पाकिस्तान-चीन बस सर्विस: पीओके से निकलेगी बस, भारत ने किया विरोध

पाकिस्तान और चीन के बीच शुरू होने जा रही बस सेवा पर भारत ने आपत्ति जताई है| भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच सीपैक (सीपीईसी) से गुजरने वाली बस सेवा का पुरजोर विरोध किया है।

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पाकिस्तान और चीन के बीच शुरू होने जा रही बस सेवा पर भारत ने आपत्ति जताई है| भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच सीपैक (सीपीईसी) से गुजरने वाली बस सेवा का पुरजोर विरोध किया है। यह बस सेवा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के अंतर्गत पीओके से होकर शुरू की जानी प्रस्तावित है|

सोमवार को पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया ने कहा कि एक निजी प्राइवेट कंपनी 3 नवंबर को बस सेवा लांच करने वाली है। यह सेवा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के अंतर्गत शुरू की जाएगी। यह बस सेवा पाकिस्तान के लाहौर से और चीन के पश्चिमी झिनजियांग प्रांत के कासघर शहर के बीच इसी सप्ताह शुरू की जा रही है। चीन, पाकिस्तान से अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना चीन-पाक आर्थिक गलियारा (सीपैक) के तहत इसे शुरू करने जा रहा है।

स्थानीय पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक 30 घंटे की इस बस सेवा का किराया 13 हजार रूपए और वापसी में 23 हजार रूपए होगा। पाकिस्तान की निजी कंपनी का यह भी कहना है कि यह बस पाकिस्तान स्थित लाहौर से काशगर तक हफ्ते में चार दिन चलेगी। खबर यह भी है कि इसके लिए लोगों ने बुकिंग कराना शुरू कर दिया है।

55 साल पहले चीन-पाक के बीच हुआ समझौता अमान्य

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर इस पर भारत की तरफ से कड़ा विरोध जताया है। कुमार ने ट्वीट कर कहा है कि हमने पाकिस्तान औऱ चीन के बीच प्रस्तावित बस सेवा का विरोध किया है जो चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपैक) के तहत पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (पीओके) से होते हुए गुजरेगी।

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ट्वीट में आगे कहा कि भारत सरकार इस बात पर शुरू से अडिग है कि ‘चीन-पाकिस्तान बाउंड्री समझौता 1963’ गैरकानूनी है और इसे भारत सरकार के द्वारा कभी भी मान्यता नहीं दी गई है। इस प्रकार से पीओके से होकर जाने वाली बस की सेवा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता के लिए उल्लंघन है।

सबंध मज़बूत करने का प्रयास

चीन और पाकिस्तान के बीच बस सेवा दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को मजबूत करने का एक प्रयास है। इससे ये साफ है कि यह बस सेवा सीपैक का ही एक भाग है। बता दें कि सीपैक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का वन बेल्ट वन रोड के तहत पाकिस्तान के साथ अहम परियोजना है। इसके तहत दोनों देशों को जोड़ते हुए बड़े स्तर पर रेलवे और सड़क निर्माण का कार्य किया जा रहा है। यह परियोजना चीन के संसाधनों से परिपूर्ण क्षेत्र झिनजियांग प्रांत और पाकिस्तान के अरब सागर के ग्वादर पोर्ट को जोड़ता है। ज्ञात हो 50 बिलियन डॉलर वाली सीपीईसी की शुरुआत 2015 में हुई थी| सीपीईसी के माध्यम से चीन के संसाधन वाले शिनजियांग प्रांत को पाकिस्तान के ग्वाडार से जोड़ना है|

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