लक्षद्वीप ग्रामीण इलाके में पेयजल की समस्सया बढ़ी

भारत के लक्षद्वीप में भूजल के गिरते स्तर से चिंतित ग्रामीणों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाया है और अपनी भूमि एवं भावी पीढ़ियों के सरंक्षण के लिए एनजीटी के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में कवरात्ती के द्वीप पंचायत के ग्रामीणों द्वारा लिखित ‘‘त्राहिमाम् (एसओएस)’’ पत्र को पढ़ने के बाद एनजीटी ने वहां के जिला कलेक्टर और केंद्रीय भूजल प्राधिकारण से मामले पर अपनी रिपोर्ट दायर करने को कहा।

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भारत के लक्षद्वीप में भूजल के गिरते स्तर से चिंतित ग्रामीणों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाया है और अपनी भूमि एवं भावी पीढ़ियों के सरंक्षण के लिए एनजीटी के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में कवरात्ती के द्वीप पंचायत के ग्रामीणों द्वारा लिखित ‘‘त्राहिमाम् (एसओएस)’’ पत्र को पढ़ने के बाद एनजीटी ने वहां के जिला कलेक्टर और केंद्रीय भूजल प्राधिकारण से मामले पर अपनी रिपोर्ट दायर करने को कहा।

न्यायमूर्ति रघुवेंद्र एस राठौड़ के नेतृत्व वाली एनजीटी की तीन सदस्य पीठ ने मामले में सहायता के करने के लिए वकील समीर सोढी को न्याय मित्र (एमिक्स क्यूरी) नियुक्त किया। प्राधिकारियों ने अपनी रिपोर्टों में माना है कि अगर ताजे पानी के घटते स्रोतों के इस्तेमाल को नियमित करने एवं वर्ष जल संचयन के तुरंत उपाय नहीं किए गए तो ये हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं। लक्षद्वीप एक केंद्र शासित प्रदेश है और यह 32 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक इसकी आबादी 64,473 है।

एनजीटी के निर्देशों के बाद लक्षद्वीप के जिला कलेक्टर ने हरित अधिकरण के समक्ष एक स्थिति रिपोर्ट पेश की है जिसमें कहा है कि द्वीप में बहुमूल्य भूजल के संरक्षण के लिए प्रशासन सभी कदम उठाएगा।उन्होंने कहा कि जल संसाधन मंत्रालय ने केंद्र शासित प्रदेश से मॉडल ग्राउंड वॉटर (सस्टेनएबल मेनेजमेंट) अधिनियम 2016 को अपनाने को कहा है। केंद्र शासित प्रदेश ने अपनी टिप्पणियां जल संसाधन मंत्रालय को सौंप दी हैं। इसी तरह से केंद्रीय भूल जल प्राधिकरण ने कहा है कि वर्ष जल संचयन और समुद्र के पानी को पेयजल योग्य बनाना ताजे पानी का बेहतरीन विकल्प है। द्वीप में ताजे पाने के लिए सिर्फ भूजल ही उपलब्ध स्रोत है और यह भी सिकुड़ता जा रहा है। इन सभी स्रोतों को सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए आरक्षित करना है।

एनजीटी प्रमुख आर्दश कुमार गोयल को लिखे पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि उनके द्वीप का पारिस्थितिक तंत्र नाजुक है और पेय जल के वास्ते ताजे पानी के सीमित स्रोत हैं। पत्र में कहा गया है इस परिस्थिति में हम राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष से विनम्रता से अनुरोध करते हैं कि कृपया हमारी भूमि और जल को बचाने तथा हमारी भावी पीढ़ियों के संरक्षण के तत्काल कार्रवाई करें। मामले को अब 11 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है|

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भारत के लक्षद्वीप में भूजल के गिरते स्तर से चिंतित ग्रामीणों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण का दरवाजा खटखटाया है और अपनी भूमि एवं भावी पीढ़ियों के सरंक्षण के लिए एनजीटी के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में कवरात्ती के द्वीप पंचायत के ग्रामीणों द्वारा लिखित ‘‘त्राहिमाम् (एसओएस)’’ पत्र को पढ़ने के बाद एनजीटी ने वहां के जिला कलेक्टर और केंद्रीय भूजल प्राधिकारण से मामले पर अपनी रिपोर्ट दायर करने को कहा।
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The Policy Times
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