दिल्ली दंगे: पुलिस ने डॉ. एम. ए. अनवर- अल-हिंद अस्पताल के मालिक का नाम चार्ज शीट मे कियाशामिल

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के दौरान पीड़ितों काइलाज करने वाले अस्पताल के मालिक का भी नाम चार्ज शीट मे शामिल किया है

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दिल्ली दंगे: पुलिस ने डॉ. एम. ए. अनवर- अल-हिंद अस्पताल के मालिक का नाम चार्ज शीट मे कियाशामिल . THE POLICY TIMES

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के दौरान पीड़ितों काइलाज करने वाले अस्पताल के मालिक का भी नाम चार्ज शीट मे शामिल किया हैलेकिन डॉक्टर ने अपने ऊपर लड़े सभी आरोपों की खारिज कर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक,डॉ. एम. ए. अनवर जो अल-हिंद अस्पताल के मालिक हैं, जिनहोने दिल्ली मे  फ़रवरी मे हुआ दंगों के दौरान घायन मरीजों का इलज्ज किया था, उनके खिलाफ पुलिस ने वेटर दिलबेर नेगी की हत्या के आरोप मे उनका नाम चार्ज शीट मे डाला है। यह हॉस्पिटल सिर्फ 1 किलोमीटर की दूरी पर है जहाँ दिलबेर काम करता था।

25 फरवरी को डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर राहुल रॉय ने अपने वकील सुरूर मुंडेर के जरिये दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी क्योकि दंगाइयों द्वारा एंबुलेंस को निशाना बनाए जाने की वजह से गंभीर रूप से घायल कई मरीजों को अल-हिंद से जीटीबी अस्पताल नहीं ले जाया जा सका था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए थे कि वह घायलों को जीटीबी या किसी अन्य सरकारी अस्पताल में सुरक्षित पहुंचाना सुनिश्चित करे।

दिल्ली पुलिस की चार्ज शीट

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट मे अनवर को सीएए और एनआरसी के विरोध मे हुए विरोध प्रदर्शनका आयोजक बताया गया है, जिसमे हिस्सा लेने वाले प्रदर्शनकारी दिल्ली में हुई हिंसा में शामिल थे।

दिल्ली पुलिस ने चार जून को कड़कड़डूमा कोर्ट में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पवन सिंह राजावत के समक्ष चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें कहा गया, ’15 जनवरी 2020 से फारूकिया मस्जिद के पास गैरकानूनी रूप से नारिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे, जिसमें कई वक्ताओं ने आकर भड़काऊ भाषण दिए. झूठी खबर फैलाई गई कि एनआरसी की वजह से मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता से महरूम रखा जाएगा और उन्हें डिटेंशन सेंटर्स में रखा जाएगा.’


चार्जशीट में कहा गया, ‘फारूकिया मस्जिद में हुए इस विरोध प्रदर्शन के आयोजक अरशद प्रधान और अल-हिंद अस्पताल के मालिक डॉ. अनवर हैं। इन लोगों से पूछताछ नहीं की जा सकी। इनसे बाद में पूछताछ की जाएगी और हम उसके अनुरूप जांच करेंगे। 23-24 फरवरी को हुई हिंसा कोई अलग घटना नहीं थी।’

डॉ. अनवर ने किये आरोप खारिज

डॉक्‍टर अनवर के अनुसार जब उत्‍तर पूर्वी दिल्‍ली में कर्फ्यू के कारण सड़कें बंद थीं, तब हिंसा कर रहे लोग एंबुलेंस को भी निशाना बना रहे थे। डॉक्‍टर अनवर और उनके भाई डॉक्‍टर मेराज इकराम ने उस दौरान करीब 600 मरीजों का इलाज किया तथा इमरजेंसी मेडिकल सर्विस मुफ्त मे  मुहैया कराई थी। जिस मरीज को जरूरत थी उन्हे दूसरे अस्पतालों मे भी शिफ्ट कराया था।

डॉ. अनवर का कहना है, ‘मुझे पता है कि चार्जशीट में मेरा नाम है। न ही मैंने उस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था और न ही उसमें हिस्सा लिया था क्योंकि मैं हमेशा व्यस्त रहता हूं। वास्तव में कई बार मैंने स्थानीय पुलिस को बताया था कि विरोध प्रदर्शन की वजह से इलाके में आने-जाने में दिक्कत होती है और इसे खाली कराया जाना चाहिए।”

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, मेरा नाम इसमें घसीटा गया, क्योंकि मैंने दंगों के दौरान अस्पताल में लोगों का इलाज किया था। इस मामले में मुझे घसीटा जा रहा है क्योंकि मैंने मानवता दिखाई। मुझे निशाना बनाया जा रहा है। ये झूठे आरोप हैं।’

दिलबेर नेगी की हत्या

इस दंगे मे 20 वर्षीय युवक दिलबेर नेगी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। दिलबेर नेगी उत्तराखंड का रहने वाला था। वह दिल्ली के ब्रिजपुरी मे अनिल स्वीट शॉप मे कम करता था, दिल्ली मे दंगो के दौरान दंगाई अपनी टीम के साथ आई और दिलबेर के दोनों हाथ काट केआर बुरी तरह हत्या की थी तथा उस दुकान के अंदर जिंदा जला दिया था। पुलिस ने दिलबेर की जाली हुई बॉडी बरामद की थी।

पुलिस ने अब तक चार्जशीट में 12 लोगों को आरोपी बनाया है, ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं।

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