पत्रकार मनोज का आखरी सन्देश : “बोले कोई इलाज पर ध्यान नहीं दे रहा “

तेलंगाना के हैदराबाद में कोरोना से एक पत्रकार की मौत की खबर सामने आई। पत्रकार कुछ दिनों से बीमार था और वह गांधी अस्पताल में भर्ती था। उन्हें 4 जून को किसी और अस्पताल से वहाँ लाया गया था।

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तेलंगाना के हैदराबाद में कोरोना से एक पत्रकार की मौत की खबर सामने आई। पत्रकार कुछ दिनों से बीमार था और वह गांधी अस्पताल में भर्ती था। उन्हें 4  जून को किसी और अस्पताल से वहाँ लाया गया था।

मनोज की उम्र 36 वर्ष थी। वह मादन्नापेट का रहने वाला था। डी.मनोज कुमार ने कई टीवी चैनल्स में क्राइम रिपोर्टर के तौर पर काम किया था। वर्तमान में वह तेलुगू न्यूज चैनल ‘टीवी-5’ में क्राइम रिपोर्टिंग के प्रभारी थे। 4 जून को दोपहर 12.40 पर मनोज को गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें फीवर अस्पताल से गांधी अस्पताल भेजा गया था, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।

मनोज का आखिरी मैसेज :

“ICU अच्छा नहीं है। प्लीज किसी प्राइवेट अस्पताल में चलते हैं। यहां कोई ध्यान नहीं दे रहा है।”

ये मैसेज मनोज ने 6 जून को दोपहर 3:46 पर उसके भाई साईनाथ को भेजा था। मनोज की चैट से उनकी हताशा साफ दिखती है। जब मनोज ने ऑक्सीजन सपोर्ट के लिए पूछा तो उन्हें कोई ठीक से जवाब नहीं मिला और उन्होंने अपने भाई को टेक्स्ट किया, प्लीज यहां से चलते हैं।” चैट मीडिया में रिलीज कर दी गई थी।

साईनाथ का घटनाक्रम पर विवरणन :

साईंनाथ भी कोरोना वायरस पॉजिटिव थे और मनोज के साथ ही उनका इलाज चल रहा था। जब उनमें लक्षण नहीं दिखे, तो उन्हे 7 जून की रात ही डिस्चार्ज किया गया और वो अब होम क्वॉरंटीन में हैं। साईंनाथ ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने गांधी अस्पताल के COVID-19 वॉर्ड की हालत बताई । ये अस्पताल राज्य सरकार का नोडल सेंटर है, जहां कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों का इलाज होता है।


साईंनाथ ने घटनाक्रम के बारे में बताते हुए कहा, “3 जून को सुबह करीब 11 बजे को हम फीवर अस्पताल गए क्योंकि मनोज में कुछ लक्षण थे। दोपहर करीब 3 बजे हम दोनों का टेस्ट हुआ। इसके बाद हम घर आ गए। उसी दिन रात 10 बजे के बाद हमें कॉल आया कि हम दोनों पॉजिटिव हैं। हम तुरंत फीवर अस्पताल गए। रात करीब 11 बजे उन्होंने हमें गांधी अस्पताल रेफर कर दिया। एक घंटे तक हमने फॉर्मेलिटी पूरी की। रात 1 बजे हमें सातवें फ्लोर के एक वॉर्ड में शिफ्ट किया गया।”

वॉर्ड में कोई उचित सुविधा नहीं’

मनोज को उसी रात सांस लेने में तकलीफ हो रही थी तथा समय से इलाज़ न मिलने के कारण 4 जून की सुबह तक मनोज की स्थित और खराब हो गई थी। साईंनाथ ने बताया, “मुझसे उसकी हालत देखी नहीं जा रही थी और मैं डॉक्टर्स को बताने की कोशिश करता रहा।मैं परेशान हो गया था. मेरा भाई एक जर्नलिस्ट था तो मैंने उसके कुछ साथियों को कॉल किया।उन्होंने सुपरिंटेंडेंट पर दबाव डाला और कई कॉल किए. सुबह करीब 11 बजे अस्पताल ने कहा कि वो उसे ICU में शिफ्ट करेंगे।जब उन्होंने इसके 4 घंटे बाद भी ऐसा नहीं किया तो मैंने उनसे सख्ती से पूछा और उन्होंने कहा कि ICU में इतने बेड नहीं हैं। मैं उनसे कहा कि क्या वॉर्ड में ही ऑक्सीजन सिलिंडर रख सकते हैं तो उन्होंने बताया कि वो भी मौजूद नहीं है. ये यहां की स्थिति है।”

उन्होने यह भी बताया की उन्होने दबाव बनाई रखा और फिर 4 जून को शाम 4 बजे के आसपास वो मनोज को वॉर्ड से बाहर ले गए तथा उन्होंने आरोप लगते हुआ कहा की अस्पताल के लोगों ने मनोज को करीब डेढ़ घंटे तक व्हीलचेयर पर रखा और इलाज नहीं किया।  साईंनाथ को मनोज ने इसी समय मेसेज किया था कि प्राइवेट अस्पताल में इलाज अच्छा मिलेगा। साईंनाथ का कहना है कि जब मनोज के दोस्तों ने स्वास्थ्य मंत्री को कॉल किया उसका बाद ही उन्होने केयर अच्छे से की  और उसे आइसोलेशन वॉर्ड में शिफ्ट किया। लेकिन 7 जून की सुबह 9:30 के करीब साईनाथ को कॉल आया की मनोज की हालत गंभीर है और उसे वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया जा रहा है। फिर कुछ समय बाद उस पुलिस कॉल आया की उसका भाई मनोज की  मौत हो गई है।

दावा खारिज किया

गांधी अस्पताल में सुविधाओं की कमी के दावे को तेलंगाना सरकार ने खारिज किया तथा चीफ मिनिस्टर ऑफिस के एक प्रेस नोट में कहा, “कुछ लोग झूठ फैला रहे हैं कि गांधी अस्पताल कोरोना वायरस मरीजों से भर गया है. कुछ न्यूजपेपर और टीवी चैनल ये फेक न्यूज रिपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन ये एक झूठ है. गांधी अस्पताल में 2,150 मरीजों के इलाज की सुविधा है. ऑक्सीजन सप्लाई फैसिलिटी के साथ 1000 बेड हैं. अभी तक वहां सिर्फ 247 कोरोना मरीज ही हैं।”

डॉक्टर एम राजा राव,गांधी अस्पताल के अधीक्षक ने कहा, ‘वह आईसीयू में थे और डॉक्टरों की एक टीम चौबीसों घंटे उन पर नजर रखे हुए थी। मैंने भी कई बार उन्हें देखा, लेकिन आज सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 9 बजकर 37 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मनोज पहले से ही म्यास्थेनिया ग्रेविस से पीड़ित थे जिसमें सभी मांसपेशियों में श्वसन की मांसपेशियों सहित कमजोरी होती है। इसके लिए पूर्व में उनकी सर्जरी भी की गई थी (उनकी थाइमस ग्रंथि को हटा दिया गया था), और वह उस समस्या के लिए स्टेरॉयड पर ही थे। स्वास्थ्य की इन समस्याओं के साथ वे कोविड पॉजिटिव पाए गए और उन्हें टाइप 1 श्वसन विफलता और एआरडीएस के साथ निमोनिया हो गया था।

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