यौन उत्पीड़न मामलें में शिक्षा संस्थान भी पीछे नहीं, एफटीआईआई की छात्राओं ने मंत्रालय को लिखा पत्र

जानीमानी संस्था ‘फिल्म एवं टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (FTII) के वर्ष 2016 बैच की छात्राओं ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को चार पेज का एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने संस्थान के प्रशानिक विभाग पर आरोप लगाए है|

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education institution are also in list of sexual harassment case FTII students writes to I&B ministry about the incident
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यौन उत्पीड़न एवं छेड़खानी के मामले एक के बाद एक सामने आ रहे है| पहले जहाँ बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर कलाकारों के नाम सामने आए वहीँ, बाद में राजनितिक घरानों से जुड़े मंत्रियों में नाम भी उजागर हुए, लेकिन अब शिक्षा संस्थानों के नाम भी इससे जुड़ रहे है|

जानीमानी संस्था ‘फिल्म एवं टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (FTII) के वर्ष 2016 बैच की छात्राओं ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को चार पेज का एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने संस्थान के प्रशानिक विभाग पर आरोप लगाए है| इस पत्र में उन्होंने बताया है कि किस तरह से छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न की शिकायत करने पर उन्हें दण्डित किया गया| परिसर की लड़कियों द्वारा यह पत्र सोमवार को लिखा गया जिसमें उन्होंने स्पष्टरूप से कैंपस के भीतर लड़कियों के प्रति गलत रवैये का ज़िक्र किया है|

कैंपस में यौन उत्पीड़न की शिकार केवल एक या दो लड़कियां नहीं बल्कि ऐसी कई लड़कियां है जो इसकी शिकार हुई है| पिछले साल नवंबर 2017 में विभिन्न बैचों की 27 लड़कियों ने एफटीआईआई निदेशक भूपेंद्र कैथोला को पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने में प्रशासन के गैर-निर्णायक रवैये के बारे में शिकायत की थी| उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशानिक विभाग लड़कियों द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज नहीं करता है| इसके बावजूद संस्था और प्रशासन की ओर से लड़कियों की सुरक्षा के लिए कोई अहम कदम नहीं उठाया गया|

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार मई 2010 से दिसंबर 2017 तक परिसर में छात्राओं एवं महिला कर्मचारियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न की जानकारियाँ जुटाई जिसमे यह बात सामने आई कि केवल एक मामले को छोड़कर बाकी सभी मामलों को पारस्परिक समझ के साथ प्रशासन द्वारा हल किया गया है| जानकारी के मुताबिक कैंपस की महिला कर्मचारी, इंटर्न छात्राएं एवं लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न से जुड़े प्रशासन के पास 13 लिखित शिकायतें गई थी जिसे आपसी समझ के साथ निपटा लिया गया| इसी साल हाल ही में मार्च के अंत तक आंतरिक मामलों की समिति को यौन उत्पीड़न से जुड़े चार और शिकायतें प्राप्त हुईं है जिसमें हर मामलें की जांच शुरू की गई|

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वर्ष 2011 बैच के एक पूर्व छात्रा ने कहा कि उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत को अनदेखा किया जाता रहा और रिपोर्ट में आरोपी का नाम ना देने का अनुरोध किया जाता था|

इस मसले पर एफटीआईआई निदेशक भूपेंद्र कैथोला ने कहा कि एफटीआईआई परिसर में किसी प्रकार का लिंग भेद जैसे माहोल नही है| डायरेक्टर कैथोला ने लड़कियों द्वारा दिए बयान से इनकार करते हुए कहा कि परिसर में किसी भी तरह के उत्पीड़न को सहन नहीं किया जाता है जिसमे रैगिंग भी शामिल है| आगे उन्होंने बताया कि एफटीआईआई छात्राओं के बीच सुरक्षा की भावना को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है और अधिक महिला शिक्षकों को भर्ती करने एवं लड़कियों की संख्या बढाने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

एफटीआईआई के अलावा हाल ही में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी का मामला भी प्रकाश में आया जिसमें छात्राओं ने यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसरों पर छेड़खानी एवं यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था| इसी वर्ष 8 जनवरी को जेएनयू के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज की पीएचडी छात्रा ने वाइस चांसलर प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार और इंटर्नल कंप्लेंट कमेटी के अध्यक्ष विभा टंडन को मेल लिखकर दो प्रोफेसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरासमेंट की शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें पूरी घटना का जिक्र था|

स्कूलों एवं यूनिवर्सिटी कैंपस में लड़कियों व महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं कोई नया विषय नहीं है| लडकियां एवं महिलाएं पहले भी शिक्षक और प्रोफेसर के खिलाफ हेरेस्मेंट की शिकायतें करती रही है लेकिन ऐसे मामलों को अक्सर अनदेखा किया गया| यह सोशल मीडिया में शुरू हुई  #MeToo का नतीजा है जिसमें अब यौन उत्पीड़न के दबे मामले सामने में आ रहे है और इस घेरे में कई बड़े फ़िल्मी सितारें और नेता के नाम सामने आए और अब शिक्षक व प्रोफेसर भी घिरते नज़र आ रहे है|

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