  पिछले तीन महीने से जारी है और दोनों एक-दूसरे के फैसले से सहमत नहीं हो रहे हैं।

सरकार ने ट्यूशन फीस न लेने का आदेश दिया

पिछले हफ्ते, गुजरात सरकार ने एक नोटिस जारी किया और राज्य के सभी स्व-वित्त विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे जब तक स्कूल शुरू नहीं होते, तब तक स्कूल अभिभावकों से फीस नहीं ले सकते है।

 इससे पहले कई छात्रों के माता-पिता ने अदालत में आपत्ति दिखते हुए  याचिका दायर की थी  कि सरकारी आदेशों के अनुसार वायरस के कारण स्कूल बंद है, पर कई निजी स्कूलों फिर भी फीस वसूल कर रहे है और जिसके बाद गुजरात  सरकार ने गुजरात हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए इस मामले पर  आदेश जारी किया।यहां तक कि सरकार ने आदेश में स्कूलों से इस शैक्षणिक वर्ष की फीस में बढ़ोतरी नहीं करने को भी कहा है।

प्राइवेटस्कूल फैसले के विरोध में

तालाबंदी के दौरान फीस नहीं वसूलने के सरकार के आदेश का विरोध करते हुए, निजी स्कूलों के संघ ने एक बैठक की और गुरुवार से स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास देने और प्रशासन के काम को बंद करने की घोषणा की, जो लॉकडाउन की अवधि के बीच स्कूलों में चल बंरहा था।

स्कूल ने तर्क दिया कि छात्रों से फीस वसूलने के बिना स्कूल तालाबंदी अवधि के दौरान शिक्षकों और अन्य प्रशासनिक कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं कर सकेगा। चूंकि स्कूलों को उन शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों के वेतन का भुगतान करना पड़ता है, जिन्होंने बुनियादी ढांचा बनाने पर निवेश किया था और स्कूल बंद होने पर भी ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की थीं।


सरकार कर सकती है ऑनलाइन क्लास शुरू

गुजरात की सरकार ने यह  निर्णय लिया कि वह छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रकोप के दौरान कोई शैक्षणिक नुकसान न हो। कक्षाएं निजी स्कूल के छात्रों के लिए भी होंगी, दोनों अंग्रेजी और गुजराती माध्यम में, जो सीबीएसई बोर्ड या राज्य बोर्ड, आईसीएसई या किसी अन्य केंद्रीय बोर्ड से संबंधित हैं।

यहां तक कि सरकार ने उचित पाठ्यक्रम तैयार करने और इस उद्देश्य के लिए उचित संरचना तैयार करने के लिए एक समिति नियुक्त की है।

निजी स्कूलों में खेल के मैदानों पर सरकार की कार्रवाई

निजी स्कूलों को मात देने के लिए, गुजरात सरकार ने गुरुवार को सभी जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (डीपीईओ) को आदेश दिया और कहा की उन स्कूलों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करें , जिनके पास छात्रों के लिए खेल के मैदानों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। साथ ही आदेश में कहा गया था कि यह सरकारी स्कूलों के लिए भी लागू है।अहमदाबाद में लगभग 1200 निजी स्कूलों में खेल के मैदान नहीं हैं।

खेल के मैदानों पर सरकार के आदेश से निराश स्कूल

सरकार के इस आदेश ने स्कूल प्रबंधन को  और अधिक निराश किया तथा उन्होंने सरकार को चुनौती दी की वो ऐसे स्कूलों को बंद करने का आदेश दें जिन्हें पहले सरकार ने ही अनुमति दी थी, सरकार फले नए स्कूल खोलने के लिए एक आसन्न खेल के मैदान के अनिवार्य मानदंड पर न जाने के लिए सहमत हो गई थी।

साथ ही स्कूलों ने यह भी कहा कि क्योंकि शहर में भीड़भाड़ वाले स्थान हैं जिसके कारण स्कूल मे  पर्याप्त स्थान खेल के मैदानों को बनाने के लिए स्कूलों को शहर से 10-20 किलोमीटर दूर बनाना पड़ेगा। जो स्कूलों के लिए महंगा होगा और माता-पिता के लिए भी उतना ही बोझिल और महंगा होगा अगर छात्रों को  स्कूली शिक्षा के लिए रोज 10-20 किलोमीटरतक जाना होगा।

इस जारी विवाद ने बड़ी संख्या में छात्रों तथा अभिभावकों और यहां तक कि शिक्षकों को भी प्रभावित किया है क्योंकि कक्षाओं के लंबे समय तक निलंबित होने  से छात्रों के अध्ययन पर असर पड़ेगा और यहां तक कि जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को ऑनलाइन क्लास में शामिल करने की व्यवस्था की थी उनके प्रयास भी बेकार चले जाएंगे।यहां तक कि अगर ऑनलाइन क्लास लंबे समय तक निलंबित रहती हैं, तो शिक्षक को अपनी नौकरी खोने का डर भी लगा हुआ हैं।

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