ICAN3: डिजिटल युग में ग्रासरूट जर्नलिज्म के भविष्य पर केजी सुरेश की चर्चा

सत्र की शुरुआत डॉ अंबरीश सक्सेना, डीन, डीएमई मीडिया स्कूल और आयोजन सचिव ICAN3 ने की। डॉ सुष्मिता बाला, प्रमुख, डीएमई मीडिया स्कूल और संयोजक ICAN3 ने केजी सुरेश का स्वागत किया।

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नोएडा: डी.एम.ई. मीडिया स्कूल द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ICAN3 का दूसरा दिन पूर्व महानिदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान, वर्तमान में स्कूल ऑफ मॉडर्न मीडिया, डीन, पेट्रोलियम और ऊर्जा अध्ययन विश्वविद्यालय, देहरादून के अध्यक्ष श्री के.जी. सुरेश की अध्यक्षता में शुरू हुआ, जिसका विषय “डिजिटल युग में ग्रासरूट पत्रकारिता” था। सत्र की शुरुआत डॉ अंबरीश सक्सेना, डीन, डीएमई मीडिया स्कूल और आयोजन सचिव ICAN3 ने की। डॉ सुष्मिता बाला, प्रमुख, डीएमई मीडिया स्कूल और संयोजक ICAN3 ने केजी सुरेश का स्वागत किया।

श्री सुरेश ने पत्रकारिता में सहभागी दृष्टिकोण की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि, “हम संचार के युग में नहीं रह रहे हैं; हम बातचीत के युग में रह रहे हैं।’ श्री सुरेश ने अपनी विशिष्ट शैली में “wannabe journalists” के खंड की आलोचना की और कहा “कोई वास्तविक समुदाय के मुद्दों पर काम नहीं कर सकता, जबतक वह ज़मीनी समस्याओं पर मजबूत पकड़ नहीं बना लेता। ग्रासरुट पत्रकारिता बेज़ुबान की आवाज़ बनने के बारे में है।”

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी स्तरों के लोगों तक पहुँचने के लिए स्थानीय भाषाओं का उपयोग एक महत्वपूर्ण उपकरण हो सकता है, इसके साथ उन्होंने मीडिया छात्रों को स्थानीय भाषाओं के समाचारपत्र पढ़ने की सलाह भी दी क्योंकि वे ज़मीनी स्तर पर लोगों की कठिनाइयों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

एक स्थानीय अखबार- खबर लहरिया का उदाहरण देते हुए, श्री सुरेश ने कहा कि जब ज़मीनी पत्रकारिता की बात आती है तो स्थानीय तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने मीडिया और व्यापार से जुड़ी बहस का भी उल्लेख किया और टिप्पणी की, “मुख्यधारा मीडिया आर्थिक उद्देश्यों के कारण जमीनी स्तर के मुद्दों को शायद ही कभी कवर करता है”। उन्होंने कहा कि आर्थिक कारक शामिल होने के कारण ग्रामीण आबादी मीडिया के लिए टारगेट ऑडियंस नहीं है क्योंकि टारगेट ऑडियंस मार्केट पर निर्भर करते हैं।

श्री सुरेश ने बताया कि डिजिटल मीडिया परिवर्तन का मुख्य स्रोत हो सकता है। दर्शकों के एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि मानसिकता में बदलाव होगा और लोग डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर स्विच करेंगे; और तब शक्ति और नेटवर्क की बढ़ती मांग एकमात्र चुनौती होगी, जिसे नीतियों और सामुदायिक जागरूकता में सुधारों से निपटाया जा सकता है।

प्लीनरी सत्र के बाद, ICAN-3 के तीसरे तकनीकी सत्र में “समाज पर सोशल मीडिया के प्रभाव और भूमिका” पर ध्यान केंद्रित किया गया था। विषय के मुद्दों के बारे में कईं प्रासंगिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिससे कईं आश्चर्यजनक निष्कर्ष सामने आए। सत्र की अध्यक्षता, डॉ रूही लाल ठाकुर, पीएचडी समन्वयक, एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन और सह-अध्यक्षता, डॉ पूजा अरोड़ा, विजिटिंग फैकल्टी, डीएमई, नोएडा द्वारा की गई।

प्लीनरी सत्र का संचालन श्री प्रमोद कुमार पांडेय द्वारा किया गया जबकि सुश्री कृतिका सती ने तीसरे तकनीकी सत्र का संचालन किया। सत्रों के लिए एंकरिंग क्रमश: अदिति श्रीवास्तव और आकृति सिंह, डीएमई मीडिया स्कूल की छात्राओं द्वारा की गई।

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ICAN3: डिजिटल युग में ग्रासरूट जर्नलिज्म के भविष्य पर केजी सुरेश की चर्चा
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सत्र की शुरुआत डॉ अंबरीश सक्सेना, डीन, डीएमई मीडिया स्कूल और आयोजन सचिव ICAN3 ने की। डॉ सुष्मिता बाला, प्रमुख, डीएमई मीडिया स्कूल और संयोजक ICAN3 ने केजी सुरेश का स्वागत किया।
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The Policy Times