दंगों के मामलों से निपटने के लिए आपराधिक कानून कमजोर है: दिल्ली हाई कोर्ट

वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के दौरान राजधानी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में वो 22 शव किनके थे, जिनके बारे में दिल्ली पुलिस ने कभी चर्चा नहीं की। जबकि, पिछले 34 सालों से अदालती दस्तावेजों में 22 अज्ञात शवों की दास्तान चीख-चीख कर न्याय की गुहार लगा रही है। हाईकोर्ट ने अब दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को तमाम तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर 22 अज्ञात शवों के बारे में नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया है।

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Criminal law is weak for dealing with riots: Delhi High Court
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वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के दौरान राजधानी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में वो 22 शव किनके थे, जिनके बारे में दिल्ली पुलिस ने कभी चर्चा नहीं की। जबकि, पिछले 34 सालों से अदालती दस्तावेजों में 22 अज्ञात शवों की दास्तान चीख-चीख कर न्याय की गुहार लगा रही है। हाईकोर्ट ने अब दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को तमाम तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर 22 अज्ञात शवों के बारे में नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया है।

जस्टिस आर.के. गावा ने सिख विरोधी दंगों के दौरान त्रिलोकपुरी इलाके में आगजनी, हिंसा व दंगा करने के 89 लोगों को निचली अदालत से मिली पांच-पांच साल कैद की सजा को बरकरार रखते हुए यह आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि तथ्यों से साफ है कि दंगे के दौरान 2 नवंबर, 1984 को कल्याणपुरी थाना इलाके में पुलिस ने 95 शव बरामद किए। इतना ही नहीं, दो आरोपपत्र में दाखिल रिपोर्ट में भी 100 लोगों के मारे जाने, कुछ के पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सैकड़ों घरों के नुकसान आदि का जिक्र है जिस पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा किया है।

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हाईकोर्ट ने कहा है कि अज्ञात शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट निचली अदालत की फाइलों का हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि यदि संख्या की बात करें तो 95 में से 73 की पहचान हुई और 22 शवों के बारे में पुलिस में अबतक किसी भी तरह की कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं हुई। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को मौजूद साक्ष्यों, दस्तावेजों व तथ्यों के आधार पर मामले की जांच करने और समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को इस फैसले की प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है ताकि समुचित कदम उठाया जा सके।

न्याय देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए

जस्टिस आर. के. गाबा ने अपने फैसले में न्याय देने की प्रक्रिया और कानून की खामियों व कमजोरियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों के लिए कानून में उचित बदलाव की जरूरत पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले, त्रिलोकपुरी में हुई लूटपाट और आगजनी की घटनाएं दर्शाती हैं कि कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। हाईकोर्ट ने इऐ मामलों से निपटने के लिए आपराधिक कानून में सुधार का भी सुझाव दिया।

बड़ी मछलियां खुलेआम घूम रहीं : केजरीवाल

वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को दोषी ठहराए जाने और सजा बरकरार रखने के आदेश पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही उन्होंने ट्वीट करके कहा कि बड़ी मछलियां अब भी खुलेआम घूम रहीं हैं। केजरीवाल ने कहा कि सिख दंगा पीड़ितों को 34 साल बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है। बुधवार को किए ट्वीट में उन्होंने लिखा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान त्रिलोकपुरी में सैकड़ों निर्दोष लोगों के कत्ल के जिम्मेदार लोगों को कठोर सजा मिली। मगर अभी भी कई बड़े चेहरे और दंगे के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।

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वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों के दौरान राजधानी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में वो 22 शव किनके थे, जिनके बारे में दिल्ली पुलिस ने कभी चर्चा नहीं की। जबकि, पिछले 34 सालों से अदालती दस्तावेजों में 22 अज्ञात शवों की दास्तान चीख-चीख कर न्याय की गुहार लगा रही है। हाईकोर्ट ने अब दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को तमाम तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर 22 अज्ञात शवों के बारे में नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया है।
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