हर तीन महीने में एम्स करेगा डॉक्टरों की नियुक्ति, 50 फीसदी पद खाली

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत देशभर में प्रस्तावित 21 एम्स में से छह नए एम्स में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई शुरू हो चुकी है, वहीं अगले साल से तीन से चार और एम्स में पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। बावजूद इसके सभी नए एम्स में फैकल्टी व गैर-फैकल्टी स्टाफ का टोटा है। लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद नए एम्स में आधी फैकल्टी पद खाली पड़े हैं। वहीं, गैर-फैकल्टी मामले में तीन चौथाई पद खाली हैं।

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प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत देशभर में प्रस्तावित 21 एम्स में से छह नए एम्स में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई शुरू हो चुकी है, वहीं अगले साल से तीन से चार और एम्स में पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। बावजूद इसके सभी नए एम्स में फैकल्टी व गैर-फैकल्टी स्टाफ का टोटा है। लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद नए एम्स में आधी फैकल्टी पद खाली पड़े हैं। वहीं, गैर-फैकल्टी मामले में तीन चौथाई पद खाली हैं। इसे दूर करने के लिए मंत्रालय ने अब कॉमन सेलेक्शन बोर्ड के गठन का फैसला लिया है। यह बोर्ड हर महीने नियुक्तियां आमंत्रित करेगा। इसमें प्रतिभागी पसंदीदा एम्स के लिए अपनी प्राथमिकता दे सकेंगे।

फैकल्टी की कमी से जूझ रहे नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स) को राहत देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एम्स की नियुक्ति प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव करने जा रहा है। इसके तहत दिल्ली समेत सभी एम्स के लिए कॉमन सेलेक्शन बोर्ड का गठन किया जाएगा और हर तीन महीने पर एक बार विज्ञापन निकालकर फैकल्टी की नियुक्ति की जाएगी। इसी महीने प्रस्तावित एम्स के केंद्रीय शासकीय निकाय की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

गैर-फैकल्टी स्टाफ के लिए भी केंद्रीय व्यवस्था

गैर-फैकल्टी स्टाफ के लिए भी एक केंद्रीय व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, यह कॉमन सेलेक्शन बोर्ड जैसा नहीं है। इसमें अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग एम्स को प्रभारी बना दिया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि ऐसा करने से किसी भी विज्ञापित पद की संख्या अधिक रहेगी और इससे अधिक संख्या में प्रतिभागियों को आकर्षित किया जा सकेगा।

उपसमिति भी बनेगी

चयन के बाद शासकीय बोर्ड से मंजूरी मिलने में होने वाली देरी को रोकने के लिए एक एचआर सशक्त उपसमिति के गठन का भी प्रस्ताव किया गया है। इस उप-समिति का काम चयनित उम्मीदवारों की अपने स्तर पर जांच परख करना और उनकी नियुक्ति के लिए आदेश जारी करना होगा। यह काम चयन के एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन प्रस्तावों को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में होने जा रही एम्स की केंद्रीय शासकीय निकाय की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इस बैठक में दिल्ली एम्स की पूरी इंस्टीट्यूट बॉडी एवं अन्य सभी एम्स के निदेशक मौजूद रहेंगे।

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Every three months, AIIMS will appoint doctors, 50% of the posts will be vacant
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Every three months, AIIMS will appoint doctors, 50% of the posts will be vacant
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प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत देशभर में प्रस्तावित 21 एम्स में से छह नए एम्स में एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई शुरू हो चुकी है, वहीं अगले साल से तीन से चार और एम्स में पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। बावजूद इसके सभी नए एम्स में फैकल्टी व गैर-फैकल्टी स्टाफ का टोटा है। लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद नए एम्स में आधी फैकल्टी पद खाली पड़े हैं। वहीं, गैर-फैकल्टी मामले में तीन चौथाई पद खाली हैं।
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The Policy Times
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