रुपए में लगातार गिरावट; सरकार की बढ़ी मुश्किलें

रुपए की गिरवाट से आम आदमी की जेब पर असर पड़ना तय है। क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम क्रूड ऑइल आयात करता है जिसके लिए उसे पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

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depreciation indian rupee increases Government's difficulties

कच्चे तेल की वजह से रुपये में लगातार गिरावट और बाजार पर इसके प्रभाव से सरकार की चिंता बढ़ी है। ऐसे में केंद्र सरकार ने एनआरआई यानी प्रवासी भारतीयों के लिए आकर्षक जमा योजना ला सकती है, ताकि भारी मात्रा में डॉलर जुटाकर रुपये पर दबाव कम किया जाए। सरकार सॉवरेन बॉंड भी जारी कर सकती है। आरबीआई कच्चे तेल के बदले डॉलर में भुगतान के लिए तेल कंपनियों को विशेष विंडो भी मुहैया करा सकता है।

डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर 72.55 पर पहुंचा रुपया

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट का दौर जारी है। शुक्रवार को यह 71.74 पर था। वहीं समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 72.35 के नए निम्न स्तर तक गिर गया जबकि बीते कारोबारी सत्र में यह 71.73 पर बंद हुआ था।  अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव गहराने से बीते कुछ सप्ताह से रुपये में गिरावट बनी हुई है। 6 सितंबर को पहली बार रुपया, डॉलर के मुकाबले 72 के नीचे गिरा था। आज सेंसेक्स में भी गिरावट देखने को मिली। 0.67% यानी 256.35 अंक की गिरावट के साथ सेंसेक्स 38,133.47 पर पहुंच गया जो जनवरी के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है।

रुपए की  गिरावट से बढ़ सकती है महंगाई

रुपए की गिरवाट से आम आदमी की जेब पर असर पड़ना तय है। क्योंकि भारत बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम क्रूड ऑइल आयात करता है जिसके लिए उसे पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। जब क्रूड ऑयल महंगा होगा तो डीजल पेट्रोल भी महंगा होगा और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। डीजल-पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई भाड़ा महंगी होगी। इससे खाने पीने की चीजें और अन्य उपयोगी सामग्री महंगी हो सकती है। चूंकि ऑटोमोबाइल उद्योग की माल ढुलाई का ज्यादातर काम डीजल वाहनों से होता है इसलिए ऑटो मोबाइल्स भी महंगे हो सकते हैं। इसीलिए रुपए में जारी गिरावट लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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चार बड़ी चिंताए

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के अनुसार, चालू खाते का घाटा इस वित्तीय वर्ष में 75 अरब डॉलर हो सकता है, यह जीडीपी के 2.8 फीसदी के बराबर होगा। यह 2013 के बाद सबसे बड़ा घाटा होगा। ऐसे में सरकार के लिए वित्तीय घाटे को 3.3 फीसदी तक रखना मुश्किल होगा।

कच्चा तेल बेकाबू

कच्चा तेल पिछले नौ माह में 64 से 85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका है और इसके सौ डॉलर तक पहुंचने की आशंका है। अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस और ओपेक देश तेल आपूर्ति बढ़ाने को तैयार नहीं दिख रहे हैं, जबकि ईरान पर चार नवंबर से प्रतिबंध लागू हो जाएंगे।

सरकार के कदमों का असर

केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते एसी, फ्रिज समेत 19 गैरजरूरी वस्तुओं पर आयात शुल्क दस से 15 फीसदी तक बढ़ा दिया था, ताकि व्यापार घाटे और रुपये को काबू में किया जा सके। हालांकि त्योहारी मांग के चलते इसका असर नहीं पड़ने की संभावना है।

 रुपए की कीमत बढ़ने से होते हैं ये फायदे

रुपए की कीमत बढ़ने से कई चीजों महंगाई बढ़ने का खतरा कम होता जाता है क्योंकि बाहर से इंपोर्ट की जाने वाली चीजों पर कम रुपए चुकाने पड़ते हैं। इसके साथ ही पर्यटन उद्योग को इसका काफी फायदा होता है क्योंकि रुपया महंगा होने से यहां आने वाले विदेशियों को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे उद्योग से जुड़े लोगों को बेहतर फायदा होता है। वहीं इंपोर्ट से जुड़े उद्योग को डॉलर के मुकाबले कम रुपए चुकाने पड़ते हैं जिससे चीजों की महंगाई नहीं बढ़ती।

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