भारत का आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से घटकर 6.8 प्रतिशत पर पहुंची

फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास के अनुमान में कटौती की है जो कि अर्थव्यवस्था में अपेक्षित गति से कमजोर होने पर अपने पिछले अनुमान के 7 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत कर दिया है. वहीं, वित्तवर्ष 2020-21 में 7.10 प्रतिशत की दर का अनुमान लगाया है.

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फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास के अनुमान में कटौती की है जो कि अर्थव्यवस्था में अपेक्षित गति से कमजोर होने पर अपने पिछले अनुमान के 7 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत  कर दिया है. वहीं, वित्तवर्ष 2020-21 में 7.10 प्रतिशत की दर का अनुमान लगाया है.

फिच का कहना है कि आरबीआई ने फरवरी की मौद्रिक नीति समीक्षा में उदार रवैया अपनाते हुए रेपो रेट में 0.25% कटौती की थी. इस साल इतनी ही कटौती और की जा सकती है. फिच के मुताबिक महंगाई दर तय लक्ष्य से नीचे रहने की वजह से आरबीआई ऐसा कर सकता है.

2020-21 में 7.1% रहेगी विकास दरफिच ने मौजूदा वित्त वर्ष (2018-19) के लिए भी देश की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 7.2 कर दिया है. पिछली बार 7.8% की उम्मीद जताई है. रेटिंग एजेंसी ने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक में कहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी 7.1% की दर से बढ़ेगी. पिछला अनुमान 7.3% का था|

जीडीपी आप पर कैसे असर डालती है

भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज़ यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है. ऐसे में अगर देश में तीनों में से किसी भी सेक्टर में ग्रोथ घटती है तो इसका मतलब साफ है कि उससे जुड़े उद्योग संकट में है. लिहाजा नौकरी करने वाले से लेकर सभी पर इसका असर होता है. वहीं, जीडीपी में तेज ग्रोथ आती है तो मतलब साफ है कि नौकरियां बढ़ रही है. लिहाजा लोगों की आमदनी भी तेजी से बढ़ेगी.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि नकारात्मक जीडीपी यह निर्धारित करता है कि देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है. उस समय देश में उत्पादन घट जाता है और बाद बेरोजगारी बढ़ती है. जिसकी वजह से हर व्यक्ति की आमदनी पर इसका असर होता है.

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भारत का आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से घटकर 6.8 प्रतिशत पर पहुंची
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फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास के अनुमान में कटौती की है जो कि अर्थव्यवस्था में अपेक्षित गति से कमजोर होने पर अपने पिछले अनुमान के 7 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत कर दिया है. वहीं, वित्तवर्ष 2020-21 में 7.10 प्रतिशत की दर का अनुमान लगाया है.
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The Policy Times