सीबीआई में आंतरिक युद्ध: सीबीआई बनाम सीबीआई

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और सीबीआई  के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच चल रही 'नूराकुश्ती' अब खुलकर सामने आ गई है. खुद CBI ने ही राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एक FIR दायर कर दी है|

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घूसखोरी विवाद में जिस तरह से सीबीआई ने अपने ही शीर्ष अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है उसके बाद लगातार सीबीआई के भीतर मतभेद चल रहा है और तमाम अधिकारी एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। सीबीआई ने रिश्वत घोटाले में अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर किया है|

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और सीबीआई  के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच चल रही ‘नूराकुश्ती’ अब खुलकर सामने आ गई है. खुद CBI ने ही राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एक FIR दायर कर दी है| इस FIR में अस्थाना पर मीट कारोबारी मोइन क़ुरैशी के मामले में जांच के घेरे में चल रहे एक कारोबारी सतीश से दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है| दूसरी तरफ, अस्थाना ने पलटवार करते हुए सीबीआई चीफ आलोक वर्मा पर ही रिश्वखोरी का आरोपी लगाया है| इस पूरे मामले में सीबीआई ने अपने चीफ का पक्ष लिया है और अस्थाना के आरोपों को झूठा करार दिया है|

इस मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विटर पर निशाना साधा है| उन्होंने कहा है कि पीएम के चहेते, गुजरात कॉडर के अधिकारी गोधरा पर गठित एसआईटी से प्रसिद्धि में आए सीबीआई में नंबर के दो अधिकारी को अब रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है| सीबीआई प्रधानमंत्री के लिए राजनीतिक बदला लेने का हथियार बन गया है|  एक संस्थान जो खत्म होने को है, खुद से लड़ रहा है|

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में सीबीआई ने मंगलवार को एफआईआर दायर किया था| इसमें मोईन कुरैशी भ्रष्टाचार मामले में एक बिजनेसमैन से रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में राकेश अस्थाना का नाम आरोपी नंबर एक के रूप में शामिल किया गया है|

सीबीआई ने धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने टेलीफोन इंटरसेप्ट, व्हाट्सएप मैसेजेस, मनी ट्रेल और एक बयान रखा है। 21 सितंबर को सीबीआई ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को सूचित किया था कि वह भ्रष्टाचार के छह मामलों में अस्थाना की जांच कर रहा है।

कौन हैं राकेश अस्थाना :

राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) 1984 बैच के गुजरात कैडर के IPS हैं. वह पहली बार साल 1996 में चर्चा में आए, जब उन्होंने चारा घोटाला मामले में लालू यादव को गिरफ्तार किया| दूसरी तरफ, 2002 में गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी की जांच के लिए गठित SIT का नेतृत्व भी राकेश अस्थाना ने ही किया था| इसके अलावा वह अहमदाबाद ब्लास्ट और आसाराम केस जैसे तमाम चर्चित मामलों की जांच में शामिल रहे हैं| आपको बता दें कि राकेश अस्थाना को पिछले साल अक्टूबर में सीबीआई का स्पेशल डायरेक्टर नियुक्त किया गया था| CBI में यह उनकी दूसरी पारी है| इससे पहले वह अतिरिक्त निदेशक के पद पर काम कर चुके हैं. वडोदरा और सूरत के पुलिस कमिश्नर रहे राकेश अस्थाना को पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का करीबी भी माना जाता है|

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कौन है  मोइन क़ुरैशी

90 के दशक में मीट बेचता था| परिवार का मीट बिजनेस 50 के दशक में शुरू हुआ था| कुरैशी के पिता अब्दुल माजिद चलाते थे दुकान| रामपुर से दिल्ली सप्लाई होती थी. मीट से पैसा तब बनना शुरू हुआ जब एक्सपोर्ट करने केलिए  धंधे में आ गये| मोईन कुरैशी दस सालों में देश के सबसे बड़े मीट व्यापारियों में से एक हो गया. अब तो ये भैंस के मीट के सबसे बड़े व्यापारी हैं. यूपी से देश का 70 प्रतिशत बफलो मीट एक्सपोर्ट होता है और अब इनकम टैक्स और एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट दोनों इस के पीछे पड़े है. मतलब आय से अधिक संपत्ति और मनी लांडरिंग दोनों में ही इसका नाम है. वैसे तो इनकम टैक्स का छापा पड़ना आज के जमाने में प्रतिष्ठा का विषय है. पर इनकम टैक्स वालों को छका देना ताज्जुब का विषय है|

कानपुर से बिजनेस शुरू करने वाले मोईन कुरैशी को कोई पकड़ता भी है तो एयरपोर्ट पर डिटेन किया जाता है पर वो निकल जाता है| हाई कोर्ट का कहना है कि विजय माल्या मत बनो| वापस आ जाओ  पर वो नहीं आता है अपनी मर्जी से वापस आता है. ये आदमी कांग्रेस की सरकार में भी उतना ही ताकतवर था| सीबीआई डायरेक्टर को इनका दोस्त कहा जाता था. प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इनका नाम लिया है| लोग कहते हैं कि सोनिया गांधी से कुरैशी के अच्छे रिश्ते रहे हैं. 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने कहा कि सोनिया के इशारे पर ही कुरैशी की इनकम टैक्स वालों ने जांच नहीं की| जनता के दिमाग में पहली बार मोईन कुरैशी का नाम तभी गूंजा था जब नरेंद्र मोदी ने 2014 की अपनी रैली में कहा था कि कुरैशी का रास्ता 10, जनपथ से हो के जाता है| लोग ये भी बताते हैं कि मोईन कुरैशी ने 2004 में बीजेपी का टिकट लेने की पूरी कोशिश की थी|

हैदराबाद स्थित कारोबारी साना सतीश की शिकायत पर दुबई स्थित मिडिलमैन मनोज प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ कदम उठाए। कुरैशी भ्रष्टाचार के मामले में मनोज प्रसाद की भूमिका की जांच अस्थाना के अंडर में सीबीआई एसआईटी द्वारा की जा रही थी|

क्या है पूरा मामला

CBI ने अपने स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एक FIR दर्ज कराई है. इस FIR में अस्थाना पर मीट कारोबारी मोइन क़ुरैशी के मामले में जांच के घेरे में चल रहे एक कारोबारी सतीश साना से दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है| सीबीआई में नंबर दो की हैसियत रखने वाले| राकेश अस्थाना इस जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख हैं| कारोबारी सतीश साना का आरोप है कि सीबीआई जांच से बचने के लिए उन्होंने दिसंबर 2017 से अगले दस महीने तक क़रीब दो करोड़ रुपए रिश्वत ली|

‘टॉप’ अधिकारियों की ‘जंग’ पर CBI ने क्या कहा

सीबीआई अपने निदेशक आलोक वर्मा (Alok Verma) के बचाव में उतर आई है और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के आरोपों को ‘मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण’ करार दिया है| CBI ने यह भी कहा है कि उसके विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला कॉल रिकॉर्ड और वाट्सएप मैसेज पर आधारित है| सीबीआई के मुताबिक कथित रिश्वत मामले में बिचौलिए मनोज प्रसाद के पकड़े जाने के बाद उसने नौ फोन कॉल का विश्लेषण किया है|

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The Policy Times
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