क्लास के दौरान लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सिखाए जाए: चाइल्ड राईट पैनल

इस मैनुअल के तहत लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान निजी सहायता एवं उन्हें हर संभव समर्थन प्रदान करने की बात कही गई है| व्यवहार परिवर्तन क्रियाकलाप विषय के तहत मैनुअल कहता है कि स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान सहायक तरीके से स्वच्छता प्रबंधन सिखाया जाना चाहिए ताकि वे कठिन दिनों में भी स्कूल जाना न छोड़े ।

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नियमों के अनुसार हर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी और शौचालय होना ज़रूरी है लेकिन जब बात लड़कियों की सुरक्षा और सुविधाओं की हो तो ऐसे में लड़कियों के लिए निजी सुविधाओं के प्रति संवेदनशील और प्रतिबद्ध होना बेहद ज़रूरी है| इसी विचार के साथ ‘नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स’ (एनसीपीसीआर) ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानूनों, अधिनियमों, दिशानिर्देशों और नियमों का संकलन नामक एक मैनुअल जारी किया है।

इस मैनुअल के तहत लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान निजी सहायता एवं उन्हें हर संभव समर्थन प्रदान करने की बात कही गई है| व्यवहार परिवर्तन क्रियाकलाप विषय के तहत मैनुअल कहता है कि स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान सहायक तरीके से स्वच्छता प्रबंधन सिखाया जाना चाहिए ताकि वे कठिन दिनों में भी स्कूल जाना न छोड़े ।

इसके लिए देश के हर राज्यों के स्कूलों को निर्देशित करते हुए लड़कियों के मासिक धर्म के दौरान सैनिटरी पैड एवं इंकिनेटर जैसे सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही आपातकाल में लड़कियों के लिए अतिरिक्त सैनिटरी पैड और स्कूल यूनिफार्म उपलब्ध किए जाने की बात कही है|

मैनुअल में लड़कियों की सुविधाओं के लिए साबुन, निजी स्थान, कपड़े धोने, पर्याप्त पानी और सैनिटरी पैड शामिल है| इसके साथ ही पीरियड्स के दौरान छात्राओं को स्वच्छता प्रबंधन की शिक्षा के लिए अन्य पाठ्यपुस्तक शामिल किए जाने की बात कही है|

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द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की रहने वालीं एनसीपीसीआर की टेक्निकल एक्सपर्ट मधुलीका शर्मा ने कहा कि मैनुअल को एक पुस्तिका के रूप में तैयार किया गया है ताकि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी नियमों और कानूनों का उपयोग कर सकें। उन्होंने बताया कि हमने इस मैनुअल में बाल सुरक्षा से संबंधित सभी पहलुओं को कवर करने का प्रयास किया है। इसके बाद पूरे देश में सभी सरकारी, निजी और अन्य स्कूलों को अनिवार्य रूप पालन किए जाने की बात कही है| इसे सभी राज्यों में भेज दिया गया है|

जानकारी के मुताबिक पंजाब में कई ऐसे सरकारी और निजी स्कूल है जहाँ बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है| पंजाब सरकार ने वर्ष 2016-17 में पंजाब के सभी सरकारी स्कूलों में लड़कियों को निशुल्क सैनिटरी नैपकिन प्रदान करने का वादा किया गया था जो अब तक अधुरा है| आज भी कई ऐसे राज्य है जहाँ पिछड़े ज़िलों में लड़कियां सैनिटरी पैड के बजाय कपड़े और अन्य रैग का उपयोग करती हैं और मासिक धर्म के दौरान स्कूल से अनुपस्थित रहती हैं।

गौरतलब है कि हर स्कूलों की वेबसाइट पर इस बात की जानकारी तो होती है कि स्कूल का बिल्डिंग किस तरह का है, कक्षाएं कैसी हैं, डांस रूम कैसा है लेकिन इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि माहवारी के दौरान लड़कियों को क्या और कैसी सुविधाएं दी जाती हैं| स्कूल में लड़कियां 6-7 घंटे बिताती हैं, ऐसे में यह जरूरी है कि उनके लिए वहां तमाम सुविधाएं हों ताकि मासिक धर्म के दौरान लड़कियों को किसी तरह की परेशानी ना हो|

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क्लास के दौरान लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सिखाए जाए: चाइल्ड राईट पैनल
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क्लास के दौरान लड़कियों को मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सिखाए जाए: चाइल्ड राईट पैनल
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इस मैनुअल के तहत लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान निजी सहायता एवं उन्हें हर संभव समर्थन प्रदान करने की बात कही गई है| व्यवहार परिवर्तन क्रियाकलाप विषय के तहत मैनुअल कहता है कि स्कूलों में लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान सहायक तरीके से स्वच्छता प्रबंधन सिखाया जाना चाहिए ताकि वे कठिन दिनों में भी स्कूल जाना न छोड़े ।
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The Policy Times
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