कोरोना के बाद भारतीय ग्रामो का भविष्य

कोरोना के कारण जिन प्रवासी मजदूरों ने वापस गांव कि तरफ कदम बढ़ाये है उन्होंने अपने साथ साथ बाकी ग्रामीण लोगो का भी गांव को देखने का नजरिया बदल दिया है।  अब लोग गांव मे  रह कर ही खेती करने   का    मन बना रहे है।

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 स्वतंत्रता के  बाद से ही उद्योग का प्रचलन भारत मे बहुत ज्यादा रहा है।  भारत के नीति निर्माताओं क़ि यही कोशिशे रही है की उद्योग को जितना हो सके बढ़ाया जाये। भारत के सभी ज्ञातकारो ने शहरी विकास का  ही चयन किया है।

हमने यह कभी नहीं सोचा था क़ि भारत मे  शहरी विकास क़ि वजह से ग्रामीण स्तर को दशकों तक सहना पड़ेगा।  परन्तु शहर मे बढ़ती आबादी और कोरोना के काल मे जब प्रवासी मजदूरों को वापस जाते देखा जाये तो यह अनुमान लगाया जा सकता है क़ि शहर जाके काम करने का सपना देखने वाले लोगो क़ि तादाद मे  कमी  ज़रूर आयी होगी। इसी के साथ वह सामाजिक जाल जिससे ग्रामीण लोगो को शहर लाया जाता था उसमे भी बाधा  आई है।  हम यह नहीं जानते कि हमे कब तक इस महामारी से लड़ना पड़ेग, परन्तु सभी ने किसी न किसी  प्रकार से इसे जीवन का हिस्सा मान ही लिया है।  लॉक डाउन खुलने के बाद भी लोग  डरने   के  साथ साथ कई नयी चुनोतियो   का सामना करेंगे जैसे बेरोजारी और उद्योग मे आने वाली पैसे कि कमी। भारतीया अर्थव्यवस्था केंद्र ने बताया  “भारत मे पहले से ज्यादा बेरोज़गार बढ़ेगा और लोग अपना पैसा बाजार मे लगाना नहीं चाहेंगे”।

कोरोना के कारण जिन प्रवासी मजदूरों ने वापस गांव कि तरफ कदम बढ़ाये है उन्होंने अपने साथ साथ बाकी ग्रामीण लोगो का भी गांव को देखने का नजरिया बदल दिया है।  अब लोग गांव मे  रह कर ही खेती करने   का    मन बना रहे है।  इससे सरकार के सामने यह चुनौती आती है कि इतने लोगो के काम करने के लिए ज़मीन कहा से आएगी।  कुछ राज्य सरकारों ने एक योजना निकली है जिसमे वह एक ही ज़मीन कई लोगो को काम करने के लिए उपलब्ध कराएगी । परन्तु जो लोग  अपनी ही ज़मीन पर खेती करना चाहे ,उन ज़मीनो पर तो अधिकता का डर  रहेगा । मनरेगा के कर्मचारियों की भी  मांग बढ़ेगी।  गांव से शहरों मे  विस्थापित होने के दो मुख्य कारण  है।

प्रथम : अच्छी शिक्षा,

द्वितीय : अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं।

प्रवासियों के वापस लौट जाने के बाद शिक्षा के क्षेत्र मे अच्छी सुविधाओं की मांग बढ़ेगी और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेके भी लोग जागरूक होंगे जिससे उसकी मांग मे भी वृद्धि होगी। पिछले कई सालो मे यह देखा गया है कि भारत कि अर्थव्यवस्था  मे गैर कृषि उद्योगों की काफी ज्यादा भागीदारी रही ही, परन्तु कोरोना और लॉक डाउन के बाद यह कह पाना मुश्किल होगा की  कौन  सा क्षेत्र कितनी और कितनी जल्दी तरक्की करता है।

इन सभी चीज़ो को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है क़ि यह एक अवसर है |  श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने रुर्बन मिशन लागू किया , जिससे गांव को आर्थिक सामाजिक और आधारिक संरचना कि सुविधाएं मिलेंगी।  विशेह रूप से यह गांव में रोज़गार बढ़ाने, उन्हें आपस में जोड़ने और शहरों के पास होने का फायदा लेने में मददगार होगा ।  फिलहाल ये मिशन भारत के ३००० गांव में  है।

इंडिया बनाएगा भारत ” की गति कोरोना की वजह से धीमी अवश्य हुई है परन्तु ये रुकी नहीं। हमे अपनी नीतियों पर पुनः गहन करना होगा और अपना ध्यान आर्थिक अवसर, बेहतर सुविधाएं , बेहतर  सेवा , बेहतर ग्रामीण आधारिक संरचना और कर्मचारियों के गौरव और सुरक्षा कि ओर लगाना होगा ।

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