ओड़िसा में फानी तूफ़ान की दस्तक… जानिए भारत के अब तक के बड़े चक्रवाती तुफानो के बारे में

मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज़मीन के संपर्क में आने के बाद तूफ़ान की तीव्रता कम होगी और ओडिशा में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश होगी और तेज़ हवाएं चलेंगी|

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Extremely severe cyclone' Fani headed towards Odisha: All you need to know

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  1. बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफ़ान अब ओड़िसा के पूरी तट में दस्तक दे चूका है जिसका असर देश के कई हिस्सों में देखा जा सकता है|
  2. तेज हवाओं के चलते लगभग 10 लाख लोगों को तटीय इलाकों से निकाला जा चूका है|
  3. लोगों की मदद के लिए एनडीआरएफ़ और ओडीआरएएफ़ की टीमें तैनात की गई हैं|
  4. मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज़मीन के संपर्क में आने के बाद तूफ़ान की तीव्रता कम होगी और ओडिशा में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश होगी और तेज़ हवाएं चलेंगी|

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफ़ान अब ओड़िसा के पूरी तट में दस्तक दे चूका है जिसका असर देश के कई हिस्सों में देखा जा सकता है| 165 से 175 प्रति घंटा से चल रही तेज हवाओं के चलते लगभग 10 लाख लोगों को तटीय इलाकों से निकाला जा चूका है|

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नौसेना और कोस्ट गार्ड को अलर्ट पर रखा गया है| लोगों की मदद के लिए एनडीआरएफ़ और ओडीआरएएफ़ की टीमें तैनात की गई हैं| तूफ़ान के असर को देखते हुए मध्य रात से उड़ानों पर रोक लगा दी गई है और सौ से ज़्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है|

ओड़िसा के पूरी तट से ये तूफ़ान टकराने के बाद तटीय ओडिशा के खुर्दा, कटक, जगतसिंहपुर, केंद्रपाडा, जाजपुर, भद्रक और बालेश्वर ज़िलों के रास्ते पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा और फिर बांग्लादेश का रुख़ करेगा| वहीँ, मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज़मीन के संपर्क में आने के बाद तूफ़ान की तीव्रता कम होगी और ओडिशा में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश होगी और तेज़ हवाएं चलेंगी|

तेज हवाओं के कारण सड़क और संचार माध्यम प्रभावित होंगे: मौसम विभाग

मौसम विभाग का अनुमान है कि तूफ़ान फानी के असर से रायगड़ा, गंजाम, गजपति, कंधमाल, नयागढ़, में भी भारी बारिश हो सकती है|भुवनेश्वर स्थित मौसम केंद्र के निदेशक एच. के. विश्वास ने बताया कि दक्षिणी तट पर गंजाम से लेकर उत्तरी तट में बालेश्वर तक विस्तृत इलाक़े में 200 से 250 मिलीमीटर तक बारिश होगी| कुछ स्थानों पर 300 मिलीमीटर से भी अधिक बारिश हो सकती है| बारिश और तेज़ हवा के कारण पेड़ गिर सकते हैं जिससे सड़क और संचार माध्यम को नुक़सान हो सकता है| तटीय ओडिशा के अधिकांश इलाक़ों में गुरुवार दोपहर से ही बारिश हो रही है|

10 लाख से अधिक लोगों को किया जा चूका है स्थानांतरित

फानी तूफ़ान के तेज़ हवाओं के कारण राज्य के 480 किलोमीटर लंबे तट के किनारे कच्चे मकान में रहने वाले 11 लाख से भी अधिक लोगों को गुरुवार शाम तक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई थी लेकिन कई स्थान पर लोग अपने मकान छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हुए और देर रात तक उन्हें मनाने की कोशिशें जारी रहीं| रात दो बजे तक क़रीब दस लाख से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जा चुका है|

विशेष राहत आयुक्त विष्णुपद सेठी ने गुरुवार शाम को बताया कि स्थानांतरित लोगों को तट पर बने क़रीब 900 ‘साइक्लोन शेल्टर’ और अन्य पक्के मकानों में ठहराया गया है| सेठी ने कहा, ‘हर शेल्टर में खाद्य सामग्री, पीने का पानी और अन्य ज़रुरी सामान रखे गए हैं और 50 स्वयंसेवी तैनात किए गए हैं|

भारत के ये बड़े तूफ़ान

भारत में इससे पहले भी कई बड़े तूफानों ने दस्तक दी| आइए नज़र डालते है अब तक के बड़े तुफानो पर:

26-30 अक्तूबर 1971 (ओड़िसा)

ओडीशा के तट से टकराए तूफ़ान की रफ़्तार 150 से 170 किलोमीटर थी| 10 हज़ार लोग मारे गए और 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए| 50 हज़ार मवेशियों की मौत हो गई और आठ लाख घरों को नुकसान पहुंचा|

1-8 दिसंबर 1972 (तमिलनाडु)

