कार्यस्थल में महिलाओं के साथ बढ़ते यौन उत्पीड़न मामलें… क्या कहती है रिपोर्ट?

देश में यौन उत्पीड़न के मामलें लगातार बढ़ रहें है| महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 से 2017 के बीच कुल 1,631 मामलें दर्ज किए गए है, जिसमें उत्तरप्रदेश का स्थान पहला है|

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Increasing sexual harassment cases with women in the workplace ... What does the report say?
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हाल ही में भारत की शीर्ष सूचीबद्ध कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई है जिसमें सर्विसेज फर्मों ने मैनुफैक्चरिंग कंपनियों के पिछलें दो वर्षों के यौन उत्पीड़न मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया है| रिपोर्ट के मुताबिक निजी क्षेत्रों की तुलना में सरकारी स्वामित्व वाली फर्मों में काफी कम मामलें दर्ज है|

वर्ष 2017-18 और 2016-17 के दौरान, सॉफ्टवेयर और वित्तीय सेवा क्षेत्रों में यौन उत्पीड़न के मामलों की सबसे ज्यादा संख्या दर्ज की गई है। बेंगलुरु स्थित आईटी प्रमुख विप्रो ने कैलेंडर वर्ष 2017 और 2016 में 217 दर्ज किए गए, वहीँ पिछले दो फिस्कल में इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने 172 और 127 मामलें दर्ज हुए है।

इस मामलें में बैंकिंग क्षेत्रों की भी हालात ख़राब है| रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि के दौरान एक्सिस बैंक में 79 यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की गई, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक ने 53 रजिस्टर्ड किया गया। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक ने चाइल्ड लेबर, मजबूर श्रम, अनैच्छिक श्रम और सेक्सुअल हरेस्मेंट के 194 शिकायत के मामलें दर्ज किए गए है।

इस प्रकार एक्सिस बैंक में वर्ष 2017-18 में कुल 13,424 महिला कर्मचारियों में से 0.35 प्रतिशत ने शिकायत की, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक के लिए यह 7,500 महिला कर्मचारियों के 0.45 प्रतिशत था।

द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वर्ष विप्रो में लगभग 57,340 स्थाई महिला कर्मचारी थी, जिनमे से 35% महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की थी। इंफोसिस में, वर्ष 2017-18 में यौन उत्पीड़न की शिकायतों में कुल 73,717 स्थाई महिला कर्मचारियों में से 0.11 प्रतिशत महिलाओं ने शिकायत दर्ज की। वहीं, टीसीएस में 1,39,434 महिला कर्मचारियों के 0.04 प्रतिशत से ऐसी शिकायतें प्राप्त हुईं।

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देश में सेक्सुअल हरेस्मेंट के मामलें लगातार बढ़ रहें है| महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 से 2017 के बीच कुल 1,631 मामलें दर्ज किए गए है जिसमें उत्तरप्रदेश का स्थान पहला है|

 राज्य 201520162017
1उत्तरप्रदेश 126129147
2दिल्ली 1008277
3मध्यप्रदेश 383539
4हरियाणा 333039
5राजस्थान 233131
6कर्नाटका 212238
7तमिलनाडु 243817
8प.बंगाल 192328
9बिहार 122015
10तेलंगाना 20128

पिछलें कई दिनों से चल रहे #MeToo कैंपेन के तहत महिलाओं ने कथित यौन उत्पीड़न के केस दर्ज कराए है| वहीँ, कुछ महिलाओं ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती बताई, जिसके प्रभाव में कई प्रभावशाली अभिनेता, वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म डायरेक्टर घेरे में आ गए है।

कार्यस्थल में अपने सहयोगियों या सीनियर द्वारा महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन उत्पीड़न के मामलें रोकने के लिए कई दिशा निर्देश जारी किए गए है जिसके प्रति महिलाओं को जागरूक होने की ज़रूरत है| इसके साथ ही यह जानना भी आवश्यक है कि कार्यस्थल में ‘सेक्सुअल हरेस्मेंट’ किस कानून के तहत कवर किया जाता है?

अब महिलाओं के अधीन कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोषण) कानून 2013 मौजूद है। दिसम्बर 2013 को इस नियम को पारित किया गया था।

क्या है सेक्सुअल हेरेस्मेंट?

कार्यस्थल में इच्छा के खिलाफ छूना या छूने की कोशिश करना ‘सेक्सुअल हेरेस्मेंट’ है| शारीरिक रिश्ता व यौन संबंध बनाने की मांग करना या उसकी उम्मीद करना| यदि विभाग का प्रमुख, किसी जूनियर को प्रमोशन का प्रलोभन देकर शारीरिक रिश्ता बनाने को कहता है तो यह यौन उत्पीड़न है l

अश्लील बातें करना, यदि एक वरिष्ठ संपादक या जूनियर पत्रकार को यह कहता है कि वह एक सफल पत्रकार बन सकती है क्योंकि वह शारीरिक रूप से आकर्षक है, तो यह भी यौन उत्पीड़न हैl

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013

सन् 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम को पारित किया गया था। जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं, उन पर यह अधिनियम लागू होता है|

इस अधिनियम के तहत प्रत्येक कार्यालय या शाखा में एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करता है। यह अधिनियम 9 दिसम्बर, 2013 में प्रभाव में आया था। यह क़ानून हर उस महिला के लिए बना है जिसका किसी भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ होl

अधिनियम में कहा गया है कि यौन उत्पीड़न की शिकायत “घटना की तारीख से तीन महीने के भीतर” की जानी चाहिए। घटनाओं की एक श्रृंखला के लिए इसे अंतिम घटना की तारीख से तीन महीने के भीतर किया जाना है। हालांकि, यह कठोर नहीं है। आईसीसी “समय सीमा बढ़ा सकती है” अगर “यह संतुष्ट है कि परिस्थितियां ऐसी थीं जो महिला को उस अवधि के भीतर शिकायत दर्ज करने से रोकती थीं”।

इस प्रकार, ये अधिनियम कार्यशील महिलाओं को कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न के खतरे का मुकाबला करने के लिए युक्ति है।

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कार्यस्थल में महिलाओं के साथ बढ़ते यौन उत्पीड़न मामलें... क्या कहती है रिपोर्ट?
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कार्यस्थल में महिलाओं के साथ बढ़ते यौन उत्पीड़न मामलें... क्या कहती है रिपोर्ट?
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देश में यौन उत्पीड़न के मामलें लगातार बढ़ रहें है| महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 से 2017 के बीच कुल 1,631 मामलें दर्ज किए गए है, जिसमें उत्तरप्रदेश का स्थान पहला है|
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