ताज होटल के पूर्व सीईओ पर लगा यौन शोषण का आरोप, पीड़िता ने कहा #मीटू ने बोलने के लिए प्रेरित किया

सोशल मीडिया में जारी #मीटू अभियान के तहत एक महिला ने ताज होटल के तत्कालीन सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश सरना पर यौन शोषण का आरोप लगाया है।

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Former CEO of taj hotel is accused in sexual harassment case, victim says #metoo has motivated to came out
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सोशल मीडिया में जारी #मीटू अभियान के तहत एक महिला ने ताज होटल के तत्कालीन सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर राकेश सरना पर यौन शोषण का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाली पीड़िता ताज होटल की पूर्व कार्यकारी सहायक अंजलि पंडित है| मालुम हो साल 2016 में उनका इस्तीफा रतन टाटा-सायरस मिस्त्री विवाद के दौरान मीडिया में सामने आया था।

पूर्व कार्यकारी सहायक अंजलि पंडित ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि उन्होंने टाटा संस के कई दरवाजों को खटखटाया था लेकिन बहुत कम लोगों ने उनकी बात सुनी। इसकी वजह से उनके पास नौकरी छोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा। उनकी शिकायत के बाद टाटा संस ने एक नई समिति बनाई जहां उनकी सुनवाई होनी थी। उनका कहना है कि दो साल बाद भी उन्हें निष्कर्षों की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है लेकिन अब #मीटू ने उन्हें खुलकर बोलने के लिए प्रेरित किया है|

पंडित अमेरिका की नागरिक और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) की कार्ड धारक हैं। वह लंदन की एक वित्तीय सलाहकार कंपनी के साथ काम करती हैं। वह साल 2009 में 23 साल की उम्र में टाटा समूह के साथ जुड़ी थीं। पेरिस से अपनी मास्टर की पढ़ाई करने के बाद वह सायरस मिस्त्री की अध्यक्षता वाले टाटा संस में जनवरी 2014 में वापस लौटीं। जहां वह यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के साथ सरकारी संबंधों का प्रबंधन किया करती थीं।

पंडित का कहना है कि अपनी ड्रीम जॉब के एक साल बाद उनसे पूछा गया कि क्या वह ताज होटल में कार्यकारी सहायक के पद पर जा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘दिसंबर में मुझे मेरी सैलरी पर बातचीत करने के लिए एक असहज फोन आया। जब मैं ऑफर से नाखुश हुई तो सरना ने कहा, मुझे लगता है कि तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हें एक करोड़ रूपए दिए जा सकें लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं प्यारी।’ यह पहला संकेत था कि सबकुछ सही नही है।

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जनवरी 2015 में पंडित सरना की कार्यकारी सहायक बनकर ताज होटल चली गईं। उन्होंने बताया, ‘सात महीनों के दौरान उसने मेरे लुक्स, मेरी तरफ अपने आकर्षण और मेरे साथ अफेयर करने की इच्छा को लेकर बातें की। उसकी मंशाएं मेरे सामने प्रकट हो चुकी थीं और मैं पूरी तरह से स्पष्ट थी। मुझे उसमें बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं थी। बेशक मैं अपनी दिशा बदल लेती, उससे प्रोफेशनली आग्रह करती या निराशा में रोने लगती। वह अपना काम जारी रखता। काम का वातावरण हम दोनों के लिए असहनीय हो गया था क्योंकि हम अपना धैर्य खो चुके थे।’

पीड़िता ने बताया कि वह ताज की पॉश समिति (प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट) में शिकायत दर्ज नहीं करवा सकती थी क्योंकि सरना और उसके साथी इसके सदस्य थे। उन्होंने कहा कि ताज के बोर्ड सदस्यों, टाटा समूह के कार्यकारी परिषद के सदस्यों और अध्यक्ष के दफ्तर में शिकायत करने पर उन्हें केवल एक उपाय दिया गया। जो था ताज समूह से इस्तीफा देना।

उन्होंने आगे बताया, ‘चूंकि मैं ताज की प्रक्रिया में सहज महसूस नहीं कर रही थी। इसीलिए मैंने सबसे बड़े शेयरधारक टाटा संस के बोर्ड की मदद मांगी। जिस चीज का मुझे अहसास नहीं था वह यह था कि आधिकारिक रास्ते को न अपनाकर मैं टाटा समूह को अपने खिलाफ मौका दे रही हूं।’ उन्होंने कहा कि हर संभव शख्स और अध्यक्ष के दफ्तर तक शिकायत करने के बावजूद आखिर में उन्हें ताज होटल से त्यागपत्र देने के लिए कहा गया और उनके पद को घटाकर टाटा संस के कॉरपोरेट क्मयुनिकेशंस में एक बैक ऑफिस नौकरी दे दी गई।

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The Policy Times
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