तमिलनाडु में तूफ़ान ने ज़बरदस्त नुकसान पहुंचाया| तूफ़ान से सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा कड्डालोर को जिसकी हवा की रफ़्तार 111 से 148 किलोमीटर प्रति घंटा थी| 80 लोगों की मौत हुई और 40 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ|

8-12 नवंबर 1977 (केरल और तमिलनाडु)

तमिलनाडु और केरल के तटों पर तूफ़ान ने नुकसान पहुंचाया| हवा की अधिकतम रफ़्तार 120 किलोमीटर थी| तूफ़ान से जुड़े हादसों में 560 लोगों की मौत हुई और 10 लाख से ज़्यादा लोगों के घर छिन गए थे| तूफ़ान की वजह से 23 हज़ार मवेशी मारे गए थे|

14-19 नवंबर 1977 (दक्षिण पूर्वी मध्य प्रदेश)

इस तूफ़ान को 70 के दशक के सबसे भयंकर तूफ़ानों में माना जाता है| इसका असर दक्षिण पूर्वी मध्य प्रदेश (अभी के छत्तीसगढ़) तक था| ओडीशा और आंध्र प्रदेश में इससे काफ़ी नुकसान पहुंचा| हवा की रफ़्तार को जगतस्वामी नाम के एक जहाज़ ने 193 किलोमीटर प्रति घंटे तक मापा| इस तूफ़ान की वजह से 10 हज़ार लोगों की जान गई और 27 हज़ार मवेशियों की मौत हो गई| सरकारी अनुमानों के मुताबिक फसलों और संपत्ति को होने वाला नुकसान 350 करोड़ रुपए का था|

10-13 मई 1979 (आंध्र प्रदेश)

आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में तूफ़ान ने नुकसान पहुंचाया| नेल्लोर में हवाओं की रफ़्तार 100 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक मापी गई| पेद्दागंजम में समुद्र से 12 फीट तक ऊंची लहरें उठीं| तूफ़ान की वजह से 700 लोगों की मौत हुई और 3 लाख से ज़्यादा मवेशी मारे गए| माना जाता है कि तूफ़ान से करीब 40 लाख लोगों पर असर पड़ा वहीं, सात लाख घरों को नुक्सान पहुंचा|

9-14 नवंबर 1984 (तमिलनाडू और आंध्रप्रदेश)

श्रीहरिकोटा के आसपास के इलाकों में तूफ़ान ने तबाही मचाई| कई गांवों में समुद्र का पानी घुस गया| तमिलनाडु में 54 लोगों की मौत हो गई| 90 हज़ार से ज़्यादा मवेशी मारे गए थे| वहीं, आंध्र प्रदेश में तीन लाख से ज़्यादा घर पूरी तरह तबाह हो गए|

23-30 नवंबर 1988(पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश)

पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में तूफ़ान की वजह से संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा| बांग्लादेश में तूफ़ान ने दो हज़ार से ज़्यादा जानें लीं| छह हज़ार से ज़्यादा लोग लापता हो गए|

4-9 मई 1990 (आंध्र प्रदेश)

आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में तूफ़ान की वजह से 967 लोगों की मौत हो गई| 36 लाख से ज़्यादा मवेशी मारे गए| 14 लाख से ज़्यादा घरों को नुकसान पहुंचा| माना जाता है कि तूफ़ान से संपत्ति को करीब 2248 करोड़ का नुकसान पहुंचा|

5-7 नवंबर 1996 (आंध्र प्रदेश)

आंध्र प्रदेश के तट को 6 नवंबर को पार किया| अलग-अलग स्रोतों के मुताबिक तूफ़ान से 978 से 2000 लोगों की मौत हो गई| 900 से 1375 लोग लापता हुए| तूफ़ान की वजह से 1380 गांवों को नुकसान पहुंचा| समुद्र में 6464 नावें लापता हो गईं|

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25-31 नवंबर 1999 (ओडीशा)

इस दौरान आए महाचक्रवात ने ओडीशा में ज़बरदस्त तबाही मचाई| माना जाता है कि इस चक्रवात की वजह से 8960 लोगों की मौत हुई और 2142 लोग ज़ख्मी हो गए| तीन लाख सत्तर हज़ार से ज़्यादा मवेशी मारे गए|

4-10 जून 1998 (गुजरात)

भारत के पश्चिमी तट पर इस दौरान ज़बरदस्त तूफ़ान आया| गुजरात के पोरबंदर-जामनगर में तूफ़ान से सबसे ज़्यादा विध्वंस हुआ| 1173 लोगों की मौत हुई और 1774 लोग लापता हुए| सरकारी अनुमानों के मुताबिक संपत्ति को हुआ नुकसान 1865 करोड़ रुपए से ज़्यादा था|

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Cyclone Fani
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मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज़मीन के संपर्क में आने के बाद तूफ़ान की तीव्रता कम होगी और ओडिशा में अगले 24 घंटों तक भारी बारिश होगी और तेज़ हवाएं चलेंगी|
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The Policy Times