मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश की मांग को ले कर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

महाराष्ट्र के एक मुस्लिम दंपती ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की है कि वह सरकार को निर्देश दे कि मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत मिले। दंपती ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर मांग की है कि महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति मिले और उन्हें प्रार्थना करने का भी अधिकार मिले। याचिकाकर्ता की दलील है कि पवित्र कुरआन और इस्लाम के बानी मोहम्मद साहेब ने महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश का कभी विरोध नहीं किया।

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महाराष्ट्र के एक मुस्लिम दंपती ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की है कि वह सरकार को निर्देश दे कि मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत मिले। दंपती ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर मांग की है कि महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति मिले और उन्हें प्रार्थना करने का भी अधिकार मिले। याचिकाकर्ता की दलील है कि पवित्र कुरआन और इस्लाम के बानी मोहम्मद साहेब ने महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश का कभी विरोध नहीं किया।

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याचिकाकर्ता ने मक्का के उदाहरण का हवाला दिया, जहां पुरुष और महिलाएं दोनों ही काबा की परिक्रमा करते हैं और रमजान में साथ तरावीह भी पड़ते हैं। इसके अलावा दुनिया में सबसे पवित्र मस्जिद मदीना में मस्जिदे नबवी में पुरुष और महिलाओं, दोनों को समान रूप से आने की इजाजत देते हैं। उन्होंने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला भी दिया।

याचिकाकर्ता दंपति ने कहा कि सबरीमाला के मामले में माननीय अदालत ने कहा कि महिलाओं को पूजा के अधिकार देने से इनकार करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कवर के रूप में नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह मानवीय गरिमा के खिलाफ है। महिलाओं पर प्रतिबंध गैर-धार्मिक कारणों से है और यह सदियों से चले आ रहे भेदभाव की गंभीर छाया है।

मुस्लिम दंपति ने मांग की है कि मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश करने पर रोक लगाने वाले सभी फतवे को रद्द कर दिया जाना चाहिए। महिलाओं के प्रवेश को मस्जिद में प्रतिबंधित करने से रोकने की परंपरा को बंद करना चाहिए और इसे गैर संवैधानिक घोषित करना चाहिए। इसके साथ ही इसे गैर-भेदभाव के अधिकार, समानता के अधिकार, सम्मान के साथ मानव के जीने का अधिकार, और धर्म के अधिकार का उल्लंघन घोषित करना चाहिए।

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याचिका में केंद्र सरकार, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, केंद्रीय वक्फ परिषद, महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को पार्टी बनाया गया है। उन्होंने यह इंगित करते हुए कहा कि कुरान या हदीस में लिंग विभाजन का कोई उल्लेख नहीं है। दंपति ने कहा कि इस तरह की प्रथाएं महिलाओं की बुनियादी गरिमा के प्रति अपमानजनक थीं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती थीं।

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Muslim couple moves Supreme Court seeking women's entry into mosques
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महाराष्ट्र के एक मुस्लिम दंपती ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की है कि वह सरकार को निर्देश दे कि मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत मिले। दंपती ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर मांग की है कि महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की अनुमति मिले और उन्हें प्रार्थना करने का भी अधिकार मिले। याचिकाकर्ता की दलील है कि पवित्र कुरआन और इस्लाम के बानी मोहम्मद साहेब ने महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश का कभी विरोध नहीं किया।
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The Policy Times