कृषि मंत्रालय ने जारी किया साप्ताहिक आंकड़ा, सूखे से रबी बुवाई की धीमी हुई रफ्तार

रबी सीजन वाली फसलों की बुवाई का माकूल समय होने के बावजूद दलहन और मोटे अनाज वाली फसलों की खेती बहुत पीछे है। सूखे की वजह से दाल और मोटे अनाज उत्पादक राज्यों में बुवाई नहीं हो पा रही है। दालों की बुवाई 18 फीसद तक पीछे है। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई भी उचित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।

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रबी सीजन वाली फसलों की बुवाई का माकूल समय होने के बावजूद दलहन और मोटे अनाज वाली फसलों की खेती बहुत पीछे है। सूखे की वजह से दाल और मोटे अनाज उत्पादक राज्यों में बुवाई नहीं हो पा रही है। दालों की बुवाई 18 फीसद तक पीछे है। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई भी उचित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।

पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बुवाई पीछे चल रही है। दरअसल कम नमी की वजह से बुवाई से पहले पलेवा की जरूरत पड़ रही है।

कृषि मंत्रालय की ओर से जारी बुवाई आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में केवल 7.35 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कुल 12.98 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की खेती हो चुकी थी। कर्नाटक के सुदूर उत्तर और दक्षिणी क्षेत्रों में सूखे का गंभीर असर हुआ है। इस क्षेत्र में खरीफ फसलों की पैदावार भी बुरी तरह प्रभावित रही है। दाल उत्पादन के मामले में दूसरे बड़े राज्य महाराष्ट्र में 5.62 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हो सकी है, जो पिछले साल के अपने 10.61 लाख हेक्टेयर के आंकड़े से बहुत दूर है। मध्य प्रदेश में 31 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 29 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो पाई है।

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जारी आंकड़ों के मुताबिक दालों का कुल बुवाई रकबा 69.95 लाख हेक्टेयर पहुंचा है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 85.32 लाख हेक्टेयर रकबा में दालों की फसल बो दी गई थी। गेहूं की बुवाई तेज है, लेकिन जमीन में नमी की कमी को पूरा करने के लिए किसान पलेवा करने मजबूर है। इसके चलते गेहूं की बुवाई चालू सीजन में देर हो पाएगी। अब तक 51.63 लाख हेक्टेयर में गेहूं बो दिया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 54.28 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।

दरअसल, गेहूं की खेती ज्यादातर सिंचित क्षेत्रों में होती है। पंजाब में 14.68 लाख हेक्टेयर रकबा में गेहूं की खेती हो पाई है, जबकि पिछले साल अब तक 17.58 लाख हेक्टेयर में गेहूं बो दिया गया था। इसके मुकाबले हरियाणा में पिछले साल के 6.93 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 5.54 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो सकी है। मध्य प्रदेश में गेहूं का रकबा पिछले साल के 15.58 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 19 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है।

तिलहन फसलों का रकबा भी पिछले साल के 49.50 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 46.85 लाख हेक्टेयर हुआ है। मोटे अनाज वाली फसलों का बुवाई रकबा में अप्रत्याशित कमी दर्ज की गई है। अब तक हुई के 16.27 लाख हेक्टेयर के मुकाबले पिछले साल इस समय तक 29.74 लाख हेक्टेयर रकबा में बुवाई हो चुकी थी। रबी सीजन की कुल फसलों का बुवाई रकबा 191.12 लाख हेक्टेयर हो चुका है। जबकि पिछले साल अब तक का बुवाई रकबा 227.41 लाख हेक्टेयर था।

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रबी सीजन वाली फसलों की बुवाई का माकूल समय होने के बावजूद दलहन और मोटे अनाज वाली फसलों की खेती बहुत पीछे है। सूखे की वजह से दाल और मोटे अनाज उत्पादक राज्यों में बुवाई नहीं हो पा रही है। दालों की बुवाई 18 फीसद तक पीछे है। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई भी उचित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।
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