भारत और वियतनाम के बढ़ते संबंध: एक जाएज़ा

0
204 Views

HIGHLIGHTS:

दोनों देशो के बीच राजनीतिक संपर्क मजबूत हुए हैं और दोनों पक्षों के नेताओं ने कई उच्च-स्तरीय दौरे किए है|

आईटी दोनों देशों के बीच ज्ञान आधारित साझेदारी के एक महत्विपूर्ण आधार के रूप में उभरा है|

वियतनाम में चावल अनुसंधान संस्थान की स्थांपना में भारत की सहायता ने इस देश को विश्व के अग्रणी चावल निर्यात बनने में मदद की है

सांस्कृतिक सबंध में सितंबर 2016 में हनोई में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र खोला गया है|


भारत की आजादी के बाद से ही भारत और वियतनाम के संबंध असाधारण रूप से मैत्रीपूर्ण और सौहार्दपूर्ण रहे है| देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु और वियतनाम के राष्ट्रपति हो ची मिन्ह के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण सबंध थे| फ़्रांसिसी ताकतों से मुक्त होने के बाद वियतनाम की आजादी का जश्न मानाने के लिए वर्ष 1954 में पंडित नेहरु वियतनाम गए थे| इसके बाद 1958 में वियतनाम के राष्ट्रपति हो ची मिन्ह भारत के दौरे पर आए थे| भारत के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद 1959 में वियतनाम के दौरे पर गए थे|

Related Article:वियतनाम 2020 तक विकसित देशो की लिस्ट में अपनी जगह बनाएगा

आज उच्च स्तरीय दौरों में निरंतर वृद्धि हो रही है तथा वियतनाम के शीर्ष पर लगभग सभी नेताओं ने भारत का दौरा किया है तथा पिछले वर्षों में भारतीय नेता एवं मंत्री दक्षिण पूर्व एशिया के इस देश के दौरे पर गए हैं|

भारतवियतनाम के सबंध  

हाल के संबंधों की झलक देखे तो दोनों देशो के बीच राजनीतिक संपर्क मजबूत हुए हैं और दोनों पक्षों के नेताओं ने कई उच्च-स्तरीय दौरे किए है| आज दोनों देशो में व्यापार और आर्थिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं| भारत और वियतनाम संबंधों को जो चीज ठोस रूप देती है वह बढ़ती विकास की साझेदारी है जो आई टी, शिक्षा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित है|

वियतनाम के आर्थिक उत्थातन को बढ़ावा देने के लिए भारत ने अनेक अवसंरचना परियोजनाओं के लिए तकरीबन 165 मिलियन डालर का ऋण प्रदान किया है| ज्ञान उद्योग में अपनी प्रमाणित ताकतों के आधार पर भारत ने क्षमता निर्माण की अनेक संस्थांओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसमें आई टी प्रशिक्षण केंद्रों, अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण केंद्रों तथा उद्यमशीलता विकास संस्थानों की स्थाटपना शामिल है|

वियतनाम में चावल अनुसंधान संस्थान की स्थांपना में भारत की सहायता ने इस देश को विश्व के अग्रणी चावल निर्यात बनने में मदद की है तथा दक्षिण पूर्व एशियाई देश में हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है|

हाल के समय में, आईटी दोनों देशों के बीच ज्ञान आधारित साझेदारी के एक महत्विपूर्ण आधार के रूप में उभरा है| भारत हनोई में इंदिरा गांधी हाई-टेक साइबर फोरेंसिक लैबोरेटरी तथा वियतनाम की राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में एक वियतनाम-भारत अंग्रेजी एवं आईटी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने में मदद करने के लिए सहमत हुआ है| आईटी क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों जिसमें एनआईआईटी, अप्टेलक एवं टाटा इंफोटेक शामिल हैं, ने पूरे वियतनाम में 80 से अधिक फ्रेंचाइजी केंद्र खोले हैं| पिछले साल नवंबर में भारत ने वियतनाम को एक हाई पावर सुपर कंप्यू्टर दिया था|

इसके अलावा, भारत और वियतनाम अपने बढ़ते संबंधों को क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए वृहद अभियान के अंग के रूप में देख रहे हैं| यह आसियान, पूर्वी एशिया शिखर बैठक, मेकांग – गंगा सहयोग, एशिया – यूरोप बैठक (असेम) सहित अनेक क्षेत्रीय मंचों में उनके घनिष्ट सहयोग में परिलक्षित होता है| भारत और वियतनाम इस क्षेत्र में शांति, समृद्धि, स्थिरता एवं विकास चाहते हैं|

राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग ने जनवरी 2018 में आसियान-भारत स्मारक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सीएलएमवी देशों में ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिए डिजिटल गाँव बनाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट उपक्रम और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में एकीकृत पीएचडी कार्यक्रमों का अध्ययन करने के लिए आसियान के सदस्य देशों के छात्रों और शोधकर्ताओं को 1000 फेलोशिप प्रदान करने की घोषणा की सराहना की थी|

आर्थिक सबंध

आर्थिक दृष्टि से भारत एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यंवस्था तथा दक्षिण पूर्व एशिया की उभरती अर्थव्यवस्था के बीच एक नई ऊर्जा देख सकते हैं| अनुमान है कि द्विपक्षीय व्यावपार 8 बिलियन डालर है| दोनों पक्ष अब 2020 तक द्विपक्षीय व्यायपार को 15 बिलियन डालर तक बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं|

वियतनाम अनेक भारतीय कंपनियों के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन है| वियतनाम में भारत की तकरीबन 1 बिलियन डालर मूल्यक की 68 परियोजनाएं पहले से चल रही हैं| भारतीय निवेश के तहत विविध क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि तेल एवं गैस की खोज, खनिज की खोज और प्रसंस्करण, चीनी विनिर्माण, कृषि रसायन, आईटी और कृषि प्रसंस्कोरण आदि| वियतनामी कंपनियां भी भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं|

भारत में वियतनाम की तीन निवेश परियोजनाएं हैं जिनका कुल मूल्य 23.6 मिलियन अमरीकी डालर है| वियतनाम में शीर्ष भारतीय निवेशकों में अन्यों के अलावा ओ वी एल, एस्सिर एक्स प्लोरेशन एंड प्रोडक्शेन लिमिटेड, नागार्जुन लिमिटेड, के सी पी इंडस्ट्रीभ लिमिटेड, नगोन कॉफी मैनुफैक्चसरिंग, वैंकटेश्वरर हैचरीज, फिलिप्सव कार्बन एंड मैकलियोड रसेल एवं सी जी एल शामिल हैं|

वियतनाम में किसी भारतीय कंपनी द्वारा एकल सबसे बड़ा निवेश टाटा पावर की बड़ी परियोजना है जो सोक ट्रांग में लांग फु-II ताप विद्युत संयंत्र के निर्माण के लिए 1.8 बिलियन डालर की परियोजना है|

भारतीय निवेश के तहत विविध क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि तेल एवं गैस की खोज, खनिज की खोज और प्रसंस्करण, चीनी विनिर्माण, कृषि रसायन, आईटी और कृषि प्रसंस्कोरण आदि|

वियतनाम को भारत निर्यात: मशीनरी और उपकरण, समुद्री भोजन, फार्मास्यूटिकल्स, सभी प्रकार के कॉटेज, ऑटोमोबाइल, कपड़ा और चमड़ा सामान, मवेशी फ़ीड घटक, रसायन, प्लास्टिक रेजिन, उत्पाद रसायन, सभी प्रकार के फाइबर, सभी प्रकार के स्टील, सभी के कपड़े प्रकार, साधारण धातु और आभूषण और कीमती पत्थर|

Related Article:US takes hardline approach on Iran; tells India to completely halt oil purchase

भारत वियतनाम से आयात करता है: मोबाइल फोन और सहायक उपकरण, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर, मशीनरी और उपकरण, रसायन, रबर, साधारण धातु, लकड़ी और लकड़ी के उत्पाद, सभी प्रकार के फाइबर, काली मिर्च, परिवहन के साधन, स्टील्स, कॉफी, जूते, उत्पादों के उत्पाद रसायन और पॉलिमर और रेजिन|

सांस्कृतिक सबंध

सितंबर 2016 में हनोई में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र खोला गया है| नियमित केंद्र में योग, नृत्य और संगीत कक्षाएं आयोजित की जाती हैं| साझेदारी, 2017 को मित्रता के वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है| वियतनाम के तीन शहरों (दानांग, हनोई और हो ची मिन्ह सिटी) में पहली बार भारतीय फिल्म महोत्सव (IFF) का आयोजन किया गया था| साल 2016 में भारत हनोई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में से एक रहा|

Summary
Article Name
Increasing relations between India and Vietnam
Author
Publisher Name
The Policy Times